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प्रधान नियंत्रक (रक्षा लेखा) दक्षिण कमान, पुणे द्वारा हिंदी पखवाड़ा विशेषांक पत्रिका का किया गया विमोचन

पुणे, सितंबर (हड़पसर एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क)
14वें व 15वें सितंबर, 2023 को शिव छत्रपति स्टेडियम, बालेवाड़ी, पुणे में भारत सरकार राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय, नई दिल्ली द्वारा हिंदी दिवस समारोह तथा तृतीय अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। पहला अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन बनारस में हुआ था एवं द्वितीय अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन सूरत में आयोजित किया गया था। राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय, नई दिल्ली ने उक्त समारोह में दिनांक 15.09.2023 को अपराह्न 12.30 बजे प्रधान नियंत्रक (रक्षा लेखा) दक्षिण कमान, पुणे की पत्रिका हिंदी पखवाड़ा विशेषांक का विमोचन डॉ. राजीव एस. चव्हाण, भा.र.ले.से. एन.डी.सी. प्रधान नियंत्रक (रक्षा लेखा) दक्षिण कमान, पुणे की ओर से अति विशिष्ट गणमान्य यथा माननीय श्री आरिफ मोहम्मद खान, राज्यपाल, केरल, माननीय श्री अजय कुमार मिश्रा, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री, श्रीमती अंशुली आर्य, भारतीय प्रशासनिक सेवा , सचिव, श्रीमती मीनाश्री जौली, केंद्रीय सचिवालय सेवा, संयुक्त सचिव, श्री ए.एस. राजीव - प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, श्री अजय कुमार श्रीवास्तव, प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी, आई. ओ. बी.,  सुश्री जहांजेब अख्तर, भारतीय राजस्व सेवा, मुख्य आयकर आयुक्त, अमृतसर, डॉ. शुचिस्मिता पलाई, भारतीय राजस्व सेवा, मुख्य आयकर आयुक्त, गाजियाबाद, श्री एम. नागराज - निदेशक (कॉर्पोरेट प्लानिंग), हडको के करकमलों द्वारा किया गया। 
प्रधान नियंत्रक (रक्षा लेखा) दक्षिण कमान, पुणे संगठन में दिनांक 01.09.2023 से दिनांक 08.09.2023 तक  राजभाषा हिंदी पखवाड़ा का आयोजन  किया गया। हिंदी पखवाड़े में हिंदी निबंध प्रतियोगिता, हिंदी स्वरचित कविता प्रतियोगिता, हिंदी पोस्टर प्रतियोगिता, हिंदी वाद-विवाद प्रतियोगिता, हिंदी प्रश्नमंच प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।
हिंदी निबंध प्रतियोगिता में प्रधान नियंत्रक (रक्षा लेखा) दक्षिण कमान, पुणे संगठन के अधीनस्थ कार्यालयों ने भी भाग लिया। प्रतियोगियों को राष्ट्र के माथे की बिंदी : राजभाषा हिंदी एवं जय राजभाषा-जय हिंद में से किसी एक विषय पर निबंध लिखना था। प्रतियोगिता में श्री विकास कुमार, वरिष्ठ लेखा परीक्षक, क्षेत्रीय लेखा कार्यालय (दक्षिण कमान) जोधपुर प्रथम, श्री अविजित धर, लेखा अधिकारी, लेखा अधिकारी दुर्ग अभियंता (उत्तर) अहमदनगर द्वीतीय, श्री पुरेंद्र देवांगन, सहायक लेखा अधिकारी, मुख्य कार्यालय तृतीय, सुश्री सपना लालवानी, लेखा परीक्षक, मुख्य कार्यालय सांत्वना-1 तथा श्री राकेश कुमार मीणा, लेखा परीक्षक, लेखा अधिकारी दुर्ग अभियंता खड़कवासला, पुणे,  को सांत्वना-2 प्राप्त हुआ। डॉ. राजीव चव्हाण, भा.र.ले.से., एन.डी.सी. प्रधान नियंत्रक (रक्षा लेखा) दक्षिण कमान, पुणे ने विजयी प्रतियोगिओं को नकद पुरस्कार तथा प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया। हिंदी पखवाड़ा विशेषांक पत्रिका में पाँचों विजेता कर्मचारियों के निबंधों को प्रकाशित किया गया। 
