पुणे, फरवरी (जिमाका)
राज्य को कृषि निर्यात का प्रमुख केंद्र बनाने सहित किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि माल का निर्यात महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। नई कृषि निर्यात नीति निश्चित रूप से इसके लिए महत्वपूर्ण होगी। यह विश्वास प्रधान सचिव अनूप कुमार ने व्यक्त किया।
राज्य के कृषि निर्यात नीति की शुरुआत व निर्यात के बारे में चर्चासत्र कार्यक्रम में श्री अनूप कुमार बोल रहे थे। इस अवसर पर कृषि आयुक्त धीरज कुमार, नाशिक के जिलाधिकारी सूरज मांढरे, औरंगाबाद के जिलाधिकारी सुनील चव्हाण, डिजीएफटी के सहमहासंचालक वरुण सिंह, अपेडा के श्री आर. रविंद्रा, जेएनपीटी के सलाहकार राजन गुरव और उपसंचालक डॉ. ब्रजेश मिश्रा उपस्थित थे।
श्री अनूप कुमार ने कहा कि महाराष्ट्र अपने विविध कृषि उत्पादों, बुनियादी ढांचे और किसानों की सक्रिय भागीदारी के कारण देश में कृषि उत्पादनों के महत्वपूर्ण निर्यातकों में से एक है। कुल निर्यात बढ़ाने के अलावा विकसित देशों को निर्यात बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। कृषि उत्पादन में वृद्धि के कारण बाजार में कृषि वस्तुओं की बढ़ती उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए, बाजार दरों और किसानों के पारिश्रमिक के बीच संतुलन बनाने के लिए वैकल्पिक बाजार के रूप में कृषि वस्तुओं का निर्यात महत्वपूर्ण है।
श्री अनूप कुमार ने कहा कि महाराष्ट्र देश में कृषि माल निर्यात में अग्रणी है। निर्यात बढ़ाने के लिए कृषि माल निर्यात में राज्य का पिछला अनुभव, किसान, किसान समूह, किसान सहकारी संस्था, निर्यातक, विभिन्न विश्वविद्यालय, संशोधन संस्था के साथ चर्चा व विचार विनिमय कर राज्य की कृषि नीति तैयार की गई है। नई नीति से राज्य में कृषि माल के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। कृषि माल के निर्यात से किसानों की शुद्ध आय में 40 से 50 प्रतिशत की वृद्धि होती है। कोरोना काल में कृषि क्षेत्र में कारोबार बढ़ा है। राज्य ने इस दौरान कृषि निर्यात कर निर्यात बढ़ाने की कोशिश की है।
राज्य को कृषि निर्यात का प्रमुख केंद्र बनाने सहित किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि माल का निर्यात महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। नई कृषि निर्यात नीति निश्चित रूप से इसके लिए महत्वपूर्ण होगी। यह विश्वास प्रधान सचिव अनूप कुमार ने व्यक्त किया।
राज्य के कृषि निर्यात नीति की शुरुआत व निर्यात के बारे में चर्चासत्र कार्यक्रम में श्री अनूप कुमार बोल रहे थे। इस अवसर पर कृषि आयुक्त धीरज कुमार, नाशिक के जिलाधिकारी सूरज मांढरे, औरंगाबाद के जिलाधिकारी सुनील चव्हाण, डिजीएफटी के सहमहासंचालक वरुण सिंह, अपेडा के श्री आर. रविंद्रा, जेएनपीटी के सलाहकार राजन गुरव और उपसंचालक डॉ. ब्रजेश मिश्रा उपस्थित थे।
