हड़पसर, अक्टूबर (हड़पसर एक्सप्रेस न्यूज़ नेटवर्क)
नए व्यक्तिगत बिजली उपभोक्ताओं को सेवा कनेक्शन शुल्क के माध्यम से महावितरण द्वारा आर्थिक शोषण किया जा रहा है यह तस्वीर पुणे परिमंडल में दिखाई दे रही है। वास्तव में सीआरए अतिरिक्त शुल्क का भुगतान करके जबकि महावितरण संबंधित ग्राहक को आवश्यक सामग्री के साथ बिजली मीटर उपलब्ध कराने के लिए बाध्य है। हालांकि, महावितरण बिजली मीटर के अलावा ग्राहक को किसी भी प्रकार की सामग्री उपलब्ध नहीं कराता है। बिजली मीटर प्राप्त करने के बाद पुनः उसी ग्राहक को अपनी ही जेब से पैसा खर्च करके सामग्री लानी पड़ रही है, यह वास्तविकता है। इस प्रकार का महावितरण को जवाब देने का समय आ गया है, जो ग्राहकों को घोर धोखा दे रहा है?
सीआरए के नियम साल 2003 से शुरू हुए थे। उसमें और साथ ही उन परिपत्रों में जिन्हें उसके बाद बार-बार संशोधित किया गया है यदि ग्राहक स्वयं विद्युत ठेकेदार के पास से काम करवाकर ले रहा है तो सीआरए की आवश्यकता नहीं है, वह कार्य केवल 1.3% पर्यवेक्षण शुल्क देकर किया जा सकता है, खास बात यह है कि ऐसा जिक्र किया गया है।
कई बार संबंधित ग्राहकों द्वारा इस बारे में आवाज उठाने के बाद सीआरए को भी पूरी तरह से बंद कर दिया गया था, लेकिन येनकेन प्रकार से न केवल राजस्व बढ़ाना चाहिए व वरिष्ठ कार्यालय में आपकी जय-जयकार होनी चाहिए। साथ ही, आपको पदोन्नत होकर मनचाहे स्थान पर स्थानांतरित कर देना चाहिए। इस उद्देश्य के लिए कुछ प्राधिकरण लोकतांत्रिक और मानवीय नज़रिया को झुकाकर शर्मिंदा करते हुए सीआरए की फिर से नये से सख्ती कर रहे हैं। यह पुणे शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ परिमंडलों में भी निदर्शन में आया गया है।
इस संबंध में शाखा कार्यालय से क्षेत्रीय निदेशक कार्यालय में पूछताछ करने पर संबंधित अधिकारी सिर्फ हवा में तीर मारते हैं, ऐसी जानकारी मिली है। संबंधित उद्योगपतियों के माध्यम से महावितरण के बहुचर्चित निजीकरण के लिए प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से ऐसे अधिकारी समर्थन कर रहे हैं या नहीं..? इस तरह की आशंका बिजली उपभोक्ता व्यक्त कर रहे हैं। महावितरण के पास रखरखाव, मरम्मत के लिए के लिए भी पर्याप्त सामग्री उपलब्ध नहीं रहती है हालांकि, नए बिजली उपभोक्ताओं को सीआरए का भुगतान करने के लिए सामग्री दिए बिना बिजली मीटर लगवाए गए हैं। उनकी बिजली के भुगतान (बिल) भी चालू हो गए हैं। इसका मतलब यानी यह है कि उपभोक्ताओं को गुमराह करने करते हुए महावितरण अपनी जेब भरने का काम कर रह रहा है। इस संबंध में कुछ गंभीर मामले दर्ज किए गए हैं।
यदि महावितरण ने सामग्री उपलब्ध कराए बिना संबंधित ग्राहकों से सीआरए अधिभार वसूल किया है, तो वह वास्तव में कहां गया? इसका उत्तर महावितरण के पास नहीं है। बेशक, यह मामला बहुत गंभीर है और इसकी गहन जांच की जरूरत है।
तो दूसरी ओर वर्षों से उपयोग में आ रहे महावितरण के ट्रांसफार्मर ओवरफ्लो होते हुए भी उसकी क्षमता बढ़ोतरी करने की ओर अनदेखा करके नए सामान्य बिजली उपभोक्ताओं को आईटी लोड के नाम पर आवश्यकता से अधिक क्षमता के ट्रांसफॉर्मर बनाने में लाखों रुपये खर्च करने की बात कह रहे हैं। यह एक तरह से अनुचित है, इसीलिए सीआरए के दमनकारी आदेश के साथ-साथ आईटी लोड ने आम बिजली उपभोक्ताओं में गुस्से की लहर पैदा कर दी है।
यदि उपभोक्ता महावितरण द्वारा विधिवत अनुमोदित किए गए नियमों के अनुसार 1.3% पर्यवेक्षण शुल्क का भुगतान करेंगे, साथ ही आवश्यक सामग्री खुद के खर्चे पर खरीदकर विद्युत ठेकेदार से कार्य पूर्ण कराया जायेगा तब महावितरण को सीआरए का भुगतान करना पूरी तरह से बंद कर देना चाहिए अन्यथा ग्राहकों ने वित्तीय धोखाधड़ी करनेवाले महावितरण सहित संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अदालत जाने की चेतावनी दी है।
नए व्यक्तिगत बिजली उपभोक्ताओं को सेवा कनेक्शन शुल्क के माध्यम से महावितरण द्वारा आर्थिक शोषण किया जा रहा है यह तस्वीर पुणे परिमंडल में दिखाई दे रही है। वास्तव में सीआरए अतिरिक्त शुल्क का भुगतान करके जबकि महावितरण संबंधित ग्राहक को आवश्यक सामग्री के साथ बिजली मीटर उपलब्ध कराने के लिए बाध्य है। हालांकि, महावितरण बिजली मीटर के अलावा ग्राहक को किसी भी प्रकार की सामग्री उपलब्ध नहीं कराता है। बिजली मीटर प्राप्त करने के बाद पुनः उसी ग्राहक को अपनी ही जेब से पैसा खर्च करके सामग्री लानी पड़ रही है, यह वास्तविकता है। इस प्रकार का महावितरण को जवाब देने का समय आ गया है, जो ग्राहकों को घोर धोखा दे रहा है?
