आजादी के 75वें वर्ष की पावन यादगार में, आजादी का अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में तथा आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार के लिए इस शानदार यात्रा के अवसर पर माननीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री ने डॉ. अम्बेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र (डीएआईसी) में दिनांक 06.06.2022 को आयोजित प्रेस सम्मेलन में सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग की उपलब्धियों के बारे में संक्षिप्त विवरण दिया।
माननीय मंत्री ने सूचित किया कि यह विभाग सामाजिक, शैक्षिक तथा आर्थिक रूप से लाभवंचित वर्गों जैसे कि अनुसूचित जातियां, अन्य पिछड़े वर्ग, वरिष्ठ नागरिक, मद्यपान तथा नशीले पदार्थों के दुरूपयोग के पीड़ितों, ट्रांसजेंडर व्यक्तियो, भिखारियों, विमुक्त तथा घमंतू जनजातियों (डीएनटी), आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों (ईबीसी) तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गो (ईडब्ल्यूएस) का सशक्तिकरण करके एक समावेशी समाज का निर्माण करने के सपने को साकार करने का प्रयास कर रहा है। यह विभाग उपर्युक्त लक्ष्य समूह के सदस्यों के उत्थान हेतु विभिन्न स्कीमों का कार्यान्वयन करता रहा है।
माननीय मंत्री ने सूचित किया कि यह विभाग सामाजिक, शैक्षिक तथा आर्थिक रूप से लाभवंचित वर्गों जैसे कि अनुसूचित जातियां, अन्य पिछड़े वर्ग, वरिष्ठ नागरिक, मद्यपान तथा नशीले पदार्थों के दुरूपयोग के पीड़ितों, ट्रांसजेंडर व्यक्तियो, भिखारियों, विमुक्त तथा घमंतू जनजातियों (डीएनटी), आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों (ईबीसी) तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गो (ईडब्ल्यूएस) का सशक्तिकरण करके एक समावेशी समाज का निर्माण करने के सपने को साकार करने का प्रयास कर रहा है। यह विभाग उपर्युक्त लक्ष्य समूह के सदस्यों के उत्थान हेतु विभिन्न स्कीमों का कार्यान्वयन करता रहा है।
विभाग की वित्तीय वर्ष 2014-15 से 2021-22 के निम्नलिखित उपलब्धियां रही हैं:-
- अनुसूचित जातियों (एससी), अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी), विमुक्त तथा घुमंतू जनजातियों (डीएनटी) के शैक्षिक उत्थान हेतु विभिन्न स्कीमें कार्यान्वित की जा रही हैं। वित्तीय वर्ष 2014-15 से शुरूआत करके 36164 करोड़ रूपए की राशि व्यय की गई है तथा निम्निलिखित स्कीमों के कार्यान्वयन से 11 करोड़ से अधिक छात्र लाभान्वित हुए हैं:-
- एससी छात्रों तथा अन्यों के लिए मैट्रिक-पूर्व छात्रवृत्ति: 224.70 लाख लाभार्थी तथा लगभग 3280.07 करोड़ रूपए का व्यय का व्यय।
- एससी छात्रों के लिए मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति 434.29 लाख लाभार्थी तथा लगभग 24968.55 करोड़ रूपए का व्यय ।
- प्रधानमंत्री-अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-अजय) का एक घटक: बाबू जगजीवन राम छात्रावास योजना: 173 छात्रावासों के निर्माण हेतु मंजूर 342.5 करोड़ रूपए जिससे 15800 लाभार्थी छात्र लाभान्वित हुए।