श्री अनूप कुमार ने कहा कि महाराष्ट्र अपने विविध कृषि उत्पादों, बुनियादी ढांचे और किसानों की सक्रिय भागीदारी के कारण देश में कृषि उत्पादनों के महत्वपूर्ण निर्यातकों में से एक है। कुल निर्यात बढ़ाने के अलावा विकसित देशों को निर्यात बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। कृषि उत्पादन में वृद्धि के कारण बाजार में कृषि वस्तुओं की बढ़ती उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए, बाजार दरों और किसानों के पारिश्रमिक के बीच संतुलन बनाने के लिए वैकल्पिक बाजार के रूप में कृषि वस्तुओं का निर्यात महत्वपूर्ण है।
श्री अनूप कुमार ने कहा कि महाराष्ट्र देश में कृषि माल निर्यात में अग्रणी है। निर्यात बढ़ाने के लिए कृषि माल निर्यात में राज्य का पिछला अनुभव, किसान, किसान समूह, किसान सहकारी संस्था, निर्यातक, विभिन्न विश्वविद्यालय, संशोधन संस्था के साथ चर्चा व विचार विनिमय कर राज्य की कृषि नीति तैयार की गई है। नई नीति से राज्य में कृषि माल के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। कृषि माल के निर्यात से किसानों की शुद्ध आय में 40 से 50 प्रतिशत की वृद्धि होती है। कोरोना काल में कृषि क्षेत्र में कारोबार बढ़ा है। राज्य ने इस दौरान कृषि निर्यात कर निर्यात बढ़ाने की कोशिश की है।
आदिवासी बहुल क्षेत्र में स्वास्थ्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण पदार्थों की मांग बढ़ी है। इसके आगे निर्यात श्रृंखला में इन पदार्थों का समावेश करना पड़ेगा। बेचने के लिए बेचने की अवधारणा के आधार पर वैश्विक और घरेलू बाजारों में मांग में आने वाली फसलों का उत्पादन करें, यह अपील भी उन्होंने की।
कृषि आयुक्त धीरज कुमार ने कहा कि देश के कुल कृषि निर्यात में महाराष्ट्र का हिस्सा 70 फीसदी है। पिछले वर्ष की तुलना में निर्यात में 14 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। राज्य में 26 उत्पादनों को भौगोलिक रेटिंग मिली है। यदि कृषि निर्यात के लिए जिलावार प्रकोष्ठ स्थापित किया जाए तो इसे और बढ़ाया जा सकता है।
श्री धीरज कुमार ने कहा कि राज्य में दो वर्षों में फल रोपण के क्षेत्र में 80,000 हेक्टेयर की वृद्धि हुई है। पिछले साल 40 व इस वर्ष 40 हेक्टेयर फल रोपण हुआ है। किसानों को निर्यात करने में सक्षम बनाने के लिए बागवानी महत्वपूर्ण है। निर्यात की दृष्टि से यह एक महत्वपूर्ण कदम है क्योंकि कोरोना काल में प्रत्यक्ष बिक्री प्रणाली स्थापित की गई है। प्रक्रिया उद्योग में राज्य अग्रणी है। लेकिन इसमें हमें निर्यात के लिए काम करना होगा। प्रदेश में किसान उत्पादन कंपनियों के लिए यह पहल महत्वपूर्ण साबित होगी।
नासिक के जिला कलेक्टर सूरज मांढरे ने कहा कि तालाबंदी के दौरान नासिक जिले के किसानों ने भारी आर्थिक कारोबार किया है। किसान से उपभोक्ता प्रत्यक्ष बिक्री प्रणाली से किसानों को लाभ हुआ है। किसान उपक्रमशील हैं, किसानों को सहारा देना होगा।
उन्होंने कहा कि बाजार में जिन कृषि उत्पादों की मांग है, उन्हें तैयार करना होगा। उन्होंने अंगूर निर्यात, प्याज निर्यात नीति की जानकारी दी।
