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डॉ. अभिलाक्ष लिखी, अपर सचिव, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय का वैकुंठ मेहता राष्ट्रीय सहकारी प्रबंधन संस्थान, पुणे का दौरा

पुणे, अगस्त (हड़पसर एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क)
    डॉ. अभिलाक्ष लिखी, अपर सचिव, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय, (कृषि और किसान कल्याण विभाग) ने राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन और शहद मिशन (एनबीएचएम) के तहत राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड (एनबीबी) द्वारा पुणे में आयोजित वैकुंठ मेहता राष्ट्रीय सहकारी प्रबंधन संस्थान (वीएएमएनआईसीओएम)में शहद की निर्यात संभाव्यता को मजबूत करने पर कार्यशाला की अध्यक्षता की।
मधुमक्खी पालन एक कृषि आधारित कार्यकलाप है जो ग्रामीण क्षेत्र में किसानों/ भूमिहीन मजदूरों द्वारा की जा रही एकीकृत कृषि पद्धति है। मधुमक्खी पालन ग्रामीण आबादी के आय सृजन और उनके पोषाहार का संपूरक है। यह तेजी से महसूस किया जा रहा है कि स्थायी और पर्यावरण अनुकूल कृषि को प्रोत्साहित करने और फसल उत्पादकता बढ़ाने के लिए मधुमक्खियां कम खर्चीली इनपुट हो सकती हैं। मधुमक्खी पालन से कई क्षेत्रों जैसेकि व्यापार, प्रसंस्करण, निर्यात, ग्रामीण शिल्पकार आदि को लाभ होता है और रोजगार सृजन,शहद और अन्य छत्ता उत्पादों से आय में वृद्धि, फसल उत्पादन की वृद्धि से आयके जरिएबहु माध्यमों से आय होती है एवंपर्यावरण की गुणवत्ता बनाए रखने, पारिस्थितिकी तंत्र एवं वनस्पति विविधता आदि को बनाए रखने का लाभ होता है। बुनियादी 4 इनपुट्स :, भूमि, श्रम, पूंजी और प्रबंधन सहित बीज, उर्वरक और कीटनाशक, पानी, मशीनरी आदि के अतिरिक्त मधुमक्खी/ मधुमक्खी पालन को कृषि के 5वें इनपुट के रूप में स्वीकृत किया गया है जो अन्य चार इनपुट की प्रभावकारिता को नियंत्रित करता है। वर्तमान में राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड में लगभग 19.00 लाख मधुमक्खी कॉलोनियां पंजीकृत हैं। भारत लगभग 1,33,200 मीट्रिक टन शहद का उत्पादन कर रहा है (2021-22 दूसरा अग्रिम आकलन)।
शहद के निर्यात में,विशेष रूप से कोविड-19 महामारी में बहुत अधिक संभावनाएं हैं क्योंकि प्रभावी प्रतिरक्षा बूस्टर और चीनी के स्वस्थ विकल्प के रूप में विश्व स्तर पर इसकी खपत में वृद्धि हुई है। भारत शहद निर्यातक देशों में से एक है। वर्ष 2021-22 के दौरान देश ने दुनिया को1221.17 करोड़ रू. मूल्य के 74,413 मीट्रिक टन शहद का निर्यात किया है। भारत में 50% से अधिक शहद उत्पादन अन्य देशों को निर्यात किया जा रहा है। भारत लगभग 83 देशों को शहद निर्यात करता है। भारतीय शहद के प्रमुख बाजार यूएसए, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, बांग्लादेश, कनाडा आदि हैं। सरसों शहद, नीलगिरी शहद, लीची शहद, सूरजमुखी शहद, पोंगामिया शहद, बहु-वनस्पति हिमालय शहद, बबूल शहद और जंगली वनस्पति शहद भारत से निर्यात की जा रही शहद की कुछ प्रमुख किस्में हैं। भारत के 17 राज्य दुनिया भर के विभिन्न देशों को प्राकृतिक शहद का निर्यात कर रहे हैं। दिल्ली भारत का सबसे बड़ा शहद निर्यातक राज्य है क्योंकि इस राज्य से अधिकतम लदान किया गया है जिसके बाद राजस्थान, महाराष्ट्र, यूपी और पंजाब का स्थान है। शहद के आकर्षक और मूल्य वर्धित उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में और भी बेहतर मूल्य प्राप्त होता हैं। भारतीय निर्यातक कोडेक्स एलिमेंटेरियस के मानकों या आयातक देश के मानक को अपनाते हैं। भारत से निर्यात किए जाने वाले उत्पादों की गुणवत्ता की निगरानी सरकार द्वारा वाणिज्य विभाग एवं वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के माध्यम से भारतीय निर्यात निरीक्षण परिषद (ईआईसी) अधिनियम के तहत की जाती है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत वाणिज्य विभाग ने खाद्य व्यापार, आयात और निर्यात के लिए व्यापार नीति तैयार की है। कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीर्ईडीए) शहद सहित कृषि खाद्य उत्पादों के निर्यातकों को विभिन्न प्रोत्साहन और वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
