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‘पुणे आयकॉन 2026’ सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय नेत्र विशेषज्ञों की उपस्थिती : आंखो के रेटिना के अत्याधुनिक उपचारों पर चर्चा सत्र का आयोजन


एनआईओ सुपर स्पेशलिटी अस्पताल द्वारा आयोजित सम्मेलन में 500 से अधिक विशेषज्ञों ने लिया भाग 

पुणे, अप्रैल (हड़पसर एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क)
भारत के अत्यंत प्रतिष्ठित और नामी अस्पतालों में से एक, एनआईओ सुपर स्पेशलिटी अस्पताल ने हाल ही में अपने वार्षिक सम्मेलन ‘पुणे आयकॉन 2026 – द रेटिना कॉन्क्लेव’ का आयोजन किया। पुणे ऑप्थल्मोलॉजिकल सोसायटी के तत्वाधान में आयोजित इस दो दिवसीय शिखर सम्मेलन में देश-विदेश के प्रख्यात नेत्र विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। इस सम्मेलन के आयोजन का मुख्य उद्देश्य रेटिना से संबंधित उन्नत उपचार पद्धतियों और नेत्र विज्ञान में हो रहे नए शोधों पर ध्यान केंद्रित करना था।  

इस कार्यक्रम में बोलते हुए एनआईओ सुपर स्पेशलिटि अस्पताल के निदेशक डॉ. आदित्य केळकर ने अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा, पिछले दो दशकों से ‘पुणे आयकॉन’ सम्मेलन नेत्र विज्ञान के क्षेत्र में वैश्विक ज्ञान, अनुभव और नए शोधों के आदान-प्रदान के लिए एक महत्त्वपूर्ण मंच रहा है। इस वर्ष का सम्मेलन हमारे वैश्विक सहयोग, आधुनिक तकनीक के उपयोग और साक्ष्य-आधारित उपचार पद्धतियों के माध्यम से रेटिना के उपचार में प्रगति हासिक करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। हमें विश्वास है कि इस कार्यक्रम की चर्चाएं, शोध पत्र और साझा की गई जानकारी नेत्र स्वास्थ्य के भविष्य को आकार देने और मरीजों को अधिक उन्नत सेवा प्रदान करने में अत्यंत मूल्यवान साबित होंगी।

एनआईओ सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की निदेशिका डॉ. जाई केलकर ने आधुनिक नेत्र विज्ञान में सर्वांगीण दृष्टीकोण के महत्त्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, नेत्र विज्ञान के कई वर्षों के अनुभव से यह स्पष्ट हो गया है कि वास्तविक शिक्षा हमेशा काम की चुनौतियों से ही मिलती है। आंखो के रेटिना से संबंधित बीमारियों का इलाज करते समय अक्सर जटिल निर्णय लेने पड़ते हैं और समय के साथ उपचार के तरींको को भी बदलना पड़ता है। इसी कारण से, हम कई वर्षों से ‘पुणे आयकॉन’ जैसे मंच विकसित कर रहै हैं| 

इस मंच के माध्यम से मरीजों के मामलों से संबंधित विशेषज्ञों के विचारों और क्लिनिकल अनुभवों के आदान-प्रदान द्वारा इन चुनौतियों पर चर्चा की जा सकती है। इस सम्मेलन की सफलता यह सिद्द करती है कि ‘ज्ञान’ केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यावहारिक अनुभवों पर आधारित है। इससे प्राप्त होने वाले निष्कर्षों को दैनिक चिकित्सा उपचार में लागू किया जा सकता है, और यही इस सम्मेलन की सबसे बड़ी उपलब्धि है।

इस दो दिवसीय सम्मेलन में प्रतिष्ठित नेत्र विशेषज्ञों, रेटिना विशेषज्ञों और चिकित्सा पेशेवरों ने भाग लिया। इस अवसर पर रेटिना के भविष्य के उपचारों की दिशा के बारे में विस्तार से चर्चा की गई। आँख को शरीर की सबसे जटिल संरचनाओं में से एक माना जाता है।

रेटिना आँख का सबसे संवेदनशील और महत्त्वपूर्ण हिस्सा है, इसलिए विशेषज्ञों ने मुख्य रुप से इसी विषय पर ध्यान केंद्रित किया। इस सम्मेलन में मास्टरक्लासेस का भी आयोजन किया गया था। इसके साथ ही विशेषज्ञों के चर्चा सत्र और वास्तविक मरीजों के मामलों पर आधारित अध्ययन प्रस्तुत किए गए। 

कार्यक्रम में विट्रोरेटिन सर्जरी की अत्याधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन करने वाली वीडिओ क्लिपस सहित एक विस्तृत वैज्ञानिक सत्र का भी आयोजन किया गया था। सम्मेलन में उपस्थित प्रतिभागियों को आँखो की सर्जरी की नई जानकारियों और आधुनिक पद्धतीयों के बारे में जानने का अवसर मिला।

‘पुणे आयकॉन’ में अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रसिद्ध नेत्र विशेषज्ञों की उपस्थिती ही इस सम्मेलन की प्रमुख विशेषता रही। सिंगापूर आई सेंटर के डॉ. गैविन टैन, अबू धाबी स्थित क्लीवलैंड क्लिनिक के डॉ. अनिरुद्ध अग्रवाल और अमेरिका के स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के डॉ. पृथ्वी मृत्यूंजय ने इस सम्मेलन के प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया। 

उन्होंने रेटिना से संबंधित जटिल रोगों, इमेजिंग बायोमार्कर्स, मधुनेह के कारण आँखो में होने वाली सूजन और उपचार के बदलते तौर-तरीकों जैसे विषयों पर विस्तृत जानकारी दी। विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए, जिससे स्थानीय डॉक्टरों को रेटिना के उपचार में अंतरराष्ट्रीय मानकों और नए रुझानों के बारे में विस्तार से जानने का अवसर मिला।

इस सम्मेलन के महत्त्वपूर्ण सत्रों में आँखो की जलन, मधुनेह के कारण होने वाली आँखो के रोग और जटिल सर्जरी जैसे महत्त्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। नेत्र विज्ञान में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाले कई मुद्दों पर जानकारी दी गई। प्रत्यक्ष उपचार के दौरान सटीक निर्णय लेने और बीमारी के निदान के लिए आर्टिफिशिअल इंटेलिजन्स के बढ़ते उपयोग के महत्त्व को भी रेखांकित किया गया।

मरीजों के मामलों से संबंधित चर्चा और विशेषज्ञों के साथ संवाद के कारण प्रतिभागी डॉक्टरों को एक-दुसरे के अनुभवों से सीखने का अवसर मिला। उन्हें चिकित्सा क्षेत्र की बारीकियों को समझने का मौकी मिला| सम्मेलन के आयोजकों ने यह विश्वास व्यक्त किया कि इस चर्चा से निकले निष्कर्ष दैनिक रोगी सेवा के लिए अत्यंत मूल्यवान साबित होंगे|

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