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राजधानी दिल्ली में छत्रपति संभाजी महाराज की 366वीं जयंती समारोह हर्षोल्लास के साथ मनाया गया

नई दिल्ली, मई (हड़पसर एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क)
स्वराज्य छत्रपति संभाजी महाराज की 366वीं जयंती दिल्ली स्थित न्यू महाराष्ट्र सदन में छत्रपति संभाजी महाराज जयंती महोत्सव समिति नई दिल्ली 2023 द्वारा हर्षोल्लास के साथ मनाई गई।
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे-उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शासन स्तर पर छत्रपति संभाजी महाराज की जयंती अधिसूचित करने के बाद  स्वराज रक्षक संभाजी महाराज की जयंती पहली बार शासन स्तर पर और देशभर मनाई गई। राजधानी दिल्ली में छत्रपति संभाजी महाराज जयंती महोत्सव समिति नई दिल्ली 2023 की ओर से जयंती का आयोजन किया गया। राजधानी के दर्जनों सामाजिक संगठनों ने इस अवसर पर एक बैनरतले समारोह में सिरकत करके एकजुटता दिखाई। कार्यक्रम के पूर्व, छत्रपति संभाजी महाराज को अभिवादन मानवंदना दी गई, सदन में स्थापित  महापुरुषों की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें प्रणाम किया गया।
इस मौके पर समारोह के मुख्य अतिथि तथा मराठा समन्वय परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमलेश पाटिल ने कहा कि जयंती कार्यक्रम की हैरानी यह है कि महाराष्ट्र से दिल्ली में निवासरत आधा दर्जन केंद्रीय मंत्रियों में से किसी ने भी समारोह में आकर छत्रपति संभाजी महाराज को अभिवादन का शिष्टाचार नहीं दिखाया। स्वराज्यरक्षक महामानव के प्रति यह उदासीनता स्वराजप्रेमी जनता के लिए आत्मपरीक्षण का विषय है। उन्होंने आगे कहा कि 2012 में छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती को राष्ट्रीय स्तर पर अधिसूचित करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री को एक प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन केंद्रीय गृह मंत्रालय ने तत्कालीन गृह मंत्री श्री सुशील कुमार शिंदे द्वारा हस्ताक्षरित एक जवाब में सूचित किया गया कि छत्रपती शिवाजी महाराज राष्ट्र पुरुष महामानवों की सूचित में समाविष्ट ना होने के कारण उनकी जयंती अधिसूचित नहीं की जा सकती, इसलिए स्वराज्यप्रेमी समाज को गढ़किलो को लेकर अति भावुक होने के बजाय वैचारिक जागरण आधार विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए। शिवविचारों के शिवसंस्कारों से धनी व्यक्तित्व को शासन प्रशासन में स्थापित करने पर जोर देने से ही विश्व में अपने इतिहास का सम्मान बढ़ाने में मदद मिलेगी। स्वराज्य प्रेरणा केंद्र जिजाऊ सृष्टि सिंदखेडराजा, शिवजन्मभूमि शिवनेरी और पुरंदर, शिवस्वराज्य की राजधानी रायगढ़, स्वराज्यपिता महाराज शहाजी राजे तीर्थस्थल होद्देगिरी, के साथ शहाजी महाराज, जिजाऊ माँसाहेब, शिवराय, शंभूराजे, येसूबाई महारानी, महारानी ताराऊ, मल्हारराव होलकर, महादजी सिंधिया, रघुजीराजे भोसले, महाराजा गायकवाड, के इतिहास से उनके कार्य से अपनी पीढ़ी को परिचित कराना चाहिए, जिससे उन्हें जीवन जीने की प्रेरणा मिलेगी। साल मे कम से कम एक बार परिवार सहित इन महापुरुषों की प्रेरणा केंद्रों पर जन्मभूमि का भ्रमण करें, जहां से बच्चे उनकी प्रेरणा, इतिहास, महापुरुषों के कार्य और उनकी स्मृति, उनके नाम जानेंगे। ऐतिहासिक किले न तो समुदाय के स्वामित्व में हैं और न ही राज्यशासन के पास हैं। वे केंद्रीय पुरातत्व विभाग के अधीन हैं। जहां बड़ी संख्या में युवा विभिन्न मुद्दों पर एकत्रित होकर काफी भावुक हो जाते हैं। इसके बजाए शिवनीति शिवचरित्र का अध्ययन कर सक्षम समाज निर्माण पर जोर देना चाहिए।
प्रतिनिधित्व का अधिकार पर बोलते हुये श्री पाटिल ने कहा कि प्रतिनिधित्व अधिकार जरुरी है पर दुनिया की पूंजीवादी तेज रफ्तार की वास्तविकता का बोध रखना जरूरी है। आरक्षण आंदोलन ने पांच दशक बर्बाद कर दिए। आरक्षण मर्यादा पर अदालत की असंवैधानिक सीमा ने मराठाकुणबी समुदाय को बड़े पैमाने पर प्रभावित किया है, इसलिए आरक्षण आंदोलन के बजाय कानूनी और संवैधानिक उपायों को स्वीकार करें, वास्तविकता को स्वीकार करें, रोजगार और प्रतिनिधित्व की पूर्ति के लिए शासन सत्ता का उपयोग करें। शासन सत्ता का इस्तेमाल सटीक तरीके से ना किये जाने के कारण किसान आत्महत्या नही रुकी है।
