वर्धा, 6 जून (ह.ए. प्रतिनिधि)
सुविख्यात दार्शनिक और महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल ने कहा है कि महाराणा प्रताप का युद्ध प्राणि मात्र के लिए था। सद्भाव तथा दया के लिए था. जैसा राम ने लोक के लिए संघर्ष किया वैसे ही मनुष्य के कल्याण के लिए महाराणा ने जीवनपर्यंत लड़ाई लड़ी।
प्रो. शुक्ल जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ, उदयपुर, राजस्थान की ओर से रविवार (6 जून 2021) को महाराणा प्रताप की 481 वीं जयंती पर 'महाराणा प्रताप और राष्ट्रीय सुरक्षा एवं मानवाधिकार की रक्षा' विषय पर आयोजित ऑनलाइन राष्ट्रीय संगोष्ठी को बतौर विशिष्ट अतिथि सम्बोधित कर रहे थे।
प्रो. शुक्ल ने कहा कि महाराणा प्रताप ने साम्राज्य के लिए नहीं, अपितु सभ्यता और संस्कृति के लिए संघर्ष किया था। उनका युद्ध मानवाधिकारों की रक्षा के लिए था।
संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में भारतीय चरित्र निर्माण संस्थान, दिल्ली के संस्थापक अध्यक्ष, गीता मर्मज्ञ श्री राम कृष्ण गोस्वामी ने कहा कि महाराणा प्रताप में देश और धर्म की रक्षा दृष्टि थी। उन्होंने मानवाधिकार की सुरक्षा को शासन का धर्म समझकर संघर्ष किया.
प्रस्तोता के रूप में इतिहासकार प्रो. चंद्रशेखर शर्मा ने कहा कि महाराणा मानवाधिकार के प्रबल पक्षधर थे और मानवाधिकारों के संरक्षण के लिए उन्होंने जनता के बीच जाकर संघर्ष किया।
पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक डाॅ. बी. एन. रमेश ने कहा कि महाराणा प्रताप ने भील समुदाय को संगठित कर उनकी रक्षा की। महाराणा शौर्य और पराक्रम का उत्कृष्ट उदाहरण है।
अध्यक्षीय उद्बोधन में जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ, उदयपुर के कुलपति प्रो. एस. एस. सारंगदेओत ने कहा कि लोकतांत्रिक देश में चेतना जागृत करने के लिए महाराणा प्रताप का दर्शन हमें नई राह दिखाता है।
कार्यक्रम का संचालन जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ, उदयपुर के इतिहास विभाग के अध्यक्ष डाॅ. हेमेंद्र चौधरी ने किया।
संगोष्ठी में अध्यापक, शोधार्थी तथा विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में ऑनलाइन उपस्थित थे।
कार्यक्रम का संचालन जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ, उदयपुर के इतिहास विभाग के अध्यक्ष डाॅ. हेमेंद्र चौधरी ने किया।
संगोष्ठी में अध्यापक, शोधार्थी तथा विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में ऑनलाइन उपस्थित थे।

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