हिंदी स्वरचित कविता प्रतियोगिता में भी प्रधान नियंत्रक (रक्षा लेखा) दक्षिण कमान, पुणे मुख्य कार्यालय तथा अधीनस्थ कार्यालयों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। मुख्य कार्यालय तथा अधीनस्थ कार्यालयों से कुल 33 कविताएं आईं एवं हिंदी पखवाड़ा विशेषांक पत्रिका में इन सभी 33 कविताओं को प्रकाशित किया गया । इन 33 कविताओं के द्वारा कर्मचारियों की रचनात्मकता को सामने लाया गया है। हिंदी स्वरचित कविता प्रतियोगिता में श्री प्रदीप कुमार सिंह, मुख्य कार्यालय, प्रथम, सुश्री प्रियंका कुल्हरी, लिपिक, स्थानीय लेखा परीक्षा अधिकारी (ईएमई स्कूल) वडोदरा द्वितीय, श्री ऋषिकेश जोशी, कैंटीन स्टाफ, वेतन लेखा कार्यालय (अन्य श्रेणी) तोपखाना नाशिक तृतीय, श्री चेतन सागर, लेखा परीक्षक. मुख्य कार्यालय,  सांत्वना -1, श्री कुणाल वासनिक, लेखा परीक्षक, लेखा अधिकारी दुर्ग अभियंता (स्व) (प) (नि) अंबाझरी, सांत्वना -2 को प्रधान नियंत्रक महोदय द्वारा नकद पुरस्कार तथा प्रशस्ति - पत्र प्रदान किया गया। 
हिंदी पोस्टर प्रतियोगिता में श्री ऋषिकेश जोशी, कैंटीन स्टाफ, वेतन लेखा कार्यालय (अन्य श्रेणी) तोपखाना नाशिक प्रथम, श्री दिपेंद्र सिंह राठौड़, लेखा परीक्षक, वेतन लेखा कार्यालय (अन्य श्रेणी) तोपखाना, नाशिक द्वितीय, श्री सोनू कुमार सिंह, सहायक लेखा अधिकारी, वेतन लेखा कार्यालय (अन्य श्रेणी) एसीआर अहमदनगर तृतीय, श्री अभिजीत साबळे, लेखा परीक्षक, वेतन लेखा कार्यालय (अन्य श्रेणी) एमआयआर, अहमदनगर सांत्वना - 1, श्री विजय गोंधळे, वरिष्ठ लेखा परीक्षक, वेतन लेखा कार्यालय (अन्य श्रेणी) एमआयआर, अहमदनगर सांत्वना -2 को प्रधान नियंत्रक महोदय द्वारा नकद पुरस्कार तथा प्रशस्ति- पत्र प्रदान किया गया। 
हिंदी वाद-विवाद प्रतियोगिता में भी मुख्य कार्यालय तथा पुणे में स्थित अधीनस्थ कार्यालयों के कर्मचारियों ने उत्साह से भाग लिया। राजभाषा बनाम राष्ट्रभाषा व 75 वर्षों में देश में उन्नति अथवा अवनति पर कर्मचारियों को 07 मिनट तक बोलना था। कुछ प्रतिभागियों ने राष्ट्रभाषा बनाने के पक्ष पर अपने विचार एवं मंतव्य प्रस्तुत किए। प्रतिभागियों ने सविस्तार तर्क दिया कि चूंकि हिंदी पूरे देश में सबसे ज्यादा बोली, समझी एवं लिखी जाने वाली भाषा है, अतः इसे राष्ट्रभाषा बनाए जाने की आवश्यकता है । कुछ प्रतिभागियों ने इसके विपक्ष में देश के बहुभाषायी, अनेक संस्कृति एवं विविधतापूर्ण होने का हवाला देते हुए किसी एक  भाषा को देश की राष्ट्रभाषा नहीं बनाने का तर्क दिया। कुछ प्रतिभागियों ने आजादी के 75 वर्ष पूरे होने के साथ ही आजादी के समय तथा आज के समय की  परिस्थिति का तुलनात्मक विवेचन कर देश को उन्नत पाया जबकि कुछ प्रतिभागी आज भी देश में फैली गरीबी, भूखमरी, अशिक्षा, कुपोषण को देखते हुए देश को पिछड़ा हुआ ही पाया। प्रतियोगिता में सुश्री सपना लालवानी, लेखा परीक्षक, मुख्य कार्यालय प्रथम, श्री राघव जोशी, लेखा परीक्षक, मुख्य कार्यालय द्वितीय, श्री अनिल यादव, लेखा परीक्षक तृतीय, श्री सी.के.रंजन, वरिष्ठ लेखा परीक्षक, लेखा अधिकारी दुर्ग अभियंता गिरीनगर सांत्वना-1 को प्रधान नियंत्रक महोदय द्वारा नकद पुरस्कार तथा प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया गया। 
