नेपाल में भीषण बाढ़ से तबाही, विदेशी बचाव टीमों को फिलहाल ‘ना’; भारत भेजेगा मेडिकल और इंजीनियरिंग टीम
नेपाल में आई भीषण फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। नेपाल-तिब्बत सीमा के दोनों ओर आई इस प्राकृतिक आपदा में अब तक कम से कम 552 लोगों की मौत की खबर है। वहीं 1,400 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।
आपदा के बाद भारत ने नेपाल को राहत और बचाव कार्यों में हर संभव सहायता देने की पेशकश की है। भारत ने राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीमों को आवश्यक उपकरणों के साथ नेपाल भेजने की भी पेशकश की है।
नेपाल के अनुरोध पर भारत भेजेगा अतिरिक्त सहायता
भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने शुक्रवार को बताया कि नेपाल के अनुरोध पर भारत अतिरिक्त मानवीय सहायता भेजने की तैयारी कर रहा है। इस सहायता में मेडिकल टीम, इंजीनियरिंग टीम, टनल रेस्क्यू टीम और आवश्यक उपकरण शामिल हैं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारत की ओर से राहत सामग्री लेकर दो विमान पहले ही नेपाल भेजे जा चुके हैं। तीसरे विमान के जरिए भी मानवीय सहायता भेजने की तैयारी की जा रही है।
उन्होंने बताया कि नेपाल के अनुरोध पर भारत टनल रेस्क्यू टीम भेजने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए पहले एक रिक्की टीम नेपाल भेजी जाएगी, जो मौके पर स्थिति का आकलन करेगी और यह तय करेगी कि बचाव अभियान के लिए किन उपकरणों की जरूरत होगी।
भारत नेपाल में एक मेडिकल टीम भी भेज रहा है। इसके अलावा, भारत ने बेली ब्रिज और उनसे जुड़ी तकनीकी टीम उपलब्ध कराने की पेशकश की है, ताकि बाढ़ से प्रभावित इलाकों में सड़क और अन्य संपर्क व्यवस्था को जल्द बहाल किया जा सके।
भारत ने NDRF टीम भेजने की भी पेशकश की
भारत ने नेपाल में जारी सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन में मदद के लिए NDRF की टीमों और संबंधित उपकरणों को भेजने की अलग से पेशकश की है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत ने नेपाल सरकार के सामने NDRF टीमों को उपकरणों के साथ भेजने का विशेष प्रस्ताव रखा है। इन टीमों की मदद से प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने और खोज एवं बचाव अभियान को तेज करने में सहायता मिल सकती है।
भारत ने कहा है कि वह नेपाल सरकार के जवाब का इंतजार कर रहा है और नेपाल को जिस भी सहायता की आवश्यकता होगी, भारत उसे उपलब्ध कराने के लिए तैयार है।
नेपाल ने कहा- फिलहाल विदेशी बचाव टीमों की जरूरत नहीं
इससे पहले नेपाल के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लोक बहादुर छेत्री ने कहा था कि देश की अपनी सुरक्षा एजेंसियां राहत और बचाव अभियान का नेतृत्व कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि विदेशी मदद की पेशकश स्वाभाविक है, लेकिन फिलहाल नेपाल को विदेशी सर्च एंड रेस्क्यू टीमों की जरूरत नहीं है। नेपाल की सुरक्षा एजेंसियां मौजूदा स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह सक्षम हैं।
हालांकि, बाद में छेत्री ने स्पष्ट किया कि नेपाल अंतरराष्ट्रीय सहायता को पूरी तरह से खारिज नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि यदि नेपाल को किसी विशेष प्रकार की विशेषज्ञता या तकनीकी सहायता की आवश्यकता होगी, तो वह इसके लिए अनुरोध करेगा।
कई देशों ने नेपाल को मदद की पेशकश की
रिपोर्ट के अनुसार, भारत के अलावा चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका और बांग्लादेश ने भी नेपाल को राहत और बचाव टीम भेजने की पेशकश की है।
इस प्राकृतिक आपदा में कई बस्तियां बह गई हैं। सड़कें और पुल बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं, जबकि महत्वपूर्ण जलविद्युत बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है।
नेपाल में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। भारत ने भी स्पष्ट किया है कि नेपाल की आवश्यकता और अनुरोध के अनुसार वह मानवीय, चिकित्सा और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने के लिए तैयार है।

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