महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के विधि विभाग द्वारा बी.ए.एल.एल.बी. (ऑनर्स) प्रारंभ करने हेतु दीक्षारंभ एवं ‘‘अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस‘‘ के उपलक्ष्य में ‘‘भारतीय संविधान के परिप्रेक्ष्य में मानवाधिकार के सुरक्षा की गारंटी‘‘ विषय पर आयोजित संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल ने कहा कि भारतीय संविधान मानवाधिकार की दृष्टि से दुनिया के लिए एक आदर्श है। हमारा संविधान मनुष्य मात्र के अधिकारों की बात करता है, यह पूरी दुनिया में अनूठा है। उन्होंने कहा कि भारत लोकतंत्र की जननी है.।संविधान में मनुष्य के मौलिक अधिकारों की रक्षा की व्यवस्था दी गयी है और यह मूल्यों के अधीन चलता है। उन्होंने विधि के पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों से अपील की कि वे संविधान के अंतर्गत नैतिक मूल्यों के माध्यम से दुनिया को बेहतर बनाने में अपनी भूमिका का निर्वहन करें।
09 दिसंबर को कस्तूरबा सभागार में सम्मिश्र पद्धति से आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उच्चतम न्यायालय की इ-समिति के उपाध्यक्ष न्यायमूर्ति आर. सी. चौहान ने कहा कि मानवाधिकारों से जुड़े अनेक प्रावधानों को संविधान में शामिल किया गया है। हर भारतीय नागरिकों के अधिकारों की रक्षा की गारंटी भी संविधान देता है। उन्होंने मानवाधिकार के विभिन्न पहलुओं पर भी विस्तार से चर्चा की। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य ज्ञानेश्वर मुले ने अपने वक्तव्य में कहा कि मानव संस्कृति के प्रारंभ से ही मानवाधिकार की चर्चा होती आ रही है। 20 वीं सदी में इसे मानवाधिकार नाम दिया गया है। मानवाधिकार से जुड़े न्याय, स्वतंत्रता और बंधुता आदि मूल्यों को संविधान में भी स्थान दिया गया है।
कार्यक्रम के दौरान प्रति कुलपति प्रो. हनुमानप्रसाद शुक्ल ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय ने हिंदी माध्यम से विधि की पढ़ाई का सुअवसर प्रदान किया है।
प्रति कुलपति प्रो. चंद्रकांत रागीट ने विद्यार्थियों से लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित कर अपने पैरों पर खड़े होने का आहवान किया। स्वागत वक्तव्य विधि विद्यापीठ के अधिष्ठाता प्रो. चतुर्भुज नाथ तिवारी ने दिया। कार्यक्रम का प्रारंभ दीप दीपन, कुलगीत एवं सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया. शोधार्थी गोपाल साहू ने भारत वंदना प्रस्तुत की।
प्रति कुलपति प्रो. चंद्रकांत रागीट ने विद्यार्थियों से लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित कर अपने पैरों पर खड़े होने का आहवान किया। स्वागत वक्तव्य विधि विद्यापीठ के अधिष्ठाता प्रो. चतुर्भुज नाथ तिवारी ने दिया। कार्यक्रम का प्रारंभ दीप दीपन, कुलगीत एवं सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया. शोधार्थी गोपाल साहू ने भारत वंदना प्रस्तुत की।
कार्यक्रम का संचालन राजनीति विभाग के अतिथि अध्यापक डॉ. विजय कुमार सिंह ने किया तथा शिक्षा विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. धीरज मसराम ने आभार ज्ञापित किया। इस अवसर पर अध्यापक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी बड़ी संख्या में आभासी माध्यम से तथा प्रत्यक्षत: उपस्थित रहे।


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