हिंदी प्रश्नमंच प्रतियोगिता में भी मुख्य कार्यालय तथा पुणे में स्थित अधीनस्थ कार्यालयों के कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। श्री महेश भागवत दले, अपर नियंत्रक, महोदय ने बहुत ही कम समय में हिंदी प्रश्नमंच हेतु प्रश्न तैयार किया। प्रतियोगियों ने प्रश्नों को सराहा। प्रतियोगिता में सुश्री सीमा, लिपिक, मुख्य कार्यालय, श्री सुमन कुमार, लेखा परीक्षक, मुख्य कार्यालय, श्री सरोज कुमार शर्मा, लेखा परीक्षक, मुख्य कार्यालय, श्री प्रदीप कुमार सिंह, लेखा परीक्षक के समूह को प्रथम, श्री अनिल यादव, लेखा परीक्षक, मुख्य कार्यालय, श्री रवि कुमार, लेखा परीक्षक,मुख्य कार्यालय, श्री निखिल कुमार, लिपिक, मुख्य कार्यालय, श्री विवेक कुमार, लेखा परीक्षक, क्षेत्रीय लेखा कार्यालय दक्षिण कमान, देहुरोड के समूह को द्वितीय, श्री प्रकाश मीना, लेखा परीक्षक, क्षेत्रीय लेखा कार्यालय दक्षिण कमान देहुरोड,  श्री सोनू बैरवा, लेखा परीक्षक, मुख्य कार्यालय, सुश्री तमन्ना जैन, लेखा परीक्षक,मुख्य कार्यालय, श्रीमती कुमारी समता, वरिष्ठ लेखा परीक्षक मुख्य कार्यालय को तृतीय, सुश्री पूजा गर्ग, लेखा परीक्षक, श्री मयंक कुमार, लेखा परीक्षक, श्री हरीश बालौत, लेखा परीक्षक, श्री पी एस शिंदे, वरिष्ठ लेखा परीक्षक, क्षेत्रीय लेखा कार्यालय दक्षिण कमान देहुरोड को सांत्वना पुरस्कार 1 प्राप्त हुआ। प्रधान नियंत्रक महोदय ने सभी विजयी प्रतिभागियों को नकद पुरस्कार तथा प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया।
हिंदी पखवाड़ा शुभारंभ समारोह में हिंदी संगोष्ठी तथा चर्चा सत्र का आयोजन किया गया था। हिंदी संगोष्ठी में भाषावाद (Linguistic Chauvinism) पर में डॉ. राजीव एस चव्हाण, भा.र.ले.से. रा.र.अ. प्रधान नियंत्रक (रक्षा लेखा) दक्षिण कमान, पुणे, एवं डॉ, महेश दले, भा.र.ले.से. रक्षा लेखा अपर नियंत्रक ने गहन चर्चा की। महेश दले, भा.र.ले.से. रक्षा लेखा अपर नियंत्रक महोदय ने अपने विचार रखते हुए कहा कि भाषा केवल संप्रेषण के उद्देश्य से बनी है तथा बाद में उसे संग्रहीत करने के लिए लिपि का उद्गम हुआ है। महोदय ने सभा को अवगत कराया कि किसी भी प्रकार का वाद वास्तव में स्वयं के हाथ में नियंत्रण रखने का माध्यम मात्र है। प्रधान नियंत्रक महोदयने अपनी भाषा को श्रेष्ठ सिद्ध करने की कोशिश में दूसरी भाषाओं के तिरस्कार करने की भावना को नकरात्मक ठहराया। हर भाषा का अपना इतिहास है, हर भाषा संबंधित बोलने वाले समुदाय व लोगों की पहचान है, उनकी अस्मिता का द्योतक है। हमें सभी भाषाओं से प्रेम करना चाहिए।
हिंदी पखवाड़ा शुभारंभ समारोह में राजभाषा की प्रगति पर चर्चा सत्र तथा खुले मंच का भी आयोजन किया गया। प्रधान नियंत्रक महोदय ने चर्चा सत्र के आरंभ में भाषा के इतिहास से सभी को अवगत कराया। संस्कृत, पाली, प्राकृत, तुर्की, अफगानी, उर्दू का ही निचोड़ आज की हिंदी भाषा है। आजादी के बाद कई हिंदीतर राज्यों ने हिंदी को राजभाषा के रूप में स्वीकार नहीं करना चाहा, परंतु समय के साथ हिंदी धीरे-धीरे पूरे देश में लोकप्रिय भाषा बनती जा रही है। 
उक्त राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार से संबंधित क्रियाकलापों को संकलित कर प्रधान नियंत्रक (रक्षा लेखा) दक्षिण कमान, पुणे की हिंदी पखवाड़ा विशेषांक पत्रिका में प्रकाशित किया गया है। 14 सितंबर, 1949 को हिंदी को राजभाषा के रूप में अंगीकृत करने के बाद किसी भी केंद्रीय सरकार के कार्यालय द्वारा पहली बार हिंदी पखवाड़ा के उपलक्ष्य पर हिंदी पखवाड़ा विशेषांक पत्रिका का विमोचन सबसे बड़े मंच पर किया गया। डॉ. राजीव एस. चव्हाण, भा.र.ले.से. एन.डी.सी. के मार्गदर्शन से यह राजभाषा के इतिहास में अनूठा, अप्रतिम एवं अद्वितीय प्रयास है। राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार में यह पहल  राजभाषा की उन्नति के लिए मील का पत्थर तथा सभी राजभाषा प्रेमियों के लिए प्रेरणास्रोत साबित होगी।
यह जानकारी पुणे रक्षा विभाग के जनसंपर्क अधिकारी श्री महेश अय्यंगार द्वारा दी गई है।

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