- यंग अचीवर्स के लिए उच्चतर शिक्षा (श्रेयस):
- एससी तथा ओबीसी छात्रों (एफसीएस) के लिए नि:शुल्क कोचिंग स्कीम - वर्ष 2014-15 से लगभग 91.37 करोड़ रूपए का व्यय कर लगभग 19437 लाभार्थी लाभान्वित हुए।
- एससी (टीसीएस) के लिए उत्कृष्ट श्रेणी छात्रवृत्ति स्कीम – वर्ष 2014-15 से लगभग 313.48 करोड़ रूपए का व्यय तथा लगभग 17817 लाभार्थी लाभान्वित हुए।
- एससी आदि छात्रों (एनओएस) के लिए राष्ट्रीय समुद्रपारीय छात्रवृत्ति स्कीम - वर्ष 2014-15 से लगभग 152.23 करोड़ रूपए का व्यय तथा 534 – लाभार्थी लाभान्वित हुए।
- एससी के लिए राष्ट्रीय फेलोशिप स्कीम (एनएफएससी) - वर्ष 2014-15 से लगभग 1511.65 करोड़ रूपए का व्यय तथा 18036 लाभार्थी लाभान्वित हुए।
- लक्षित क्षेत्रों के उच्च विद्यालयों में आवासीय शिक्षा स्कीम (श्रेष्ठा) कुल 247 करोड़ रूपए का व्यय किया गया जिससे 1,55,715 एससी छात्र लाभान्वित हुए।
- ओबीसी तथा अन्यों के लिए वायब्रेंट इंडिया पीएम – यंग अचीवर्स छात्रवृत्ति अवार्ड स्कीम (पीएम-यशस्वी) के अंतर्गत निम्नलिखित उप-स्कीमें हैं:-
- ओबीसी, ईबीसी और डीएनटी छात्रों के लिए मैट्रिक-पूर्व छात्रवृत्ति -563.9 लाख लाभार्थी और लगभग 1195.33 करोड़ रुपए का व्यय हुआ।
- ओबीसी, ईबीसी और डीएनटी छात्रों के लिए मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति- 302.05 लाख लाभार्थी और लगभग 8186.56 करोड़ रूपए का व्यय हुआ।
- ओबीसी, ईबीसी और डीएनटी छात्रों के लिए उत्कृष्ट श्रेणी स्कूल शिक्षा-नई पहल की गई है।
- ओबीसी छात्र और छात्राओं के लिए छात्रावास का निर्माण- 16870 सीटों वाले छात्रावासों के निर्माण के लिए लगभग 260.70 करोड़ रुपए का व्यय हुआ।
- यह विभाग अनुसूचित जातियों (एससी), वरिष्ठ नागरिकों, मद्यपान तथा नशीले पदार्थ के दुरुपयोग के पीड़ितों, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों, भिखारियों आदि के सामाजिक उत्थान के लिए स्कीमों का कार्यान्वयन कर रहा है। विभाग ने सामाजिक सुरक्षा के मोर्चे पर लगभग 10304 करोड़ रुपए खर्च किए हैं और पिछले 08 वर्षों के दौरान 42 लाख से अधिक लोग लाभान्वित हुए हैं।
अटल वयो अभ्युदय योजना (एवीवाईएवाई)
- वरिष्ठ नागरिकों के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना (एनएपीएसआरसी)- वर्ष 2014 से अब तक कुल लाभार्थी 271365 हैं और व्यय लगभग 334 करोड़ रुपये है।
- राष्ट्रीय वयोश्री योजना (आरवीवाई) - 236 शिविरों में 2,40,490 व्यक्तियों को 182.06 करोड़ रुपये की राशि का व्यय करके 8,30,739 सहायक उपकरण वितरित किए गए हैं।
- वरिष्ठ नागरिकों के लिए आजीविका और कौशल पहल -
(i) वृद्धजन स्वयं सहायता समूह स्कीम वर्ष 2021-22 में शुरू की गई है।
(ii) वरिष्ठ योग्य नागरिक गरिमामय पुनर्रोजगार (सेकर्ड) पोर्टल दिनांक 01.10.2021 को शुरू किया गया था।
- रजत अर्थव्यवस्था (सेज पोर्टल): वित्तीय वर्ष 2021-22 के दौरान 09 स्टार्ट अप का चयन किया गया था।
- मद्यपान तथा नशीले पदार्थ के दुरुपयोग के सेवन की रोकथाम के लिए स्कीम:
