हड़पसर, जनवरी (ह.ए. प्रतिनिधि)
अनाथों की मां वरिष्ठ समाजसेविका सिंधुताई सपकाल का आज दुखद निधन हो गया, वे 73 वर्ष की थीं। सिंधुताई का उपचार पुणे के गैलक्सी हॉस्पिटल में शुरू था, उनका हर्निया का ऑपरेशन भी हुआ था। प्रकृति अधिक नाजुक होने के कारण उन्हें आईयूसी में भर्ती कराया गया था, परंतु वे मृत्यु से हार गईं। उनके निधन से हजारों बच्चे फिर अनाथ हो गए हैं। उनकी मृत्यु का समाचार फैलते ही चारों ओर दुख का वातावरण निर्माण हो गया है।
सिंधुताई को हाल ही में उनके सामाजिक कार्य के लिए पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। महाराष्ट्र सरकार द्वारा उन्हें सन् 2012 में डॉ. बाबासाहब आंबेडकर समाज भूषण पुरस्कार और सन् 2010 में अहिल्याबाई होलकर पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस प्रकार सिंधुताई को तकरीबन 750 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजा गया है।
सिंधुताई का जन्म 14 नवंबर 1947 को वर्धा जिले के नवरगांव में हुआ था। सुविधाओं के अभाव के कारण वे कक्षा 4 तक ही शिक्षा प्राप्त कर सकीं। उनकी शादी 9 साल की उम्र में 26 साल बड़े श्रीहरि सपकाल के साथ हुई। सन् 1994 में पुणे के पास पुरंदर तहसील के कुंभारवलण गांव में ममता बाल सदन की स्थापना की। उन्होंने छोटे बच्चों की शिक्षा से लेकर उनके उज्ज्वल भविष्य की जिम्मेदारी स्वीकार की। उन्होंने अपने जीवन में अनेक संघर्षों का सामना किया। उनका एक अनाथ आश्रम हड़पसर के पास मांजरी में भी स्थित है।
अनाथों की मां वरिष्ठ समाजसेविका सिंधुताई सपकाल का आज दुखद निधन हो गया, वे 73 वर्ष की थीं। सिंधुताई का उपचार पुणे के गैलक्सी हॉस्पिटल में शुरू था, उनका हर्निया का ऑपरेशन भी हुआ था। प्रकृति अधिक नाजुक होने के कारण उन्हें आईयूसी में भर्ती कराया गया था, परंतु वे मृत्यु से हार गईं। उनके निधन से हजारों बच्चे फिर अनाथ हो गए हैं। उनकी मृत्यु का समाचार फैलते ही चारों ओर दुख का वातावरण निर्माण हो गया है।
सिंधुताई को हाल ही में उनके सामाजिक कार्य के लिए पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। महाराष्ट्र सरकार द्वारा उन्हें सन् 2012 में डॉ. बाबासाहब आंबेडकर समाज भूषण पुरस्कार और सन् 2010 में अहिल्याबाई होलकर पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस प्रकार सिंधुताई को तकरीबन 750 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजा गया है।
सिंधुताई का जन्म 14 नवंबर 1947 को वर्धा जिले के नवरगांव में हुआ था। सुविधाओं के अभाव के कारण वे कक्षा 4 तक ही शिक्षा प्राप्त कर सकीं। उनकी शादी 9 साल की उम्र में 26 साल बड़े श्रीहरि सपकाल के साथ हुई। सन् 1994 में पुणे के पास पुरंदर तहसील के कुंभारवलण गांव में ममता बाल सदन की स्थापना की। उन्होंने छोटे बच्चों की शिक्षा से लेकर उनके उज्ज्वल भविष्य की जिम्मेदारी स्वीकार की। उन्होंने अपने जीवन में अनेक संघर्षों का सामना किया। उनका एक अनाथ आश्रम हड़पसर के पास मांजरी में भी स्थित है।
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