उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि जबरन धर्मान्तरण "बहुत गंभीर" मुद्दा है। न्यायालय ने केंद्र से इस संबंध में ठोस कदम उठाने और इसे रोकने के लिए किए जा रहे उपायों के बारे में एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति एम आर शाह और हिमा कोहली की पीठ ने कहा कि अगर जबरन धर्मांतरण नहीं रोका गया तो बहुत कठिन स्थिति पैदा हो सकती है। न्यायालय ने कहा है कि धर्म परिवर्तन से नागरिकों की अंतरात्मा की स्वतंत्रता के साथ-साथ देश की सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है। मामले की अगली सुनवाई 28 नवम्बर को होगी। उच्चतम न्यायालय ने यह व्यवस्था अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय की उस याचिका पर सुनवाई के दौरान दी है, जिसमें जबरन धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने का निर्देश देने की मांग की गई थी।

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