आज के कार्यक्रम में प्रशंसा का विषय एक समृद्ध व्यक्तित्व, घटना विशेषज्ञ और मराठा आरक्षण के वरिष्ठ विद्वान और छत्रपति संभाजी महाराज जयंती महोत्सव समिति नई दिल्ली 2023 राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष विधिज्ञ श्री राजेंद्र दाते पाटिल के रचनात्मक रसपूर्ण संवादशैली से दर्शकों को आत्मीय आनंद मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रो. डॉ. राजाराम दामगीर ने राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन किया संदेश दिया।
विचार मंच पर उपस्थित मुख्य अतिथि मां साहेब जीजाऊ के पिता लाखोजीराजे जाधवराव के वंशज शिवाजीराव जाधवराव, संस्थापक अध्यक्ष किशोरभाऊ चव्हाण, अध्यक्ष विलासाभाऊ पंगारकर, विजय काकड़े, वकील राज पाटिल, बड़ौदा परिवार के येसुबाई वंश के चेतनसिंह राजे शिर्के, वक्ता थे। प्रदीपदादा सोलंके, फिल्म निर्माता हरिओम घाडगे, पानीपत के मराठा वीरवंशज मराठा रामनारायण, आंध्र प्रदेश के मराठा चंद्रशेखर राव एवं मुख्य अतिथि तथा मराठा समन्वय परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमलेश पाटिल एवं अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने श्रोताओं को संबोधित किया।
मुख्य अतिथि लाखोजी जाधवराव के वंशज शिवाजीराव जाधवराव ने अपने परिचयात्मक भाषण में इतिहास के कई पहलुओं से परिचित कराते हुये कहा कि माँ जिजाऊ साहब के चार भाई थे, जाधवराव परिवार की पहली बेटी के जन्म के बाद वे शक्कर बांटने के लिए हाथी से जुलूस निकालने वाले माता-पिता ने हमें बनाया। माँ साहेब जिजाऊ का  जन्म महाराष्ट्र के विदर्भ प्रांत में, ससुराल मराठवाड़ा प्रांत में, राजकार्य की शुरुवात पश्चिम महाराष्ट्र- राजकार्य राजधानी कोंकण में स्थापित करके शिवचरित्र ने आज का ऐतिहासिक सांस्कृतिक सृजनशील महाराष्ट्र हमें आज की पीढ़ी को सौंपा है। शिवाजी राजे ने उल्लेख किया कि दक्षिण भारत का कार्यक्षेत्र स्वराज्य निर्माण का शक्ति केन्द्र था।
अध्यक्ष विलासभाऊ पंगारकर ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि यह समिति प्रगति की ओर बढ़ रही है, उन्होंने आशा व्यक्त की कि केंद्र सरकार द्वारा विशेष गतिविधियों को लागू किया जाना चाहिए ताकि छत्रपति संभाजी महाराज के स्वराज्य गठन का अविरल दीपक राष्ट्रीय स्तर पर देश भर में स्कूल महाविद्यालयों तक पहुँचाया जा सके।
कार्यक्रम की शुरूआत संस्थापक अध्यक्ष किशोर चव्हाण ने की। किशोर चव्हाण ने 14 मई को छत्रपति संभाजी महाराज की जयंती को शासन द्वारा अधिसूचित किये जाने पर राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज और छत्रपति संभाजी महाराज की जयंती को राष्ट्रीय स्तर पर स्वराज्य प्रेरणा दिवस मनाने की मांग की। साथ ही उन्होंने यह भी मांग की कि केंद्र सरकार मराठा पर्यटन के नाम पर शिवराय के भौगोलिक इतिहास को जोड़ने का प्रोजेक्ट हाथ में ले।
प्रख्यात वक्ता समाज सुधारक प्रो. प्रदीप सोलुंके द्वारा छत्रपति संभाजी महाराज की वैश्विक जीवनी को श्रोताओं के सामने रखते हुए, छत्रपति संभाजी महाराज अपने नौवें वर्ष में मनसबदार बने थे। सोलहवें वर्ष में चार ग्रंथों के रचियता बने, जिसमें उच्चतम आदर्शों को मानवीय प्रतिष्ठा और मानव प्रतिष्ठिा केंद्रित स्वराज्य की संहिता स्वराज्य की अवधारणा प्रस्तुत की है और इससे प्राप्त संदेश सच्ची एकता से हमें परिचित कराता है। उन्होंने लोकोक्तियों के माध्यम से वर्तमान स्थिति की ओर संकेत किया। इस अवसर पर उन्होंने अपने अनुयायियों से यह संदेश देने की अपील की कि छत्रपति संभाजी महाराज ने अपने जीवन में कभी हार नहीं मानी। किसी भी स्थिति में व्यक्ति को हताश नहीं होना चाहिए।
इस अवसर पर मराठा समन्वय परिषद द्वारा ऐतिहासिक प्रकाशन  ‘शिवभारत कैलेंडर 2023’ का विमोचन लोकार्पण गणमान्य व्यक्तियों द्वारा किया गया।

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