- नशीली दवाओं की मांग में कटौती के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना (एनएपीडीडीआर) – वर्ष 2014 से कुल लाभार्थी 11,35,292 हैं और लगभग 839.09 करोड़ रुपए का व्यय हुआ।
- नशा मुक्त भारत अभियान (एनएमबीए) - वर्तमान में, लगभग 357 आईआरसीए, 78 ओडीआईसी, 55 सीपीएलआई और 35 एटीएफ पूरे देश में विस्तारित हैं। जमीनी स्तर पर की गई विभिन्न कार्यकलापों के माध्यम से अब तक 2.46 करोड़ से अधिक लोगों से संपर्क किया गया है जिनमें 1.17 करोड़ युवा और 30 लाख महिलाएं शामिल हैं।
- आजीविका और उद्यम के लिए लाभवंचित व्यक्तियों के लिए सहायता स्कीम (स्माइल):
- ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के कल्याणार्थ व्यापक पुनर्वास केंद्रीय क्षेत्र की स्कीम,
- भिक्षावृत्ति में लगे व्यक्तियों के व्यापक पुनर्वास हेतु केंद्रीय क्षेत्र स्कीम,
- वर्ष 2021-22 में स्माइल के अंतर्गत 1,75,03,200 रुपए खर्च किए गए हैं।
- अत्याचारों की रोकथाम के लिए नोडल मंत्रालय होने के नाते, इस मंत्रालय ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) {पीओए} अधिनियम, 1989 को, अन्य बातों के साथ-साथ, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सदस्यों के विरूद्ध अत्याचारों के निवारण हेतु अधिनियमित किया गया था; पूरे देश में समतावादी समाज की स्थापना करने लिए वर्ष 2018 में अधिनियम में खंड 18 (क) को अंत:स्थापित करके नियमावली में संशोधन करके इसे और अधिक निवारक और प्रभावी बनाया गया है।
- राहत प्रदत्त अत्याचार पीड़ितों की कुल संख्या: 3073.77 करोड़ रुपए की राशि खर्च करके 435382 लोगों की सहायता की गई।
- अंतर्जातीय विवाह की पहल: 164325 दंपति लाभान्वित हुए।
- मंत्रालय ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों को संरक्षण प्रदान करने और उनके कल्याणार्थ "उभयलिंगी व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019" अधिनियमित किया है।
- ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए वर्ष 2019 में भारत के संविधान के 103वें संशोधन के माध्यम से अनुच्छेद 15(6) और अनुच्छेद 16(6) को अंत:स्थापित करके आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 10% आरक्षण का प्रावधान किया गया है।
- यह विभाग समाज के लाभवंचित वर्गों को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मानिर्भर बनाने के लिए अपने निगमों के माध्यम से विभिन्न कौशल विकास और ऋण स्कीमों का कार्यान्वयन कर रहा है। वित्तीय वर्ष 2014-15 से 8286 करोड़ की राशि खर्च करके अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, डीएनटी, ईबीसी और सफाई कर्मचारियों सहित लाभवंचित वर्गों के 20 लाख से अधिक व्यक्ति लाभान्वित हुए हैं।
- डॉ बी आर अम्बेडकर के सम्मान में हमें पांच स्थानों पर पंचतीर्थ स्थ्लों का निर्माण करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है:-
- महू में अम्बेडकर का जन्म स्थान लंदन में वह स्थान जहाँ वे यूके में पढ़ते हुए ठहरे थे, नागपुर में दीक्षा भूमि, जहाँ उन्होंने शिक्षा ग्रहण की, दिल्ली में महापरिनिर्वाण स्थल और मुंबई में चैत्य भूमि.
