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भारतीय स्टार्ट-अप भारतीय मेडटेक क्षेत्र में जबरदस्त बदलाव की भूमिका निभाएगा

    भारत सरकार स्टार्ट अप इकोसिस्टम के विकास के लिए एक सक्षम वातावरण बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, जहां मेडटेक स्टार्टअप्स पर अधिक जोर दिया जा रहा है। सरकार चिकित्सा उपकरणों और मेडटेक कंपनियों की मानक परीक्षण और विश्व स्तरीय सामान्य बुनियादी सुविधाओं तक आसान पहुंच बनाने के साथ मदद करने के उद्देश्य से 'मेडिकल डिवाइस पार्कों को बढ़ावा देने' की योजना के साथ आई है।
    मेडटेक हेल्थकेयर इकोसिस्टम का एक हिस्सा है। यह खंड मुख्य रूप से निदान, रोकथाम, निगरानी, ​​उपचार और रोगी की देखभाल के लिए चिकित्सा उत्पादों/ उपकरणों की एक विस्तृत श्रृंखला के डिजाइन और निर्माण पर केन्द्रित है। इसमें चिकित्सा उपकरणों के विपरीत एक व्यापक दायरा शामिल है और इसमें स्मार्ट इनहेलर, रोबोटिक सर्जरी, वायरलेस ब्रेन सेंसर, 3 डी प्रिंटिंग, कृत्रिम अंग और पहनने योग्य स्वास्थ्य उपकरण जैसे आईटी कनेक्टिविटी वाले चिकित्सा उपकरण शामिल हैं।

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    हाल ही में कोविड-19 महामारी ने तकनीकी रूप से उन्नत, उच्च गुणवत्ता वाले, कम लागत वाले चिकित्सा उपकरणों की मांग को भारतीय आबादी के लिए सुलभ बना दिया है। ये कारक भारत में उत्पादन सुविधाएं स्थापित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को भी आकर्षित कर रहे हैं। भारत में मेडटेक सेक्टर जो 2020 में 10.36 बिलियन अमेरिकी डॉलर था, उसके 2020-2025 के दौरान 50 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच जाने की उम्मीद है। लगभग 4,000 भारतीय स्वास्थ्य-तकनीक स्टार्ट-अप कई नवाचार कर रहे हैं, जो मेडटेक बाजार को बढ़ावा देने में मदद कर रहे हैं।
    मेडटेक स्टार्टअप्स के लिए आगे का मार्ग प्रशस्त करते हुए, प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड ने विशाखापत्तनम स्थित स्टार्टअप कंपनी मेसर्स ऑरेंज कोई प्राइवेट लिमिटेड को "मेटल, इन्जेक्शन मोल्डिंग ऑफ इंप्लांट्स, रोबोटिक सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट्स एंड डिवाइसेस" पर उनकी परियोजना के लिए वित्तीय सहायता को मंजूरी दी है। कंपनी का उद्देश्य मेडिकल सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट एंड डिवाइस कम्पोनेंट जैसे बोन कटर, रोंजर्स, क्यूरेट्स, कैस्ट्रोविजो कैलीपर्स, हेमोस्टैटिक फोरसेप, एलिस टिश्यू फोरसेप, क्रिल, एलीगेटर सर्जिकल फोरसेप, ट्विजर, सीजर स्प्रिंग मेटजेनबाम घाव बंद करने वाली क्लिप, क्लैंप, सुई, स्टेपलर, सर्जिकल एक्सेसरी चम्मच, स्पैटुला, कैथेटर, सर्जिकल किट डेंटल जैसे उपकरणों के निर्माण के लिए धातु इंजेक्शन मोल्डिंग (एमआईएम) प्रक्रिया को लागू करना है।
    एमआईएम धातु या सिरेमिक पाउडर से जटिल, सटीक, शुद्ध आकार के अवयवों के निर्माण की एक तकनीक है। एमआईएम की क्षमता पाउडर धातु विज्ञान द्वारा प्रदान की जाने वाली सामग्री की असीमित पसंद प्लास्टिक इंजेक्शन मोल्डिंग के डिजाइन लचीलेपन और उसे बदलने की योग्यता में निहित है। कंपनी का नेतृत्व श्री दीपक कुकरेती और श्री सासंत नुथक्की के साथ डॉ. रवि बोलिना (आईआईटी बॉम्बे के पूर्व छात्र) कर रहे हैं। परियोजना को टीडीबी द्वारा "भारतीय स्टार्टअप कंपनियों से स्वदेशी प्रौद्योगिकियों का व्यावसायीकरण" प्रस्ताव के आह्वान के तहत प्राप्त किया गया था।

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    मान में, सर्जिकल उपकरण या तो आयात किए जाते हैं या कास्टिंग या फोर्जिंग तकनीकों के साथ बनाए जाते हैं और रोबोट सर्जिकल उपकरणों या क्रिटिकल केयर सर्जिकल उपकरणों के प्रयोगों के लिए उपयुक्त नहीं हैं। वैश्विक सर्जिकल उपकरणों के बाजार में वर्तमान में केवल 2-3 बड़े वैश्विक उद्योग शामिल हैं, जैसे जॉनसन एंड जॉन्सन, स्ट्राइकर और स्मिथ और नेफ्यू। हमें युवा उद्यमियों की इस टीम को पूंजी प्रदान करने पर गर्व है, जो वैश्विक बदलाव की ओर अग्रसर है।
    टीडीबी में आईपी एंड टीएएफएस सचिव, राजेश कुमार पाठक ने कहा कि “प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड ने भारतीय स्वास्थ्य इकोसिस्टम के विकास में अपने स्टार्टअप दिनों में अधिकांश भारतीय हेल्थकेयर कंपनियों को वित्त पोषित किया है। वास्तव में, मेसर्स रवींद्रनाथ जीई मेडिकल एसोसिएट्स प्राइवेट लिमिटेड ने भारत की पहली लीवर प्रत्यारोपण सुविधा और मैसर्स पैनेशिया मेडिकल टेक्नोलॉजीज द्वारा कैंसर के इलाज के लिए पहली सीबीसीटी रेडियोथेरेपी प्रणाली को आंशिक रूप से टीडीबी द्वारा वित्त पोषित किया गया था। इस तरह के सहयोग के साथ, हम उम्मीद करते हैं कि कई मेड टेक स्टार्टअप दुनिया के लिए सस्ती कीमत पर और अधिक नवीन तकनीकों के साथ आगे आएंगे और इस प्रकार भारत को मेडटेक आपूर्ति श्रृंखला में प्रमुख निर्यातक के रूप में बदल देंगे।

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