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प्रारंभ हुई बहु प्रतीक्षित रामायण सर्किट 5 स्टार सुविधाओं वाली ट्रेन

रामायण सर्किट 5 स्टार ट्रेन राजधानी एक्सप्रेस ट्रैन से भी दो गुनी शानदार
रामभक्तों के लिए अयोध्या से रामेश्वरम तक उस पूरे पथ पर यह यात्रा जाएगी, जहां जहां से वनगमन में श्रीराम, जानकी और लखन निकले। दिल्ली से चलकर पहला पड़ाव अयोध्या में, 17 दिन बाद रामेश्वरम में यात्रा का समापन। रामेश्वरम से वापस दिल्ली, फिर दूसरे यात्रियों के लिए यात्रा प्रारंभ। अभी एक ट्रेन, बाद में बढ़कर हो जाएंगी चार ट्रेन। इस आलीशान पूर्ण एसी गाड़ी में फस्ट एसी और सेकेंड एसी दो ही क्लास होंगे। किराया है क्रमशः एक लाख दो हजार और 82 हजार। गाड़ी में पूर्ण शाकाहारी भोजन, शानदार रेस्टोरेंट, सुपर डीलक्स वॉशरूम आदि। पूजागृह, कीर्तन कक्ष, प्रवचन कक्ष एवम् राम लखन वैदेही के रूपधारी पात्र। रात्रि में बढ़िया एसी होटलों में विश्राम, भ्रमण स्थलों के लिए डीलक्स बसें, बढ़िया शाकाहारी भोजन का प्रबंध। चित्रकूट भी, प्रयाग भी, नासिक भी, किष्किन्धा हम्पी आदि हर वह स्थल राह में जहां जहां से प्रभु वन गए। पहली रेलगाड़ी रवाना हो गई है। रामायण सर्किट यात्रा का इतना आकर्षण कि पहली गाड़ी में एक भी सीट खाली नहीं है। रेलवे की योजना है कि ऐसी कुल चार ट्रेन चलेंगी ताकि देश विदेश से आने वाले राम भक्तों की अभिलाषा पूरी की जा सके। मोदी सरकार की योजना है कि ऐसी ही एक गाड़ी वैष्णोदेवी तथा दूसरी पुष्कर -अजमेर के लिए चलाई जाए। वैसे यह जानकर देशवासियों को खुशी होगी कि कृष्णा सर्किट ट्रेन का सर्वे भी इन दिनों चल रहा है। 
रामायण सर्किट ट्रेन के यात्रियों को भविष्य में रामेश्वरम से श्रीलंका तक की यात्रा भी हवाई जहाज से कराई जाएगी। अच्छा लगा न? जो लोग नरेंद्र मोदी को दिन रात गालियाँ देते हैं, रामायण सर्किट उसी प्रधानमंत्री की देन है। यह अच्छी खबर है और बात भी अच्छे दिनों की है। हाल ही में संत तुकाराम, विट्ठल और ज्ञानेश्वर के पंढरपुर के लिए फोरलेन मार्ग का शुभारंभ हुआ है। 
देश में केवल राजनीति ही बाकी नहीं रही, सिर्फ चुनावी हाहाकार ही नहीं मचा और भी बहुत कुछ हो रहा है। रामायण सर्किट ट्रेन उन्हीं में से एक है। यह बहुत बड़ी उपलब्धि है, जिस पर पूरे देश को गर्व है, होना ही चाहिए। 
रामलला की पैंजनिया सुनकर यात्रा शुरू करें और राम सेतु देखकर सम्पन्न। रास्ता भी ऐसा, यदि इस ट्रेन से न जाएँ तो राम के वनगमन मार्ग पर कभी जा ही नहीं पाएं। इस देश की आत्मा अयोध्या में बसी है। राम तो हमारी इस पावनभूमि के कण कण में बसे हैं। यह पूरी वसुधा उनकी भूमि है। भारत की आत्मिक शक्ति अध्यात्म है, उससे कभी जुदा नहीं हुआ जा सकता। यह देश महायात्राओं का देश है। ऐसे में भगवान राम के चरण चिन्हों के दर्शन का अवसर सचमुच अद्भुत है।

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