- डॉ. अम्बेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र (डीएआईसी) भी दिल्ली के जनपथ पर निर्मित गया है ताकि कठोर और आधिकारिक शोध करके सामाजिक-आर्थिक असमानताओं को कम किया जा सके।
- इस विभाग ने अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के सदस्यों पर अत्याचार के निवारण हेतु टोल फ्री नंबर "14566" की राष्ट्रीय हेल्पलाइन स्थापित की है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी राष्ट्रीय हेल्पलाइन टोल फ्री नंबर "14567" पर उपलब्ध कराई गई है। ।
- सभी स्कीम तथा परियोजनाओं को 100% गो-ग्रीन को अपनाते हुए केवल ई-फाईल के माध्यम से निष्पादित करना शुरू कर दिया गया है। इस विभाग ने शुरू से आखिर तक ऑनलाइन कार्यकलाप करने के लिए आईटीकृत कार्यक्षम प्रणाली के कार्यान्वयन के माध्यम से ई-गवर्नेस को सुदृढ़ किया है तथा 100% पारदर्शिता सुनिश्चित की है।
यह विभाग विभिन्न कार्यक्रमो तथा स्कीमों के माध्यम से संपूर्ण देश में लक्षित समूह के सदस्यों के विकास तथा उनको आर्थिक एवं सामाजिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए पर्याप्त सहायता उपलब्ध कराकर एक समावेशी समाज का निर्माण करने के लिए सदैव प्रयासरत रहेगा।
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गत 8 वर्षों के दौरान दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की प्रमुख उपलब्धियां
- विधायी सुधार: दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 का अधिनियमन: सरकार ने 28.12.2016 को दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 को अधिनियमित किया। यह अधिनियम 19.04.2017 से प्रभावी हुआ। 15.06.2017 को केंद्रीय नियमों को अधिसूचित किया गया। अब तक, 32 राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों ने इस अधिनियम को अधिसूचित किया है। आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, दादर और नागर हवेली तथा दमन और दीव और लद्दाख ने इस अधिनियम को अधिसूचित नहीं किया है। आरपीडब्ल्यूडी अधिनियम, 2016 की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं: -
- पीडब्ल्यूडी अधिनियम, 1995 की तुलना में यह एक अधिकार आधारित विधान है जो कल्याण आधारित था।
- दिव्यांगताओं की श्रेणियाँ को 7 से बढ़ाकर 21 कर दिया गया। 04.01.2018 को इन दिव्यांगताओं के मूल्यांकन हेतु दिशा-निर्देश निर्धारित किए गए थे।
- दिव्यांगजनों के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण को 3% से बढ़ाकर 4% कर दिया गया। 15.01.2018 को, डीओपीटी ने दिव्यांगजनों को सीधी भर्ती में रिक्तियों की कुल संख्या में 4% आरक्षण प्रदान करने हेतु निर्देश जारी किए।
- 04.01.2021 को, मंत्रालयों ने दिव्यांगजनों के लिए आरक्षण के लिए उपयुक्त 3566 पदों (1046-ग्रुप ए; 515-ग्रुप बी; 1724-ग्रुप सी और 281-ग्रुप डी) की पहचान कर इस सूची को अधिसूचित किया ।
- 17.05.2022 को, केंद्र सरकार ने ग्रुप सी में, ग्रुप सी से ग्रुप बी में, ग्रुप बी में से लेकर ग्रुप ए के सबसे निचले रैंक में संवर्ग की क्षमता (स्ट्रेंथ) में बेंचमार्क दिव्यांगजनों की लिए पदोन्नति में 4% आरक्षण प्रदान करने हेतु निर्देश जारी किए।
- सरकारी/सरकारी सहायता प्राप्त उच्च शैक्षणिक संस्थानों में दिव्यांग छात्रों के लिए सीटों में आरक्षण को 3% से बढ़ाकर 5% किया गया।
- यह निर्मित वातावरण, परिवहन प्रणाली और आईसीटी पारिस्थितिकी प्रणाली में दिव्यांगजनों के लिए सुगम्य वातावरण के सृजन पर केंद्रित है।
