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विकलांग व्यक्तियों का घर पर ही किया जाए टीकाकरण और सप्ताह में एक दिन लगाया जाए शिविर

प्रहार अपंग क्रांति आंदोलन पश्चिम महाराष्ट्र के अध्यक्ष धर्मेंद्र सातव द्वारा प्रशासन से मांग
वाघोली, जून (ह.ए. प्रतिनिधि)

कोरोना संक्रमण के प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन द्वारा बीमारी के खिलाफ टीकाकरण अभियान को प्रभावी ढंग से चलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। टीकाकरण कराने के लिए प्रशासन की ओर से कोविड निवारक टीकाकरण सेंटर शुरू किए गए हैं, लेकिन ऐसे टीकाकरण केंद्र में जाकर गंभीर रूप से विकलांगों के लिए टीकाकरण कराना मुश्किल है। अत: प्रशासन ने परिस्थिति की गंभीरता को देखते हुए गंभीर रूप से विकलांगों को कोविड का टीका घर पर जाकर लगाने के लिए उचित कदम उठाने चाहिए, साथ ही इस कार्य हेतु सप्ताह में एक दिन विकलांगों को कोविड का टीका लगवाने के लिए टीकाकरण शिविर के लिए आरक्षित रखा जाए। यह मांग पुणे जिलाधिकारी से प्रहार अपंग क्रांति आंदोलन पश्चिम महाराष्ट्र के अध्यक्ष धर्मेंद्र सातव ने की है।
इस बारे में अधिक जानकारी देते हुए धर्मेंद्र सातव ने कहा कि महाराष्ट्र में कोरोना का कहर जारी है। इस महामारी से आम आदमी की जान को खतरा पैदा हो गया है। लाखों लोग इससे संक्रमित हुए हैं और हजारों लोगों ने अपनी जान गवाई है, जिससे विकलांग व्यक्ति भी अपवाद नहीं रहा है। कोरोना के प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए टीका लगवाने की मुहिम प्रशासन की ओर से प्रभावी ढंग से लागू करने के प्रयास जारी हैं। निवारक टीका देने के लिए प्रशासन द्वारा कोविड निवारक टीकाकरण केंद्र शुरू किए गए हैं परंतु ऐसे  टीकाकरण केंद्रों पर जाकर टीका लेना, गंभीर रूप से विकलांगों के लिए मुश्किल है। विकलांग श्रेणी के व्यक्तियों को उनकी शारीरिक मर्यादा के कारण हर रोज हलचल करने की मर्यादा होती है। मुख्य रूप से तीव्र, अतितीव्र, मानसिक रूप से मंद, तंत्रिका तंत्र के तीव्र रोग, (मज्जा संस्थांना तीव्र आजार)  मल्टिपल स्क्लेरॉसिस, एकाधिक विकलांगता, बौद्धिक रूप से अक्षम व मांसपेशियों की विकृति से पीड़ित इन श्रेणी के विकलांगों को टीकाकरण केंद्र में जाकर टीकाकरण कराना असंभव है। ऐसे गंभीर रूप से विकलांग व्यक्तियों को घर पर ही टीका लगाया जाना चाहिए। विकलांग श्रेणी के मध्यम विकलांगता थालेसिमिया, हिमोफिलिया, सिकल सेल्स, निमिया सिड हमला, मस्तिष्क पक्षाघात व अन्य आम आदमी की तुलना में कम रहने के कारण उन्हें वायरस का खतरा ज्यादा होता है। विकलांग जो बिना सहायता के बाहर नहीं निकल सकते, यदि वे टीकाकरण के लिए किसी सार्वजनिक केंद्र में आने का प्रयास करते हैं तो उन्हें कोरोना संक्रमण का अधिक खतरा होता है।
अंत में प्रशासन से अनुरोध करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी श्रेणी में विकलांगों के लिए सप्ताह में एक दिन पृथक टीकाकरण शिविर आयोजित कर टीकाकरण किया जाए। उपरोक्त दोनों मांगों को मानवीय दृष्टिकोण से पूरा किया जाना चाहिए और गंभीर रूप से विकलांगों को घर पर ही टीका लगाया जाना चाहिए। साथ ही मध्यम स्वरूप की अन्य श्रेणियों के विकलांगों के लिए सप्ताह में एक दिन पृथक टीकाकरण अभियान चलाया जाना चाहिए।

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