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पशुपालन और डेयरी विभाग को भारत की पशु स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए महामारी कोष के तहत 25 मिलियन अमरीकी डालर का अनुदान प्राप्त होगा

  कोविड-19 की विनाशकारी मानवआर्थिक और सामाजिक लागत ने मजबूत स्वास्थ्य प्रणालियों के निर्माण तथा महामारी की रोकथामतैयारी और प्रतिक्रिया के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने के लिए समन्वित कार्रवाई की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया है। पिछले कुछ दशकों में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की छह में से पांच घोषित सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थितियों की अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय पशु मूलक ही था। इसके परिणाम स्वरूप यह स्पष्ट हो गया है कि किसी भी महामारी की तैयारी और प्रतिक्रिया (पीपीआरको पशु स्वास्थ्य सुरक्षा पर ध्यान केन्द्रित करते हुए एक स्वास्थ्य दृष्टिकोण अपनाये जाने की आवश्यकता है।
   जी20 महामारी कोष ने महामारी की तैयारियों और प्रतिक्रियाओं के लिए भारत में पशु स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए पशुपालन और डेयरी विभागमत्स्य पालनपशुपालन और डेयरी मंत्रालय (डीएएचडी)  भारत सरकार द्वारा प्रस्तुत 25 मिलियन डॉलर के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इंडोनेशिया की जी20 अध्यक्षता के तहत स्थापितमहामारी कोष, कम और मध्यम आय वाले देशों पर ध्यान केंद्रित करते हुए राष्ट्रीयक्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर महामारी की रोकथामतैयारी और प्रतिक्रिया क्षमताओं को मजबूत बनाने के लिए महत्वपूर्ण निवेश का वित्तपोषण करता है।
  महामारी कोष को अपने पहले आह्वान पर लगभग 350 अभिरुचि की अभिव्यक्ति (ईओआईऔर 180 पूर्ण प्रस्ताव प्राप्त हुएजिनमें केवल 338 मिलियन डॉलर के प्रस्ताव के मुकाबले 2.5 बिलियन डॉलर से अधिक के अनुदान अनुरोध किए गए थे। महामारी कोष के गवर्निंग बोर्ड ने अपने पहले दौर के वित्तीय आवंटन के उद्देश्य के तहत 19 मांग को 20 जुलाई, 2023 को मंजूरी दी है ताकि छह क्षेत्रों के 37 देशों में भविष्य की महामारियों के लिए लचीलेपन को बढ़ावा दिया जा सके।
   इस प्रस्ताव के तहत मुख्य उपायों में रोग निगरानी और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को मजबूत तथा एकीकृत करनाप्रयोगशाला नेटवर्क का उन्नयन और विस्तार करनाअंतर-संचालित डेटा प्रणाली में सुधार करना और जोखिम विश्लेषण एवं जोखिम संचार के लिए डेटा विशलेषण के लिए क्षमता का निर्माण करनासीमा पार पशु रोगों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत बनाना और सीमा पार सहयोग के माध्यम से क्षेत्रीय सहयोग में भारत की भूमिका शामिल है।
   महामारी कोष न केवल महामारी की रोकथामतैयारियों और प्रतिक्रिया के लिए अतिरिक्तसमर्पित संसाधन उपलब्ध कराएगाबल्कि यह निवेश में वृद्धि को भी प्रोत्साहित करेगाभागीदारों के बीच समन्वय बढ़ाएगा और प्रोत्साहन मंच के रूप में काम करेगा। परियोजना का प्रभाव इस जोखिम को कम करना होगा कि जानवरों (पालतू और वन्यजीवोंसे रोगाणु मानव आबादी में संचारित होगा जो कमजोर आबादी के स्वास्थ्यपोषण सुरक्षा और आजीविका को खतरे में डाल देगा। यह परियोजना एशियाई विकास बैंक (एडीबीके सहयोग से विश्व बैंक और खाद्य और कृषि संगठन (एफएओके साथ प्रमुख कार्यान्वयन इकाई के रूप में लागू की जाएगी।

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