- यह कौशल विकास, खेल और मनोरंजन में दिव्यांगजनों की भागीदारी को प्रोत्साहित करने पर भी केंद्रित है ।
- दिव्यांगता के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग:
- भारत ने दिव्यांगजनों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (यूएनसीआरपीडी) पर हस्ताक्षर किए हैं और बाद में 1 अक्टूबर, 2007 को इसकी पुष्टि की।
- भारत एशिया और पैसिफिक क्षेत्र में 2012 से दिव्यांगजनों के लिए ‘’अधिकार को वास्तविकता बनाने’’ पर इंचियोन कार्यनीति का भी एक पक्षकार है।
- भारत ने 22 नवंबर, 2018 को दिव्यांगता क्षेत्र में सहयोग के लिए ऑस्ट्रेलिया सरकार के साथ एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए । यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबर्न के सहयोग के साथ समुदाय आधारित समावेशी विकास (सीबीआईडी) परियोजना लागू की जा रही है, जो उक्त एमओयू में उल्लिखित सहयोग क्षेत्र के अनुरूप है।
- 27 अप्रैल, 2022 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दिव्यांगता के क्षेत्र में सहयोग हेतु चिली सरकार के साथ द्विपक्षीय समझौता करने हेतु इस विभाग के प्रस्ताव को भी अनुमोदित किया है।
- दिव्यांग के क्षेत्र में सहयोग के हेतु दक्षिण अफ्रीका सरकार के साथ एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए जाने की प्रक्रिया चल रही है।
- दो नए राष्ट्रीय संस्थान- वर्ष 2015 में स्थापित भारतीय सांकेतिक भाषा अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र (आईएसएलआरटीसी) तथा वर्ष 2019 में स्थापित राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास संस्थान (एनआईएमएचआर)।
- आईएसएलआरटीसी ने आईएसएल शब्दकोश तैयार किया। 17.02.2021 को कुल 10000 शब्दों सहित शब्दकोश के तीसरे संस्करण का शुभारंभ किया गया।
- आईएसएलआरटीसी ने कक्षा I से XII की पाठ्यपुस्तकों को आईएसएल में (डिजिटल प्रारूप) बदलने के लिए 06.10.2020 को एनसीईआरटी के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया। (डिजिटल प्रारूप)। कक्षा I से V की एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तकों की आईएसएल ई-सामग्री 23 सितंबर, 2021 को लॉन्च की गई।
- आउटरीच/विस्तार केंद्रों के रूप में 13 नए समग्र क्षेत्रीय केंद्र स्थापित - छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, झारखंड, उत्तर प्रदेश, ओडिशा , सिक्किम, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, मेघालय और मणिपुर राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों प्रत्येक में एक-एक ।
- दिव्यांगजनों को सुचारू सेवा प्रदान करने के लिए 258.82 करोड़ रुपये की लागत से राष्ट्रीय संस्थानों और उनके क्षेत्रीय और समग्र क्षेत्रीय केंद्रों (सीआरसी) के विभिन्न भवनों का निर्माण किया गया।
- दिव्यांग खिलाडियों को अत्याधुनिक प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए ग्वालियर में दिव्यांग खेल केंद्र की स्थापना की गई जिसके 2022 में कार्यात्मक होने की संभावना है। इसी प्रकार का एक और केंद्र शिलांग में स्थापित करने का प्रस्ताव है।
- एलिम्को के आधुनिकीकरण के लिए केंद्र सरकार से 200.00 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता के साथ 338.04 करोड़ रुपये की लागत पर स्वीकृति दी गई।
- एलिम्को सहायक उत्पादन केंद्रों की स्थापना उज्जैन, मध्य प्रदेश में 13.94 करोड़ रूपये की लागत पर की गई।
- 55.00 करोड़ रुपये की लागत पर फरीदाबाद, हरियाणा में अत्याधुनिक एलिम्को सहायक उत्पादन केंद्र की स्थापना की जा रही है । केंद्र को जुलाई, 2022 के दौरान पूरा किया जाना है।
