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फलटण के ‘भिसे पाटिल लोकनाट्य तमाशा मंडल’ को स्वप्निल कुंजीर पाटिल द्वारा मदद

फलटण स्थित ‘भिसे पाटिल लिंभोरीकर लोकनाट्य तमाशा फड़’ को अनाज व आर्थिक मदद शिवसैनिक स्वप्निल कुंजीर पाटिल ने की है।
कुंजीरवाडी, जून (ह.ए. प्रतिनिधि)

तमाशा कहने पर लोगों की भौंहें ऊंची हो जाती हैं परंतु यही तमाशा महाराष्ट्र की प्रमुख लोककला है जो टिकनी चाहिए, इसी उद्देश्य से ‘भिसे पाटिल लोकनाट्य तमाशा मंडल फलटण’ को 200 किलो अनाज, तेल, नमक, मसाला सहित अन्य वस्तुएं देकर आर्थिक मदद शिवसैनिक स्वप्निल कुंजीर पाटिल ने की है। 
सैकड़ों सालों की परंपरा तमाशा कला का तीन-तीन पीढ़ियों से जतन करने का काम करनेवाले लोग आज कोरोना के कारण संकट में हैं। कोरोना संक्रमण के चलते डेढ़ साल से गांव-गांव में लगने वाला मेला व यात्रा बंद रहने के कारण तमाशा कलाकारों का जीवन बिखर गया है। फलटण तहसील में भिसे पाटिल लिंभोरीकर लोकनाट्य तमाशा में कुल 40 कलाकार हैं, इसके मालिक भिसे ने स्वप्निल कुंजीर पाटिल से संपर्क करते हुए अपनी व्यथा बताई व मदद की पुकार लगाई, जिसे स्वप्निल कुंजीर पाटिल ने प्रतिसाद दिया। 
वर्ष 2017 में कुंजीरवाडी गांव की यात्रा के अवसर पर भिसे पाटिल लिंभोरीकर लोकनाट्य तमाशा का कार्यक्रम आयोजित किया गया था तब फड के मालिक भिसे व उनके सभी कलाकारों ने उनके घर पर आकर चाय-नाश्ता किया था, तबसे वे उनके साथ घुलमिल गए थे। इंसानियत के नाते स्वप्निल कुंजीर पाटिल ने उनसे कहा था कि कभी किसी भी तरह की मदद लगे तो निसंकोच संपर्क करें। उसके बाद उनके साथ न मिलना हुआ न ही कुछ बातचीत हुई थी। फिर करीब 4 सालों के बाद अचानक फड मालिक भिसे का फोन आया और तमाशा क्षेत्र में काम करनेवाले हर कलाकार की परिस्थिति बहुत कठिन हो गई है, भूखे पेट रहने का समय आ गया है। इस स्थिति में आपसे मदद चाहिए, यह विनती उन्होंने की। उनकी सारी बातें सुनने के बाद उसी समय निश्चय किया कि इन्हें मदद करनी है। तमाशा कला बंद रहेगी तब तक इस लोक कला केन्द्र के 40 कलाकारों को जितना लगेगा उतने अनाज की आपूर्ति करने का फैसला लिया गया, जिसकी शुरूआत आज की मदद कार्य से की गई है। 
तमाशा थिएटर अलग व तमाशा फड अलग होता है। गांव गांव में जाकर यात्रा के अवसर पर अपनी कला पेश करके फड  चलानेवाले कलाकार हैं, जो अपनी कला के दम पर अपना उदरनिर्वाह करते हैं। क्षेत्र कोई भी हो, लेकिन उस क्षेत्र के इंसान जीने चाहिए, इसलिए जहां-जहां यह लोक कला का जतन करनेवाले कलाकार हैं वहां के सामाजिक, राजनीति क्षेत्र की हस्तियों को लोक कलाकारों की ओर मदद का हाथ आगे बढ़ाना चाहिए। जब तक इन कलाकारों की बिखरी हुई स्थिति में सुधार नहीं होता तब तक   उनका साथ देकर उनका ख्याल रखना चाहिए। घर टूट गया है इसलिए चिड़िया घर छोड़ती नहीं है बल्कि फिर से पूरी लगन से नया घर तैयार करती है। वैसे ही यह कलाकार भी फिर से नये रूप से अपनी कला के दम पर नयी   उड़ान भरेंगे तब तक बस उन्हें अपनेपन का एहसास देते हुए मदद का हाथ दीजिए। यह विचार शिवसैनिक स्वप्निल कुंजीर पाटिल ने व्यक्त किए।

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