पुणे, अप्रैल (विमाका)
कृषि आयुक्त सुनील चव्हाण ने अपील की है कि आगामी खरीफ सीजन के लिए राज्य में उर्वरकों का प्रचुर भंडार उपलब्ध है और किसान मिट्टी परीक्षण रिपोर्ट के अनुसार संतुलित उर्वरकों का प्रयोग करें।
वर्तमान में राज्य में 5 लाख 33 हजार मीट्रिक टन यूरिया, 2 लाख 15 हजार मे.टन डीएपी, 29 हजार मे.टन पोटाश, 8 लाख 39 हजार मे.टन मिश्रित उर्वरक और 5 लाख 15 हजार मे.टन सुपर फास्फेट कुल 21 लाख 31 हजार मे.टन उर्वरक स्टॉक उपलब्ध है।
इस वर्ष एक अप्रैल 2023 की स्थिति के अनुसार यह उर्वरक स्टॉक राज्य की खरीफ सीजन की आवश्यकता का लगभग 50 प्रतिशत है। वहीं, खरीफ सीजन में राज्य को 43 लाख 13 हजार मीट्रिक टन उर्वरक स्टॉक उपलब्ध होगा। मानसून की बारिश के बाद ही किसानों की ओर से रासायनिक खाद की मांग बढ़ जाती है, इसलिए उर्वरकों की योजना अप्रैल से शुरू की गई है और कृषि विभाग राज्य में प्रचुर मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए सतर्क है।
किसान अपनी फसल में उर्वरक की मात्रा मिट्टी परीक्षण रिपोर्ट के अनुसार ही प्रयोग करें। अति-उर्वरक से न केवल हमारी लागत बढ़ती है बल्कि सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी के कारण फसल की उपज में भी कमी आती है। यदि आवश्यक उर्वरक उपलब्ध नहीं होता है तो भी उपज और गुणवत्ता में गिरावट आती है। रासायनिक खाद के साथ-साथ सड़ा हुआ गोबर, कम्पोस्ट, जैविक खाद (बायोफर्टिलाइजर), नैनो यूरिया का भी आवश्यकतानुसार प्रयोग करना चाहिए।
किसानों की मदद के लिए ‘कृषि ऐप’
कृषि विभाग ने कृषि विज्ञान केंद्र बारामती के सहयोग से एक ‘कृषि ऐप’ विकसित किया है। इस ऐप की मदद से किसान अपने जिले की मिट्टी परीक्षण रिपोर्ट के अनुसार प्रत्येक फसल के लिए विभिन्न उर्वरकों की मात्रा और लागत को समझ सकते हैं। यह ऐप आपके तालुक में प्रत्येक कृषि सेवा केंद्र में, कौन से उर्वरक उपलब्ध हैं, इसकी जानकारी भी प्रदान करता है। इससे खाद खरीदना आसान हो जाता है। किसानों को इस कृषि ऐप का उपयोग करना चाहिए।
केंद्र सरकार ने ‘पीएम प्रणाम’ योजना शुरू की है। चूंकि राज्य में किसान मिट्टी परीक्षण के अनुसार उर्वरकों का उपयोग करते हैं, इसलिए उर्वरक सब्सिडी की कुल राशि में बचत होगी। यह जानकारी कृषि आयुक्त श्री सुनील चव्हाण द्वारा दी गई है।
कृषि आयुक्त सुनील चव्हाण ने अपील की है कि आगामी खरीफ सीजन के लिए राज्य में उर्वरकों का प्रचुर भंडार उपलब्ध है और किसान मिट्टी परीक्षण रिपोर्ट के अनुसार संतुलित उर्वरकों का प्रयोग करें।
वर्तमान में राज्य में 5 लाख 33 हजार मीट्रिक टन यूरिया, 2 लाख 15 हजार मे.टन डीएपी, 29 हजार मे.टन पोटाश, 8 लाख 39 हजार मे.टन मिश्रित उर्वरक और 5 लाख 15 हजार मे.टन सुपर फास्फेट कुल 21 लाख 31 हजार मे.टन उर्वरक स्टॉक उपलब्ध है।
इस वर्ष एक अप्रैल 2023 की स्थिति के अनुसार यह उर्वरक स्टॉक राज्य की खरीफ सीजन की आवश्यकता का लगभग 50 प्रतिशत है। वहीं, खरीफ सीजन में राज्य को 43 लाख 13 हजार मीट्रिक टन उर्वरक स्टॉक उपलब्ध होगा। मानसून की बारिश के बाद ही किसानों की ओर से रासायनिक खाद की मांग बढ़ जाती है, इसलिए उर्वरकों की योजना अप्रैल से शुरू की गई है और कृषि विभाग राज्य में प्रचुर मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए सतर्क है।
किसान अपनी फसल में उर्वरक की मात्रा मिट्टी परीक्षण रिपोर्ट के अनुसार ही प्रयोग करें। अति-उर्वरक से न केवल हमारी लागत बढ़ती है बल्कि सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी के कारण फसल की उपज में भी कमी आती है। यदि आवश्यक उर्वरक उपलब्ध नहीं होता है तो भी उपज और गुणवत्ता में गिरावट आती है। रासायनिक खाद के साथ-साथ सड़ा हुआ गोबर, कम्पोस्ट, जैविक खाद (बायोफर्टिलाइजर), नैनो यूरिया का भी आवश्यकतानुसार प्रयोग करना चाहिए।
किसानों की मदद के लिए ‘कृषि ऐप’
कृषि विभाग ने कृषि विज्ञान केंद्र बारामती के सहयोग से एक ‘कृषि ऐप’ विकसित किया है। इस ऐप की मदद से किसान अपने जिले की मिट्टी परीक्षण रिपोर्ट के अनुसार प्रत्येक फसल के लिए विभिन्न उर्वरकों की मात्रा और लागत को समझ सकते हैं। यह ऐप आपके तालुक में प्रत्येक कृषि सेवा केंद्र में, कौन से उर्वरक उपलब्ध हैं, इसकी जानकारी भी प्रदान करता है। इससे खाद खरीदना आसान हो जाता है। किसानों को इस कृषि ऐप का उपयोग करना चाहिए।
केंद्र सरकार ने ‘पीएम प्रणाम’ योजना शुरू की है। चूंकि राज्य में किसान मिट्टी परीक्षण के अनुसार उर्वरकों का उपयोग करते हैं, इसलिए उर्वरक सब्सिडी की कुल राशि में बचत होगी। यह जानकारी कृषि आयुक्त श्री सुनील चव्हाण द्वारा दी गई है।

0 टिप्पणियाँ