औरंगाबाद के जिला कलेक्टर सुनील चव्हाण ने कहा कि विकेल से पिकेल की अवधारणा बहुत महत्वपूर्ण है। औरंगाबाद जिला योजना के तहत नवीन योजनाओं के माध्यम से जिले में बिक्री के अवसर पैदा करने के लिए एक नई अवधारणा लागू की जा रही है। उन्होंने केसर आम और मोसंबी निर्यात, निर्यात सुविधा केंद्र की क्षमता, निर्यात के लिए सुविधा में वृद्धि, सुविधा केंद्र से हुआ निर्यात, निर्यात सीमा आवश्यकता के बारे में जानकारी दी।
प्रास्ताविक पणन संचालक श्री सुनील पवार ने किया। निर्यात नीति के बारे में उन्होंने जानकारी दी। पणन मंडल के व्यवस्थापक सतीश वराडे ने कृषि नीति के बारे में प्रस्तुति द्वारा जानकारी दी। यहां राज्य के किसान उत्पादक कंपनियों के प्रतिनिधि, कृषि व पणन विभाग के प्रमुख अधिकारी उपस्थित थे।
कृषि आयुक्त धीरज कुमार ने कहा कि देश के कुल कृषि निर्यात में महाराष्ट्र का हिस्सा 70 फीसदी है। पिछले वर्ष की तुलना में निर्यात में 14 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। राज्य में 26 उत्पादनों को भौगोलिक रेटिंग मिली है। यदि कृषि निर्यात के लिए जिलावार प्रकोष्ठ स्थापित किया जाए तो इसे और बढ़ाया जा सकता है।
श्री धीरज कुमार ने कहा कि राज्य में दो वर्षों में फल रोपण के क्षेत्र में 80,000 हेक्टेयर की वृद्धि हुई है। पिछले साल 40 व इस वर्ष 40 हेक्टेयर फल रोपण हुआ है। किसानों को निर्यात करने में सक्षम बनाने के लिए बागवानी महत्वपूर्ण है। निर्यात की दृष्टि से यह एक महत्वपूर्ण कदम है क्योंकि कोरोना काल में प्रत्यक्ष बिक्री प्रणाली स्थापित की गई है। प्रक्रिया उद्योग में राज्य अग्रणी है। लेकिन इसमें हमें निर्यात के लिए काम करना होगा। प्रदेश में किसान उत्पादन कंपनियों के लिए यह पहल महत्वपूर्ण साबित होगी।
नासिक के जिला कलेक्टर सूरज मांढरे ने कहा कि तालाबंदी के दौरान नासिक जिले के किसानों ने भारी आर्थिक कारोबार किया है। किसान से उपभोक्ता प्रत्यक्ष बिक्री प्रणाली से किसानों को लाभ हुआ है। किसान उपक्रमशील हैं, किसानों को सहारा देना होगा।
उन्होंने कहा कि बाजार में जिन कृषि उत्पादों की मांग है, उन्हें तैयार करना होगा। उन्होंने अंगूर निर्यात, प्याज निर्यात नीति की जानकारी दी।
औरंगाबाद के जिला कलेक्टर सुनील चव्हाण ने कहा कि विकेल से पिकेल की अवधारणा बहुत महत्वपूर्ण है। औरंगाबाद जिला योजना के तहत नवीन योजनाओं के माध्यम से जिले में बिक्री के अवसर पैदा करने के लिए एक नई अवधारणा लागू की जा रही है। उन्होंने केसर आम और मोसंबी निर्यात, निर्यात सुविधा केंद्र की क्षमता, निर्यात के लिए सुविधा में वृद्धि, सुविधा केंद्र से हुआ निर्यात, निर्यात सीमा आवश्यकता के बारे में जानकारी दी।
प्रास्ताविक पणन संचालक श्री सुनील पवार ने किया। निर्यात नीति के बारे में उन्होंने जानकारी दी। पणन मंडल के व्यवस्थापक सतीश वराडे ने कृषि नीति के बारे में प्रस्तुति द्वारा जानकारी दी। यहां राज्य के किसान उत्पादक कंपनियों के प्रतिनिधि, कृषि व पणन विभाग के प्रमुख अधिकारी उपस्थित थे।
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