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भारतीय रेल : स्वचालित कोच वाशिंग प्लांट की स्थापना से पानी की बचत

मुंबई, जून (ह.ए. प्रतिनिधि)
पानी की खपत में पर्याप्त कमी और मेन पावर में बचत के साथ ट्रेनों की बाहरी सफाई के लिए अब प्रमुख डिपो में स्वचालित कोच वाशिंग प्लांट (एसीडब्ल्यूपी) स्थापित किए जा रहे हैं। ए सी डब्ल्यू पी के माध्यम से वाशिंग लाइन (पिट लाइन) में रेक    प्लेसिंग करते समय कोचों की बाहरी सफाई की जाती है। एसीडब्ल्यूपी न केवल कोचों के बाहरी हिस्से को अधिक प्रभावी ढंग और कुशलता से साफ करते हैं, वे अपव्यय से बचकर सीधे पानी की आवश्यकता को भी कम करते हैं। जल पुनर्चक्रण सुविधाएं पानी की आवश्यकताओं को और कम करती हैं। रेलवे ने अब तक 29 स्थानों पर एसीडब्ल्यूपी लगाए हैं। मध्य रेल पर 3 एसीडब्ल्यूपी हैं।
-एसीडब्ल्यूपी के बिना सामान्य पानी की खपत-1500 लीटर प्रति कोच।
-एसीडब्ल्यूपी से सफाई के लिए पानी की खपत -300 लीटर प्रति कोच।
-रिसाइक्लड पानी का उपयोग- 80% (240 लीटर)।
-ताजे पानी की अतिरिक्त आवश्यकता- 20% (60 लीटर)।
-कुल प्रति कोच  पानी की आवश्यकता- 60 लीटर।
-एसीडब्ल्यूपी के साथ पानी की खपत में कुल बचत - पानी की खपत में 96% की कमी।
-पानी की अनुमानित वार्षिक बचत- 1.28 करोड़ किलोलीटर।
जल संरक्षण के लिए वर्षा जल संचयन

जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए, भारतीय रेल मौजूदा नीति के अनुसार विभिन्न स्थानों पर वर्षा जल संचयन प्रणाली (आरडब्ल्यूएच) प्रदान कर रही है। 200 वर्ग मीटर से अधिक के रूफटॉप एरिया वाले सभी प्रतिष्ठानों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम (आरडब्ल्यूएच) उपलब्ध कराया जा रहा है। सर्विस भवनों, अस्पतालों, स्टेशन भवनों (रीमॉडेलिंग आदि सहित), रेलवे क्वार्टरों, कार्यशालाओं/ शेडों, यार्ड मॉडलिंग के साथ-साथ दोहरीकरण, नई लाइन और गेज परिवर्तन और साइडिंग जैसे निर्मित संपत्तियों के सभी नए निर्माणों में आरडब्ल्यूएच को अनिवार्य कर दिया गया है।

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