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अब पुणे में छात्रों के लिए खगोल विज्ञान वेधशाला और प्रयोगशाला

पुणे, फरवरी (हड़पसर एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क)

आज, महर्षि कर्वे स्त्री-शिक्षा संस्थान, पुणे में छात्रों के लिए भारत की सबसे बड़ी स्कूल स्तर की खगोल विज्ञान वेधशाला और प्रयोगशाला का अनावरण किया गया। हेंकेल एडेसिवज टेक्नोलॉजीज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (हेंकेल इंडिया) ने ग्लोबल मिशन एस्ट्रोनॉमी इंडिया और लायंस क्लब्स इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3234 डी2 के सहयोग से यह खगोल विज्ञान वेधशाला और प्रयोगशाला स्थापित की है। इस खगोलीय वेधशाला और प्रयोगशाला का उद्घाटन नितिन करमलकर (सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी के कुलपति) और हेंकेल इंडिया के डॉ. प्रसाद खंडागले ने किया। कार्यक्रम में उपस्थित अन्य गणमान्य व्यक्तियों में प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. काशीनाथ देवधर (पूर्व डीआरडीओ), डॉ. जयंत नारलीकर (सीनियर एस्ट्रोफिजिसिस्ट), डॉ. रूपेश ओझा (एस्ट्रोफिजिसिस्ट, संचालक- नासा यूएसए), साथ ही  लायन हेमंत नाइक (डिस्ट्रिक्ट गवर्नर लायंस क्लब 3234 डी2) और रवींद्र देव (अध्यक्ष एमकेएसएसएस) भी उपस्थित थे।
इन लैब की मदद से अब 10 हजार छात्र अंतरिक्ष अनुसंधान की पढ़ाई कर रहे हैं। हमने ‘ट्रेन द ट्रेनर’ कार्यक्रम के माध्यम से पुणे के आसपास 250 से अधिक शिक्षकों को प्रशिक्षित किया है। खगोल विज्ञान वेधशाला और प्रयोगशाला की मदद से छात्र विभिन्न गतिविधियों जैसे सूर्य ग्रहण, चंद्र ग्रहण, सुपरमून, उल्का बौछार, ग्रहों और तारों का अवलोकन, छोटे ग्रहों का अवलोकन, ग्रहों का संबंध, रात में आकाश का अवलोकन आदि में भाग ले सकेंगे।
इस वक्त हेंकेल इंडिया के सीएसआर समिति सदस्य डॉ. प्रसाद खंडागले ने कहा कि खगोल विज्ञान वेधशाला और प्रयोगशाला के माध्यम से, हम बच्चों में रुचि पैदा करेंगे और उन्हें स्कूल स्तर से ही ज्ञान प्राप्त करने में मदद करेंगे। इस प्रकार, भारत के भविष्य के वैज्ञानिकों और खगोलविदों के लिए एक ब्रिडिंग ग्राउंड तैयार किया जाएगा। हेनकेल ने इससे पहले पुणे जिले की 5 तहसीलों, जेजुरी, भोर, तलेगांव, ठमठेरे  और शिरगांव में खगोल विज्ञान वेधशाला स्थापित करने में मदद की है और महर्षि कर्वे स्त्री-शिक्षण संस्थान, पुणे में स्थापित की गई यह छठी खगोल विज्ञान वेधशाला और प्रयोगशाला है। ग्लोबल मिशन एस्ट्रोनॉमी इंस्टीट्यूट, इंडिया से इसके लिए सहयोग मिला है, जिन्होंने अमेरिका और स्पेन में अनुसंधान संस्थानों के साथ एमओयू किया है, जिसका मतलब है कि इन सभी स्कूलों के छात्र नासा के एस्टॅोईड खोज मिशन में शामिल होंगे। छात्रों को जापान, ऑस्ट्रेलिया और अन्य अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान केंद्रों के साथ-साथ इतिहास के एस्टॅोईड खोज में भाग लेने का अवसर भी दिया जाएगा।

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