पुणे, दिसंबर (जिमाका)
दत्तक लेने के नए नियम लागू होने के बाद से कलेक्टर डॉ. राजेश देशमुख ने पिछले डेढ़ महीने में 106 बच्चों को गोद लेने का आदेश दिया है। इसलिए, इन अनाथ, परित्यक्त या आत्मसमर्पण करने वाले बच्चों को उनके जैविक माता-पिता को कानूनी अभिभावक मिल गए हैं और वे उज्ज्वल भविष्य की ओर अग्रसर हैं।
पहले दत्तक विधान आदेश प्रक्रिया 4 जनवरी 1997 के दत्तक विधान नियम और केंद्रीय दत्तक संसाधन प्राधिकरण (सेंट्रल अडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी-कारा) दत्तक नियम 2017 के तहत आयोजित की गई थी। इसमें बाल कल्याण समिति द्वारा बच्चे को गोद लेने के लिए मुक्त करने के बाद और दत्तक समिति द्वारा अनुमोदन के बाद, संगठन वकील के माध्यम से अदालत में गोद लेने के लिए आवेदन दायर करता है और न्यायाधीश गोद लेने का आदेश देता है। हालांकि, केंद्रीय दत्तक स्रोत प्राधिकरण द्वारा दिनांक 23 सितंबर 2022 की अधिसूचना के तहत नए दत्तक नियम बनाए गए हैं। इस नये कानून के अनुसार कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी द्वारा बच्चों को गोद लेने के आदेश जारी किये जा रहे हैं।
गोद लेने के नए नियम लागू होने के बाद पुणे जिले में जिला अदालत के वर्गीकृत मामलों और नए गोद लेने के मामलों में प्रक्रिया का पालन करते हुए 106 बच्चों के गोद लेने के आदेश दिए गए हैं। यह एडॉप्शन स्टेटमेंट 14 नवंबर 2022 को बाल दिवस के मौके पर लॉन्च किया गया था।
गोद लेने के 106 आदेशों में से 90 बच्चों को घरेलू स्तर पर जबकि 16 बच्चों को विदेश (अंतरराष्ट्रीय स्तर पर) गोद लिया गया था। गोद लेने के इन आदेशों ने इन बच्चों को उनके वैध कानूनी अभिभावक और सही परिवार दिए हैं। बच्चे को जन्म से प्राप्त होने वाले सभी अधिकार और विशेषाधिकार दत्तक विधायी आदेश द्वारा प्राप्त किए जाएंगे।
गोद लेने के नियमों में संशोधन के बाद, अदालत द्वारा वर्गीकृत कुल 100 मामलों की संख्या और कारा पोर्टल के अनुसार नए स्वीकृत मामलों की संख्या अधिक है। डॉ. देशमुख ने इन सभी मामलों में कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए। तदनुसार, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी अश्विनी कांबले, जिला बाल संरक्षण अधिकारी परम आनंद एवं कार्यालय स्टाफ के साथ-साथ जिला स्वीकृत दत्तक ग्रहण संस्था सोफोश, भारतीय समाज सेवा केंद्र, रेणुका महाजन ट्रस्ट, अरुणाश्रय, महिला सेवा मंडल, आधार दत्तक ग्रहण संस्था एवं पंडिता रमाबाई मुक्ति मिशन के संयुक्त प्रयास और सभी अपनी जिम्मेदारी सही ढंग से निभाने के कारण प्रशासन डेढ़ माह में अधिकतम 106 दत्तक ग्रहण विधायी आदेशों को पूरा करने में सफल रहा है।
जो माता-पिता बच्चे को गोद लेना चाहते हैं, उन्हें गोद लेने की प्रक्रिया के तहत बच्चे को गोद लेने के लिए https://cara.nic.in पर पंजीकरण कराना होगा। अनिवासी भारतीयों, भारत में रहने वाले विदेशी माता-पिता, सजातीय दत्तक माता-पिता और सौतेले माता-पिता को दत्तक ग्रहण नियम 2022 के अनुसार संसाधित करने की आवश्यकता है।
पंजीकरण के बाद, भावी दत्तक माता-पिता की गृह यात्रा, सामाजिक सत्यापन, आवश्यक दस्तावेजों को पूरा करने, गोद लेने की सभी प्रक्रियाओं को दत्तक ग्रहण नियम 2022 के अनुसार ‘कारा’ वेबसाइट के माध्यम से संसाधित किया जाता है। तत्पश्चात् उक्त प्रकरण जिला बाल संरक्षण अधिकारी के माध्यम से संवीक्षा कर कलेक्टर को प्रस्तुत किया जाता है। साथ ही, कारा पोर्टल पर स्वीकृत होने के बाद जिला बाल संरक्षण अधिकारी द्वारा जांच के बाद रिश्तेदार और सौतेले माता-पिता की गोद लेने की प्रक्रिया के लिए आवेदन कलेक्टर को अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया जाता है।
तीनों प्रकार के दत्तक प्रकरण आवेदनों पर दत्तक नियमावली 23 सितंबर 2022 के अनुसार केन्द्रीय दत्तक-ग्रहण स्रोत प्राधिकरण द्वारा नई दत्तक नियमावली के अनुसार जिलाधिकारी एवं जिला दण्डाधिकारी की मान्यता एवं हस्ताक्षर से दत्तक आदेश जारी किये जा रहे हैं।
