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अब जेल में सजा काट रहे कैदियों को मिलेगा पर्सनल लोन : गृहमंत्री दिलीप वलसे पाटिल

देश की पहली अभिनव योजना
मुंबई, मार्च (हड़पसर एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क)

जेलों में सजा काट रहे कैदियों को किए गए कार्य के लिए प्राप्त वेतन से दि महाराष्ट्र स्टेट को-ऑप बैंक से 50 हजार रुपये का कर्ज 7% की ब्याज दर पर ऋण प्रदान करने की योजना येरवडा मध्यवर्ती कारागृह, पुणे में  प्रायोगिक आधार पर मंजूरी दी गई है। सह्याद्री गेस्ट हाउस में गृह मंत्री दिलीप वलसे पाटिल की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया है और इस संबंध में एक आदेश भी जारी किया गया है।
राज्य सरकार ने कैदियों के परिवारों को उनके पुनर्वास और पुनर्वास की जरूरतों के लिए ऋण प्रदान करने का एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। देश में इस तरह की पहली ऋण योजना होगी।
गृहमंत्री ने कहा कि जेल में काम करने के दौरान अर्जित आय के आधार पर ऋण प्राप्त करने वाली यह देश की पहली अभिनव ऋण योजना भी होगी। इससे एक कल्याणकारी योजना ठोस रूप में आ सकती है और लगभग 1055 कैदी इस योजना से लाभान्वित हो सकते हैं।
श्री वलसे-पाटिल ने कहा कि कई कैदी लंबी जेल की सजा काट रहे हैं। चूंकि इन बंदियों में से अधिकांश परिवार के प्रमुख सदस्य हैं, ऐसे बंदियों को लंबे समय तक जेल में रहना पड़ सकता है, जिससे उनका पूरा परिवार निराशा, अवसाद और अपराधबोध की स्थिति में आ जाता है।
इससे परिवार में यह भावना भी पैदा होती है कि जो व्यक्ति जेल गया है वह अपने पारिवारिक कर्तव्यों में विफल रहा है। ऐसी स्थिति में एक कैदी को उसके परिवार की जरूरतों के लिए ऋण प्रदान करने से कैदी / कैदी के लिए परिवार की सहानुभूति और प्यार बढ़ाने में मदद मिलेगी और एक स्वस्थ पारिवारिक माहौल बनाए रखने में मदद मिलेगी। 
ऋण सुविधा का निर्णय बंदी/कैदी की ऋण सीमा, सजा की अवधि, उससे संभावित राहत, आयु, अनुमानित वार्षिक कार्य दिवस, न्यूनतम दैनिक आय के आधार पर होगा। इस प्रकार के ऋण के लिए किसी गारंटर की आवश्यकता नहीं होती है। गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि संबंधित कैदी को बिना जमानत के और केवल व्यक्तिगत गारंटी पर ऋण दिया जाएगा।
इस बीच ऋण देने वाला बैंक यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह से जिम्मेदार होगा कि ऋण राशि का उपयोग संबंधित परिवार की जरूरतों को पूरा करने या उनके वकीलों की फीस का भुगतान करने या अन्य कानूनी मामलों के लिए किया जाता है। साथ ही बैंक द्वारा ऋण अदायगी से वसूल की गई राशि का एक प्रतिशत वार्षिक रूप से बंदियों के लिए ‘कल्याण कोष’ में दिया जाएगा। बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह आनंद लिमये, अतिरिक्त मुख्य सचिव (अपील और सुरक्षा) नितिन गद्रे, अपर पुलिस महासंचालक व महानिरीक्षक कारागृह व सुधारसेवा अतुलचंद्र कुलकर्णी,  दि महाराष्ट्र स्टेट को-ऑप. बैंक के विद्याधर अनास्कर सहित गृह विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

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