पुणे, सितंबर (जिमाका)
वैद्यकीय शिक्षण और संशोधन संचालनालय द्वारा ली गई परीक्षा में शासकीय लड़कों के अनुरक्षण गृह, येरवडा संस्था के प्रवेशित सूर्यकांत पाटिल को समाजसेवा अधीक्षक (वैद्यकीय) पद पर नियुक्त किए जाने पर राज्य के महिला व बालविकास आयुक्त डॉ. प्रशांत नारनवरे ने अभिनंदन कर भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं।
इस अवसर पर सहआयुक्त राहुल मोरे, उपायुक्त वर्षा पवार, सहायक आयुक्त अश्विनी कांबले, येरवडा शासकीय अनुरक्षणगृह अधीक्षक विद्यासागर कांबले उपस्थित थे।
श्री पाटिल एक अनाथ हैं और उन्होंने 2013 में नांदेड़ जिले के हांगरगा स्थित एक बाल गृह से पुणे के सरकारी बाल गृह येरवडा में प्रवेश लिया। वर्ष 2022 में शासकीय बालक पालन गृह संस्था के माध्यम से प्रस्ताव प्रस्तुत करने पर विभाग द्वारा इन्हें अनाथ प्रमाण पत्र दिया गया, इसलिए उन्हें अनाथ आरक्षण का लाभ मिला।
श्री पाटिल का पालन-पोषण महिला एवं बाल विकास विभाग की एक संस्था में हुआ। उन्होंने यहां बीए, एमएसडब्ल्यू की पढ़ाई कर डिग्री उत्तीर्ण की। 2018 में अलग-अलग जगहों पर काम किया। इसके साथ ही वह विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की पढ़ाई भी कर रह थे। अनाथ आरक्षण का लाभ और प्रतियोगी परीक्षा में सफल होने पर उन्हें सामाजिक सेवा (चिकित्सा) के अधीक्षक के रूप में नियुक्त किया गया।
वैद्यकीय शिक्षण और संशोधन संचालनालय द्वारा ली गई परीक्षा में शासकीय लड़कों के अनुरक्षण गृह, येरवडा संस्था के प्रवेशित सूर्यकांत पाटिल को समाजसेवा अधीक्षक (वैद्यकीय) पद पर नियुक्त किए जाने पर राज्य के महिला व बालविकास आयुक्त डॉ. प्रशांत नारनवरे ने अभिनंदन कर भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं।
इस अवसर पर सहआयुक्त राहुल मोरे, उपायुक्त वर्षा पवार, सहायक आयुक्त अश्विनी कांबले, येरवडा शासकीय अनुरक्षणगृह अधीक्षक विद्यासागर कांबले उपस्थित थे।
श्री पाटिल एक अनाथ हैं और उन्होंने 2013 में नांदेड़ जिले के हांगरगा स्थित एक बाल गृह से पुणे के सरकारी बाल गृह येरवडा में प्रवेश लिया। वर्ष 2022 में शासकीय बालक पालन गृह संस्था के माध्यम से प्रस्ताव प्रस्तुत करने पर विभाग द्वारा इन्हें अनाथ प्रमाण पत्र दिया गया, इसलिए उन्हें अनाथ आरक्षण का लाभ मिला।
श्री पाटिल का पालन-पोषण महिला एवं बाल विकास विभाग की एक संस्था में हुआ। उन्होंने यहां बीए, एमएसडब्ल्यू की पढ़ाई कर डिग्री उत्तीर्ण की। 2018 में अलग-अलग जगहों पर काम किया। इसके साथ ही वह विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की पढ़ाई भी कर रह थे। अनाथ आरक्षण का लाभ और प्रतियोगी परीक्षा में सफल होने पर उन्हें सामाजिक सेवा (चिकित्सा) के अधीक्षक के रूप में नियुक्त किया गया।

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