- 14 क्रॉस डिसेबिलिटी प्रारंभिक पहचान केंद्रों (सीडीईआईसी) (0-6 वर्ष) स्थापित किए गए हैं-दिल्ली, देहरादून , सिकंदराबाद , मुंबई, चेन्नई, कोलकाता और कटक में 7 राष्ट्रीय संस्थान तथा लखनऊ, सुंदरनगर, नेल्लोर, राजनंदगांव , कोझीकोड, पटना और भोपाल में 7 समेकित क्षेत्रीय केंद्र, जून 2021 में।
- सहायक यंत्रों और सहायक उपकरणों की खरीद/फिटिंग के लिए दिव्यांगजन को सहायता (एडिप) योजना को अप्रैल 2022 से संशोधित किया गया ताकि दिव्यांगजनों को समकालीन सहायक यंत्र और सहायक उपकरण प्रदान किए जा सके और 7 लाख रूपये प्रति लाभार्थी के दर से श्रवण बाधित बच्चों (0-5 वर्ष) हेतु तथा 5 से 18 वर्ष के बीच अधिगृहित (एक्वायर्ड) श्रवण ह्रास वाले बच्चों के मामले में 6.00 लाख रूपये से कॉकलियर इंप्लांट सर्जरी में सहायता की जा सके। 22.38 लाख दिव्यांगजनों को 1389.35 करोड़ रूपये के सहायक यंत्र और सहायक उपकरण वितरित किए गए तथा 4170 कॉकलियर इंप्लांट सर्जरी में सहायता प्रदान की गई।
- दीनदयाल दिव्यांगजन पुनर्वास योजना (डीडीआरएस) और जिला दिव्यांगजनता पुनर्वास केंद्र (डीडीआरसी) योजना को 1.4.2018 से संशोधित किया गया, जिसमें लागत मानदंडों को 2.5 गुना बढ़ाया गया। 2.83 लाख लाभार्थियों के लाभार्थी 561.00 करोड़ रुपये जारी किए गए।
- 2014-15 से दिव्यांग छात्रों के लिए प्री-मैट्रिक, पोस्ट-मैट्रिक, उच्च श्रेणी शिक्षा, राष्ट्रीय ओवरसीज और नि:शुल्क कोचिंग जैसी नई छात्रवृत्ति योजनाओं का शुभारंभ किया गया। 1.84 लाख दिव्यांग छात्रों के लिए 555.35 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति जारी की गई।
- सुगम्य भारत अभियान का शुभारंभ दिसंबर, 2015 में किया गया ताकि सार्वजनिक भवनों, परिवहन और आईसीटी पारिस्थितिकी प्रणाली में बाधामुक्त वातावरण का सृजन किया जा सके - 553.59 करोड़ रुपये की जारी करते हुए सुगम्य भारत अभियान के तहत इस विभाग से प्राप्त सहायता के माध्यम से राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के 585 भवनों तथा 1030 केंद्र सरकारी भवनों को बाधा मुक्त बनाया गया है।
- सिपडा और राष्ट्रीय कार्य योजना के तहत, 1.94 लाख दिव्यांगजनों को 204.68 करोड़ रुपये की लागत से कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया गया। ।
- 2016-17 में विशिष्ट दिव्यांगजन पहचान पत्र परियोजना का शुभारंभ किया गया ताकि दिव्यांगजनों के लिए एक राष्ट्रीय डेटाबेस का सृजन किया जा सके। 01.06.2022 की स्थिति के अनुसार, सभी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के 716 जिलों में 73.89 लाख विशिष्ट दिव्यांगता आईडी कार्ड जनरेट किए गए हैं।
- वर्ष 2019 से 5 दिव्य कला शक्ति कार्यक्रमों का आयोजन किया गया (राष्ट्रीय स्तर पर 02 और क्षेत्रीय स्तर पर 03) ताकि प्रदर्शन और ललित कला में दिव्यांग बच्चे और युवा अपनी आंतरिक क्षमता को प्रदर्शित कर सकें।
- टोक्यो में आयोजित 2020 पैरालिंपिक्स के प्रतिभागियों को विभाग द्वारा सम्मानित किया गया।
- विभाग और सीसीपीडी कार्यालय ने आरपीडब्ल्यूडी अधिनियम, 2016 के बारे में, दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण और समावेशन के लिए भारत सरकार की विभिन्न पहलों और योजनाओं और कार्यक्रमों के बारे में जागरूकता सृजन हेतु केवडिया, गुजरात में 4 से 5 मार्च, 2022 को दो दिवसीय संवेदीकरण कार्यशाला का संयुक्त रूप से आयोजन किया।

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