जिले में 10 हजार वनराई बांध बनाने की योजना
पुणे, सितंबर (जिमाका)
अनियमित वर्षा से फसलों को होनेवाले नुकसान को रोकने के लिए जिले में वनराई बांध बनाने का अभियान 8 से 30 सितम्बर तक चलाया जायेगा तथा सभी विभाग जनभागीदारी एवं श्रमदान के माध्यम से इस अभियान को सफल बनायें। यह अपील जिलाधिकारी डॉ. देशमुख ने की है।
जिलाधिकारी कार्यालय में वनराई बांध बनाने हेतु आयोजित बैठक में डॉ. देशमुख बोल रहे थे। इस अवसर पर यहां जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रमेश चव्हाण, रोजगार हमी योजना शाखा की उपजिलाधिकारी डॉ. दीप्ति सूर्यवंशी-पाटिल, जिले के उपवनसंरक्षक, उपविभागीय अधिकारी, तालुका कृषि अधिकारी, तहसीलदार, सार्वजनिक बांधकाम विभाग के उपअभियंता उपस्थित थे।
जिले के 10 हजार वनराई बांध बनाने का लक्ष्य बताते हुए जिलाधिकारी डॉ. देशमुख ने कहा कि जिले में औसत से कम बारिश होने के कारण पानी की कमी की स्थिति पैदा हो गई है और फिलहाल पुणे जिले में 49 टैंकरों से पानी की आपूर्ति की जा रही है। कुछ गाँवों में अच्छी वर्षा होने के बावजूद भी जल का संचय न हो पाने के कारण जल संकट उत्पन्न हो गया है, इसलिए हर तालुका को 8 सितंबर से वनराई बांध शुरू करने की योजना बनानी चाहिए। इस अभियान में जिले के सभी विभाग के अधिकारी, कर्मचारी, गांव के स्कूल, कॉलेज, सेवाभावी संस्था, व्यापार मंडल, गणेश मंडल, महिला स्वयं सहायता समूह, किसान, विनिर्माण कंपनियां, कृषि सेवा केंद्र, जन प्रतिनिधि शामिल हों। यह अपील जिलाधिकारी डॉ. देशमुख ने की है।
जिलाधिकारी ने कहा कि वनराई बांध बारिश के पानी को रोकता है और भूजल स्तर को बढ़ाता है और सक्षम जल स्रोतों का निर्माण करता है। कम वर्षा वाले क्षेत्रों में ऐसे बांधों के कारण वर्षा जल का पूरा उपयोग किया जा सकता है। गाँव में पीने के पानी की कमी कम होकर पशुधन को भी इस पानी का उपयोग होता है। बांधों की श्रृंखला बनने से कुएं का जल स्तर बढ़ता है। नागरिकों को इस अभियान में भाग लेना चाहिए। यह अपील जिलाधिकारी व मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने की है।
बांध के लिए जगह चुनते समय ऐसी जगह का चयन करना चाहिए जहां कम से कम लागत पर अधिक से अधिक पानी जमा करना संभव हो। नाली संकरी एवं गहरी होनी चाहिए तथा भण्डारण क्षमता पर्याप्त होनी चाहिए। बांध की ऊंचाई अधिकतम 1.20 मीटर होनी चाहिए। चुनी गई जगह धारा में मोड़ के पास नहीं होनी चाहिए। इस समय यह निर्देश दिये गये।
वनराई बांध का निर्माण करते समय धारा की ढलान और चौड़ाई को ध्यान में रखते हुए बांध के आधार की चौड़ाई 1.5 से 2.5 मीटर होनी चाहिए। यह तटबंध दोनों किनारों तक बनाया जाना चाहिए। सीमेंट की खाली बोरियों में रेत भरकर उनके मुंह को प्लास्टिक की रस्सियों से सिलकर तटबंध के लिए उपयोग किया जाना चाहिए। तटबंध की संरचना धारा के प्रवाह की दिशा के अनुप्रस्थ होनी चाहिए। पहली परत तैयार होने के बाद दूसरी परत भी इसी प्रकार बनानी चाहिए। ईंट की दीवार बनाने में उपयोग की जानेवाली जोड़ने की विधि का उपयोग किया जाना चाहिए। सामान्यतः दो या तीन परतों के बाद मिट्टी की परत बिछा देनी चाहिए। इससे ढेर लगी बोरियों के बीच की दरारें भर जाती हैं और तटबंधों के जोड़ मजबूत हो जाते हैं और पानी रिस नहीं पाता। यह जानकारी बैठक में दी गयी।