दत्तक लेने के नए नियम लागू होने के बाद से कलेक्टर डॉ. राजेश देशमुख ने पिछले डेढ़ महीने में 106 बच्चों को गोद लेने का आदेश दिया है। इसलिए, इन अनाथ, परित्यक्त या आत्मसमर्पण करने वाले बच्चों को उनके जैविक माता-पिता को कानूनी अभिभावक मिल गए हैं और वे उज्ज्वल भविष्य की ओर अग्रसर हैं।
पहले दत्तक विधान आदेश प्रक्रिया 4 जनवरी 1997 के दत्तक विधान नियम और केंद्रीय दत्तक संसाधन प्राधिकरण (सेंट्रल अडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी-कारा) दत्तक नियम 2017 के तहत आयोजित की गई थी। इसमें बाल कल्याण समिति द्वारा बच्चे को गोद लेने के लिए मुक्त करने के बाद और दत्तक समिति द्वारा अनुमोदन के बाद, संगठन वकील के माध्यम से अदालत में गोद लेने के लिए आवेदन दायर करता है और न्यायाधीश गोद लेने का आदेश देता है। हालांकि, केंद्रीय दत्तक स्रोत प्राधिकरण द्वारा दिनांक 23 सितंबर 2022 की अधिसूचना के तहत नए दत्तक नियम बनाए गए हैं। इस नये कानून के अनुसार कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी द्वारा बच्चों को गोद लेने के आदेश जारी किये जा रहे हैं।
गोद लेने के नए नियम लागू होने के बाद पुणे जिले में जिला अदालत के वर्गीकृत मामलों और नए गोद लेने के मामलों में प्रक्रिया का पालन करते हुए 106 बच्चों के गोद लेने के आदेश दिए गए हैं। यह एडॉप्शन स्टेटमेंट 14 नवंबर 2022 को बाल दिवस के मौके पर लॉन्च किया गया था।
गोद लेने के 106 आदेशों में से 90 बच्चों को घरेलू स्तर पर जबकि 16 बच्चों को विदेश (अंतरराष्ट्रीय स्तर पर) गोद लिया गया था। गोद लेने के इन आदेशों ने इन बच्चों को उनके वैध कानूनी अभिभावक और सही परिवार दिए हैं। बच्चे को जन्म से प्राप्त होने वाले सभी अधिकार और विशेषाधिकार दत्तक विधायी आदेश द्वारा प्राप्त किए जाएंगे।
गोद लेने के नियमों में संशोधन के बाद, अदालत द्वारा वर्गीकृत कुल 100 मामलों की संख्या और कारा पोर्टल के अनुसार नए स्वीकृत मामलों की संख्या अधिक है। डॉ. देशमुख ने इन सभी मामलों में कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए। तदनुसार, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी अश्विनी कांबले, जिला बाल संरक्षण अधिकारी परम आनंद एवं कार्यालय स्टाफ के साथ-साथ जिला स्वीकृत दत्तक ग्रहण संस्था सोफोश, भारतीय समाज सेवा केंद्र, रेणुका महाजन ट्रस्ट, अरुणाश्रय, महिला सेवा मंडल, आधार दत्तक ग्रहण संस्था एवं पंडिता रमाबाई मुक्ति मिशन के संयुक्त प्रयास और सभी अपनी जिम्मेदारी सही ढंग से निभाने के कारण प्रशासन डेढ़ माह में अधिकतम 106 दत्तक ग्रहण विधायी आदेशों को पूरा करने में सफल रहा है।
जो माता-पिता बच्चे को गोद लेना चाहते हैं, उन्हें गोद लेने की प्रक्रिया के तहत बच्चे को गोद लेने के लिए https://cara.nic.in पर पंजीकरण कराना होगा। अनिवासी भारतीयों, भारत में रहने वाले विदेशी माता-पिता, सजातीय दत्तक माता-पिता और सौतेले माता-पिता को दत्तक ग्रहण नियम 2022 के अनुसार संसाधित करने की आवश्यकता है।
पंजीकरण के बाद, भावी दत्तक माता-पिता की गृह यात्रा, सामाजिक सत्यापन, आवश्यक दस्तावेजों को पूरा करने, गोद लेने की सभी प्रक्रियाओं को दत्तक ग्रहण नियम 2022 के अनुसार ‘कारा’ वेबसाइट के माध्यम से संसाधित किया जाता है। तत्पश्चात् उक्त प्रकरण जिला बाल संरक्षण अधिकारी के माध्यम से संवीक्षा कर कलेक्टर को प्रस्तुत किया जाता है। साथ ही, कारा पोर्टल पर स्वीकृत होने के बाद जिला बाल संरक्षण अधिकारी द्वारा जांच के बाद रिश्तेदार और सौतेले माता-पिता की गोद लेने की प्रक्रिया के लिए आवेदन कलेक्टर को अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया जाता है।
तीनों प्रकार के दत्तक प्रकरण आवेदनों पर दत्तक नियमावली 23 सितंबर 2022 के अनुसार केन्द्रीय दत्तक-ग्रहण स्रोत प्राधिकरण द्वारा नई दत्तक नियमावली के अनुसार जिलाधिकारी एवं जिला दण्डाधिकारी की मान्यता एवं हस्ताक्षर से दत्तक आदेश जारी किये जा रहे हैं।

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