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तनाव मुक्त जीवन के लिए विश्वशांति आवश्यक : राज्यपाल रमेश बैस

राज्यपाल द्वारा दादा जे. पी. वासवानी की स्मृति में डाक टिकट विमोचित
पुणे, सितंबर (जिमाका)
आज विश्व में युद्ध, विभिन्न समूहों के बीच तनाव की स्थिति पाई जा रही है, ऐसी स्थिति में मनुष्य को तनाव मुक्त और सुखी जीवन जीने के लिए विश्व शांति आवश्यक है। यह विचार राज्यपाल रमेश बैस ने व्यक्त किए। 
साधु वासवानी मिशन पुणे द्वारा दादा जे. पी. वासवानी की स्मृति में डाक टिकट का विमोचन राज्यपाल श्री बैस द्वारा किया गया। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में वह बोल रहे थे। यहां केन्द्रीय संचार राज्य मंत्री देवूसिंह चौहान, विधायक सुनील कांबले, इंदौर विधायक शंकर लालवानी, महाराष्ट्र एवं गोवा क्षेत्र के मुख्य पोस्ट मास्टर जनरल किसन कुमार शर्मा, साधु वासवानी मिशन की अध्यक्ष श्रीमती आर. ए. वासवानी, कार्यकारी प्रमुख कृष्णा कुमारी, डॉ. वसंत आहूजा, पुणे क्षेत्र के पोस्ट मास्टर जनरल रामचन्द्र जायभाय, डाक सेवा निदेशक सिमरन कौर आदि उपस्थित थे।
राज्यपाल श्री बैस ने कहा कि व्यक्ति की आंतरिक शांति, राष्ट्रों के बीच शांतिपूर्ण संबंध और प्रकृति के साथ शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व इन तीन पहलुओं पर विश्व शांति आधारित है। आज व्यक्तिगत, सामाजिक और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तनावपूर्ण स्थिति में हमें आंतरिक, बाह्य और प्रकृति के साथ शांति की आवश्यकता है। गौरवशाली इतिहास वाला हमारा भारत देश शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का मार्गदर्शन कर सकता है।
महाराष्ट्र संतों और महापुरुषों की भूमि है। दादा जे. पी. वासवानी में एक संत और समाज सुधारक का भी समन्वय दिख रहा है। वह एक विचारक, लेखक और दार्शनिक थे। उनका जीवन भाईचारा, शांति, सद्भावना, करुणा और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के मूल्यों पर आधारित था। स्वस्थ समाज के लिए नैतिक मूल्य आवश्यक हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में इस पहलू पर जोर दिया गया है।
साधु वासवानी की तरह उनके सबसे विद्वान शिष्य और एक महान वक्ता, दादा वासवानी ने अपने प्रवचनों और लेखों के माध्यम से देश और विदेश में लाखों लोगों को एक आदर्श जीवन जीने के लिए प्रेरित किया। वह महाराष्ट्र में शांति और सद्भावना के दूत थे। साधु वासवानी मिशन के माध्यम से दादा जे. पी. वासवानी ने शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों और अन्य सेवाकार्यों का निर्माण किया। जाति, धर्म, पंथ का भेदभाव किए बिना समाज के सभी वर्गों की सेवा मिशन के माध्यम से की जा रही है। ऐसे शब्दों में उन्होंने मिशन और दादा वासवानी के कार्यों का महिमामंडन किया।
केंद्रीय राज्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि हमें गर्व है कि भारत में संतों की परंपरा रही है। संत दादा वासवानी सरल एवं सीधे व्यक्तित्व के धनी थे। उनका कार्य सदैव समाज को प्रेरणा देनेवाला होता था। वह एक आध्यात्मिक गुरु थे। आज हर किसी को आध्यात्मिक ज्ञान की आवश्यकता है। दादा वासवानी के आध्यात्मिक ज्ञान का पालन करना और आचरण में लाना यह हम सभी का कर्तव्य है। 
इस अवसर पर श्रीमती वासवानी ने साधु वासवानी मिशन के कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि दादा वासवानी का एकता, भाईचारा, शांति और आध्यात्मिकता का संदेश आचरण में लाना यह सही मायने में उन्हें स्मरण में रखने समान है।
इस अवसर पर राज्यपाल श्री बैस द्वारा हिन्दी में ‘नर्क से स्वर्ग तक’ तथा मराठी में ‘स्वतः सक्षम बना’ पुस्तक का विमोचन किया गया।

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