सीआरए के नियम साल 2003 से शुरू हुए थे। उसमें और साथ ही उन परिपत्रों में जिन्हें उसके बाद बार-बार संशोधित किया गया है यदि ग्राहक स्वयं विद्युत ठेकेदार के पास से काम करवाकर ले रहा है तो सीआरए की आवश्यकता नहीं है, वह कार्य केवल 1.3% पर्यवेक्षण शुल्क देकर किया जा सकता है, खास बात यह है कि ऐसा जिक्र किया गया है।
कई बार संबंधित ग्राहकों द्वारा इस बारे में आवाज उठाने के बाद सीआरए को भी पूरी तरह से बंद कर दिया गया था, लेकिन येनकेन प्रकार से न केवल राजस्व बढ़ाना चाहिए व वरिष्ठ कार्यालय में आपकी जय-जयकार होनी चाहिए। साथ ही, आपको पदोन्नत होकर मनचाहे स्थान पर स्थानांतरित कर देना चाहिए। इस उद्देश्य के लिए कुछ प्राधिकरण लोकतांत्रिक और मानवीय नज़रिया को झुकाकर शर्मिंदा करते हुए सीआरए की फिर से नये से सख्ती कर रहे हैं। यह पुणे शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ परिमंडलों में भी निदर्शन में आया गया है।
इस संबंध में शाखा कार्यालय से क्षेत्रीय निदेशक कार्यालय में पूछताछ करने पर संबंधित अधिकारी सिर्फ हवा में तीर मारते हैं, ऐसी जानकारी मिली है। संबंधित उद्योगपतियों के माध्यम से महावितरण के बहुचर्चित निजीकरण के लिए प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से ऐसे अधिकारी समर्थन कर रहे हैं या नहीं..? इस तरह की आशंका बिजली उपभोक्ता व्यक्त कर रहे हैं। महावितरण के पास रखरखाव, मरम्मत के लिए के लिए भी पर्याप्त सामग्री उपलब्ध नहीं रहती है हालांकि, नए बिजली उपभोक्ताओं को सीआरए का भुगतान करने के लिए सामग्री दिए बिना बिजली मीटर लगवाए गए हैं। उनकी बिजली के भुगतान (बिल) भी चालू हो गए हैं। इसका मतलब यानी यह है कि उपभोक्ताओं को गुमराह करने करते हुए महावितरण अपनी जेब भरने का काम कर रह रहा है। इस संबंध में कुछ गंभीर मामले दर्ज किए गए हैं।
यदि महावितरण ने सामग्री उपलब्ध कराए बिना संबंधित ग्राहकों से सीआरए अधिभार वसूल किया है, तो वह वास्तव में कहां गया? इसका उत्तर महावितरण के पास नहीं है। बेशक, यह मामला बहुत गंभीर है और इसकी गहन जांच की जरूरत है।
तो दूसरी ओर वर्षों से उपयोग में आ रहे महावितरण के ट्रांसफार्मर ओवरफ्लो होते हुए भी उसकी क्षमता बढ़ोतरी करने की ओर अनदेखा करके नए सामान्य बिजली उपभोक्ताओं को आईटी लोड के नाम पर आवश्यकता से अधिक क्षमता के ट्रांसफॉर्मर बनाने में लाखों रुपये खर्च करने की बात कह रहे हैं। यह एक तरह से अनुचित है, इसीलिए सीआरए के दमनकारी आदेश के साथ-साथ आईटी लोड ने आम बिजली उपभोक्ताओं में गुस्से की लहर पैदा कर दी है।
यदि उपभोक्ता महावितरण द्वारा विधिवत अनुमोदित किए गए नियमों के अनुसार 1.3% पर्यवेक्षण शुल्क का भुगतान करेंगे, साथ ही आवश्यक सामग्री खुद के खर्चे पर खरीदकर विद्युत ठेकेदार से कार्य पूर्ण कराया जायेगा तब महावितरण को सीआरए का भुगतान करना पूरी तरह से बंद कर देना चाहिए अन्यथा ग्राहकों ने वित्तीय धोखाधड़ी करनेवाले महावितरण सहित संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अदालत जाने की चेतावनी दी है।
पहले जो कोटेशन औसतन 2250/- रुपये हुआ करता था, वही अब लगभग 12000/- रुपये से ऊपर चला गया है, ऊपर से ग्राहक स्वयं आवश्यक सामग्री खुद के पैसों की लागत पर ला रहा है उसका और अन्य सीमांत खर्च अलग हैं। आज आम उपभोक्ता पहले से ही महंगाई से तंग आ चुके हैं। अगर महावितरण सटोरियों को मुंह बंद करके मार रहा है तो ग्राहक को क्या करना चाहिए...? यह भी एक सवाल है।
इस पृष्ठभूमि में वर्ष 2003 से कितने ग्राहकों से सी.आर.ए. की अतिरिक्त राशि बरामद कर ली गई है? क्या उन ग्राहकों को आवश्यक सामग्री दी गई है या कैसे ? साथ ही उस काम को पूरा करने के लिए नियुक्त एजेंसियों को महावितरण ने काम के एवज में जो बिल अदा किए गए हैं, उसका महावितरण से स्पष्टीकरण की अपेक्षा है।

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