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‘महाराष्ट्र महिला किसान सशक्तिकरण विधेयक 2026’ से महिला किसानों को मिलेगा ऐतिहासिक न्याय: सुनेत्रा अजित पवार

महाराष्ट्र महिला किसान सशक्तिकरण विधेयक-2026’ महिला किसानों के अधिकारों की दिशा में ऐतिहासिक कदम



उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार ने कहा कि ‘महाराष्ट्र महिला किसान सशक्तिकरण विधेयक-2026’ केवल एक कानून नहीं, बल्कि मिट्टी से जुड़ी उन लाखों महिला किसानों के श्रम, सम्मान और अधिकारों को दिया गया ऐतिहासिक न्याय है, जो वर्षों से राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रही हैं।


विधानसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि इस प्रकार का विधेयक देश में पहली बार महाराष्ट्र विधानसभा में प्रस्तुत किया गया है। यह राज्य की महिला किसानों के जीवन में व्यापक परिवर्तन लाने वाला साबित होगा।


उन्होंने कहा कि खेती केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि परिश्रम, संस्कृति, परंपरा और जीवन से जुड़ा गहरा संबंध है। पुरुष किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खेती के हर चरण में योगदान देने वाली महिलाओं को अब तक आधिकारिक रूप से किसान का दर्जा नहीं मिला था। यह विधेयक उसी ऐतिहासिक अन्याय को दूर करने का कार्य करेगा।


सुनेत्रा पवार ने कहा कि किसान परिवार से होने के कारण उन्होंने खेती की चुनौतियों, मौसम की अनिश्चितता और भूमि से जुड़े संघर्षों को करीब से देखा है। उन्होंने बताया कि महिलाएं बीज संरक्षण, बुवाई, पशुपालन, दुग्ध व्यवसाय, कुक्कुट पालन, मत्स्य व्यवसाय, वनोपज संग्रहण तथा कटाई के बाद की प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।


उन्होंने स्पष्ट किया कि भूमि स्वामित्व न होने के कारण अनेक महिलाएं सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रह जाती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए विधेयक में प्रत्यक्ष कृषि कार्य में सहभागिता को किसान पहचान का आधार मानते हुए महिला किसान प्रमाणपत्र देने का प्रावधान किया गया है।


इस प्रमाणपत्र से महिलाओं को पहली बार आधिकारिक किसान पहचान मिलेगी, जिससे उन्हें कृषि योजनाओं, प्रशिक्षण, फसल बीमा, ऋण, बाजार, कौशल विकास, उद्यमिता और विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा।


विधेयक के अंतर्गत महिला किसान डेटाबेस, महिला किसान सशक्तिकरण कक्ष, सहायता अधिकारी, राज्य स्तरीय निगरानी समिति तथा महिला किसान निधि जैसी संस्थागत व्यवस्थाएं भी बनाई जाएंगी, जिससे प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा।


उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह विधेयक किसी की भूमि स्वामित्व, उत्तराधिकार या वारिस संबंधी कानूनों में बदलाव नहीं करता, बल्कि केवल महिलाओं के कृषि योगदान को कानूनी मान्यता देता है।


सुनेत्रा पवार ने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके श्रम, पहचान और निर्णय क्षमता को सामाजिक मान्यता मिलना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

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