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कविता

श्री सत्येंद्र सिंह
पुणे, महाराष्ट्र

मैं कविता नहीं करता
बात करता हूँ,
अपने आपसे /आपसे
और उससे।
मैं कविता नहीं करता
याद करता हूँ/बचपन की
जवानी की/
मित्रों की/शत्रुओं की
माता की/पिता की 
और भाई-बहनों की।
मैं कविता नहीं करता
अपने आपको देखता हूँ
कब किससे/किसने मुझसे
प्यार किया।
कब मुझे प्रभावित किया
अहंकार ने/क्रोध ने/लालच ने
और मैं कब गिरा/कब खड़ा हुआ।
मैं कविता नहीं करता
सपने देखता हूँ,
बढ़ते बच्चों का/
उनकी उन्नति/प्रगति का,
उनके आचार विचार का
उनके खिलखिलाते चेहरों का
और देश की छवि का।
जी हाँ
मैं कविता नहीं करता।

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