मधुमक्खी पालन के महत्व को ध्यान में रखते हुए, आत्म निर्भर भारतघोषणा के तहतभारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन और शहद मिशन (एनबीएचएम) नामक एक नई केंद्रीय क्षेत्र की योजना स्वीकृत की गई है जिसके लिए500.00 करोड़रू. आवंटित किए गए हैं ताकि वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन के समग्र संवर्धन और विकास किया जा सकेतथा "मीठी क्रांति" का लक्ष्य प्राप्त किया जा सके। एनबीएचएम को राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड (एनबीबी) के माध्यम से कार्यान्वित किया जाता है।इस योजना में तीन लघु मिशन हैं- लघु मिशन- I: वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन और मधुमक्खी छत्तों के उत्पादों के गुणवत्तापूर्ण उत्पादन को बढ़ावा देना;लघु मिशन-II मधुमक्खी के छत्तों के उत्पादों के उत्पदानोपंरात प्रबंधन के लिए अवसंरचनागत सुविधाएं; और लघु मिशन- III: मधुमक्खी पालन में अनुसंधान और प्रौद्योगिकी निर्माण पर ध्यान केंद्रित करना।
एनडीडीबी, आणंद, गुजरात में एनबीएचएमके तहत तीन विश्व स्तरीय अत्याधुनिक शहद परीक्षण प्रयोगशालाएँ स्थापित की गई हैं। इस लैब को एनएबीएल द्वारा मान्यता दी गई है और शहद के नमूनों का परीक्षण शुरू कर दिया है, आईएआरआई, पूसा, नई दिल्ली में प्रयोगशालाओं का काम संपन्न हो गया है और भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान (आईआईएचआर), बेंगलुरु, कर्नाटक की स्थापना का कार्य किया जा रहा है। राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन और शहद मिशन (एनबीएचएम) के तहत अरुणाचल प्रदेश (1), बिहार (1), हरियाणा (1), गुजरात (2), कर्नाटक (4), मध्य प्रदेश (2), महाराष्ट्र (1), राजस्थान (1), जम्मू और कश्मीर (4), केरल (1), ओडिशा (1), उत्तराखंड (1), उत्तर प्रदेश (2) पश्चिम बंगाल (2) और हिमाचल प्रदेश (1)राज्यों में 25 मिनी शहद परीक्षण प्रयोगशालाओं को मंजूरी दी गई है। 25 प्रयोगशालाओं में से, जम्मू-कश्मीर (3), कर्नाटक (1), उत्तर प्रदेश (1) और महाराष्ट्र (1) में 6 प्रयोगशालाएं स्थापित हैं और कार्य कर रहे हैं। ऑनलाइन पंजीकरण और शहद एवं अन्य मधुमक्खी उत्पादों के लिए ब्लॉकचैन/ ट्रेसेबिलिटी सिस्टम विकसित करने के लिए मधुक्रांति पोर्टल शुरू किया गया है। लगभग 12,699 मधुमक्खी पालकों/अन्य हितधारकों की19.34 लाख मधुमक्खी कॉलोनियां पंजीकृत हैं। आज की तारीख तक एनबीएचएम के तहत कुल 102 परियोजनाओंके लिए 133.31 करोड़ रुपये की सहायतामंजूर की गई है।"10,000 एफपीओ के गठन" की स्कीम के अंतर्गत, एनबीएचएम के तहत गतिविधियों के कार्यान्वयन के लिए मधुमक्खी पालकों/शहद उत्पादकों के 100 एफपीओ ट्राइफेड (14), नेफेड (60) और एनडीडीबी (26) को आवंटित किए गए हैं। इस प्रकार, एनबीबी को आवंटित कुल 105 एफपीओ में से आज की तारीख तक मधुमक्खी पालकों/शहद उत्पादकों के 77 एफपीओ पंजीकृत/गठित किए जा चुके हैं। ऊंचाई वाले क्षेत्रों के शहद के उत्पादन और संवर्धन पर भी विशेष बल दिया जा रहा है। कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने शहद और अन्य मधुमक्खी उत्पादों के ट्रेसेबिलिटी रिकॉर्ड को बनाए रखने के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल अर्थात "मधुक्रांति पोर्टल" भी विकसित किया है।
यह जानकारी पुणे रक्षा विभाग के जनसंपर्क अधिकारी श्री महेश अय्यंगार द्वारा दी गई है।





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