अनियमित वर्षा से फसलों को होनेवाले नुकसान को रोकने के लिए जिले में वनराई बांध बनाने का अभियान 8 से 30 सितम्बर तक चलाया जायेगा तथा सभी विभाग जनभागीदारी एवं श्रमदान के माध्यम से इस अभियान को सफल बनायें। यह अपील जिलाधिकारी डॉ. देशमुख ने की है।
जिलाधिकारी कार्यालय में वनराई बांध बनाने हेतु आयोजित बैठक में डॉ. देशमुख बोल रहे थे। इस अवसर पर यहां जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रमेश चव्हाण, रोजगार हमी योजना शाखा की उपजिलाधिकारी डॉ. दीप्ति सूर्यवंशी-पाटिल, जिले के उपवनसंरक्षक, उपविभागीय अधिकारी, तालुका कृषि अधिकारी, तहसीलदार, सार्वजनिक बांधकाम विभाग के उपअभियंता उपस्थित थे।
जिले के 10 हजार वनराई बांध बनाने का लक्ष्य बताते हुए जिलाधिकारी डॉ. देशमुख ने कहा कि जिले में औसत से कम बारिश होने के कारण पानी की कमी की स्थिति पैदा हो गई है और फिलहाल पुणे जिले में 49 टैंकरों से पानी की आपूर्ति की जा रही है। कुछ गाँवों में अच्छी वर्षा होने के बावजूद भी जल का संचय न हो पाने के कारण जल संकट उत्पन्न हो गया है, इसलिए हर तालुका को 8 सितंबर से वनराई बांध शुरू करने की योजना बनानी चाहिए। इस अभियान में जिले के सभी विभाग के अधिकारी, कर्मचारी, गांव के स्कूल, कॉलेज, सेवाभावी संस्था, व्यापार मंडल, गणेश मंडल, महिला स्वयं सहायता समूह, किसान, विनिर्माण कंपनियां, कृषि सेवा केंद्र, जन प्रतिनिधि शामिल हों। यह अपील जिलाधिकारी डॉ. देशमुख ने की है।
जिलाधिकारी ने कहा कि वनराई बांध बारिश के पानी को रोकता है और भूजल स्तर को बढ़ाता है और सक्षम जल स्रोतों का निर्माण करता है। कम वर्षा वाले क्षेत्रों में ऐसे बांधों के कारण वर्षा जल का पूरा उपयोग किया जा सकता है। गाँव में पीने के पानी की कमी कम होकर पशुधन को भी इस पानी का उपयोग होता है। बांधों की श्रृंखला बनने से कुएं का जल स्तर बढ़ता है। नागरिकों को इस अभियान में भाग लेना चाहिए। यह अपील जिलाधिकारी व मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने की है।
बांध के लिए जगह चुनते समय ऐसी जगह का चयन करना चाहिए जहां कम से कम लागत पर अधिक से अधिक पानी जमा करना संभव हो। नाली संकरी एवं गहरी होनी चाहिए तथा भण्डारण क्षमता पर्याप्त होनी चाहिए। बांध की ऊंचाई अधिकतम 1.20 मीटर होनी चाहिए। चुनी गई जगह धारा में मोड़ के पास नहीं होनी चाहिए। इस समय यह निर्देश दिये गये।
वनराई बांध का निर्माण करते समय धारा की ढलान और चौड़ाई को ध्यान में रखते हुए बांध के आधार की चौड़ाई 1.5 से 2.5 मीटर होनी चाहिए। यह तटबंध दोनों किनारों तक बनाया जाना चाहिए। सीमेंट की खाली बोरियों में रेत भरकर उनके मुंह को प्लास्टिक की रस्सियों से सिलकर तटबंध के लिए उपयोग किया जाना चाहिए। तटबंध की संरचना धारा के प्रवाह की दिशा के अनुप्रस्थ होनी चाहिए। पहली परत तैयार होने के बाद दूसरी परत भी इसी प्रकार बनानी चाहिए। ईंट की दीवार बनाने में उपयोग की जानेवाली जोड़ने की विधि का उपयोग किया जाना चाहिए। सामान्यतः दो या तीन परतों के बाद मिट्टी की परत बिछा देनी चाहिए। इससे ढेर लगी बोरियों के बीच की दरारें भर जाती हैं और तटबंधों के जोड़ मजबूत हो जाते हैं और पानी रिस नहीं पाता। यह जानकारी बैठक में दी गयी।

0 टिप्पणियाँ