वर्धा, अगस्त (ह.ए. प्रतिनिधि)
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा और भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के बीच एक महत्वपूर्ण परियोजना ‘गांधी का वर्धा काल : अभिलेखीकरण और इतिहास लेखन’ पर एम ओ यू किया गया। अगस्त क्रांति के ऐतिहासिक दिवस के मौके पर (9 अगस्त 2021) हस्ताक्षर किए गये इस परियोजना से शोध के नए क्षितिज खुलेंगे।
हिंदी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल की प्रेरणा से हुए इस समझौता ज्ञापन पर विश्वविद्यालय की ओर से कुलसचिव क़ादर नवाज़ ख़ान तथा भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली की ओर से परिषद के सदस्य सचिव प्रो. कुमार रत्नम ने हस्ताक्षर किए। इस समझौते के अंतर्गत वर्धा तथा देश-विदेश के किसी भी कोने में महात्मा गांधी से संबंधित उनके वर्धा कालखंड सन 1936 से लेकर 1948 के बीच गांधी को अन्य विमर्शों के संदर्भ में किस तरह देखा गया इसका संकलन और डिजिटाइजेशन किया जाएगा। इस समझौते के अंतर्गत गांधी की प्रेरणा से वर्धा जिले में स्थापित अन्य रचनात्मक संगठनों में महात्मा गांधी से संबंधित उपलब्ध सामग्री का भी अध्ययन, संकलन और डिजिटाइजेशन किया जाएगा।
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के केंद्र बिंदू रहे महात्मा गांधी के अंतिम दशक की सामग्रियों का अध्ययन, संकलन और लेखन भी इस समझौते के अंतर्गत किया जाएगा। देश के दोनों महत्वपूर्ण संस्थाओं के बीच पूरे भारत में अपने किस्म का यह इकलौता समझौता है जो आजादी के अमृत महोत्सव के शुभ अवसर को एक सार्थक परिणति की ओर अग्रसर करने में मिल का पत्थर साबित होगा।
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा और भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के बीच एक महत्वपूर्ण परियोजना ‘गांधी का वर्धा काल : अभिलेखीकरण और इतिहास लेखन’ पर एम ओ यू किया गया। अगस्त क्रांति के ऐतिहासिक दिवस के मौके पर (9 अगस्त 2021) हस्ताक्षर किए गये इस परियोजना से शोध के नए क्षितिज खुलेंगे।
हिंदी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल की प्रेरणा से हुए इस समझौता ज्ञापन पर विश्वविद्यालय की ओर से कुलसचिव क़ादर नवाज़ ख़ान तथा भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली की ओर से परिषद के सदस्य सचिव प्रो. कुमार रत्नम ने हस्ताक्षर किए। इस समझौते के अंतर्गत वर्धा तथा देश-विदेश के किसी भी कोने में महात्मा गांधी से संबंधित उनके वर्धा कालखंड सन 1936 से लेकर 1948 के बीच गांधी को अन्य विमर्शों के संदर्भ में किस तरह देखा गया इसका संकलन और डिजिटाइजेशन किया जाएगा। इस समझौते के अंतर्गत गांधी की प्रेरणा से वर्धा जिले में स्थापित अन्य रचनात्मक संगठनों में महात्मा गांधी से संबंधित उपलब्ध सामग्री का भी अध्ययन, संकलन और डिजिटाइजेशन किया जाएगा।
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के केंद्र बिंदू रहे महात्मा गांधी के अंतिम दशक की सामग्रियों का अध्ययन, संकलन और लेखन भी इस समझौते के अंतर्गत किया जाएगा। देश के दोनों महत्वपूर्ण संस्थाओं के बीच पूरे भारत में अपने किस्म का यह इकलौता समझौता है जो आजादी के अमृत महोत्सव के शुभ अवसर को एक सार्थक परिणति की ओर अग्रसर करने में मिल का पत्थर साबित होगा।

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