मुंबई, जुलाई (महासंवाद)
भारी बारिश, बाढ़, भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं में नागरिकों की जान बचाना और उनका पुनर्वास करना सरकार का पहला कर्तव्य है। बिना नियम बनाये, समय पड़ने पर ‘आऊट ऑफ द वे’ जाकर काम करना पड़ेगा, तब उसका निर्णय जिलाधिकारी को लेना होगा। जनहित के हर कार्य में सरकार आपके साथ है। आपदा राहत, बाढ़ राहत की धनराशि में कमी नहीं आने दी जाएगी। यह आश्वासन उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने राज्यस्तरीय विभागीय आयुक्तों और जिलाधिकारी की बैठक में दिया। साथ ही उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने यह भी निर्देश दिया कि राज्य के सभी जिला कलेक्टर बाढ़ की स्थिति को लेकर सतर्क रहकर काम करें।
उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने वीडियो संचार प्रणाली के माध्यम से विभागीय आयुक्तों और जिला कलेक्टरों से राज्य में भारी बारिश, बाढ़ और सूखे की स्थिति की समीक्षा की। इस अवसर पर यहां आपदा प्रबंधन, राहत एवं पुनर्वास मंत्री अनिल पाटिल, मुख्य सचिव मनोज सौनिक, वित्त विभाग के अपर मुख्य मुख्य सचिव नितिन करीर, राहत एवं पुनर्वास विभाग के प्रधान सचिव असीम गुप्ता, आपदा नियंत्रण कक्ष के संचालक आप्पासो धुलाज, आपदा नियंत्रण कक्ष के उपसचिव डॉ. श्रीनिवास कोतवाल, विधायक संजय कुटे आदि उपस्थित थे।
आपदा राहत के लिए धनराशि की कमी नहीं होने दी जाएगी
यदि बाढ़ के कारण गाँव के घरों और सड़कों पर गाद हो तो उसे साफ करने के लिए ‘राज्य आपदा प्रतिक्रिया सहायता कोष’ और जिला परिषद की निधि का उपयोग किया जाना चाहिए। प्रत्येक जिले को दी गई 30 लाख रुपये की अग्रिम धनराशि का उपयोग किया जाए। उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने निधि की कमी होने पर तुरंत निधि की मांग करने का सुझाव दिया।
नदियों एवं नालों के प्राकृतिक प्रवाह को जारी रखने के लिए नदियों एवं नालों से अतिक्रमण हटाया जाए
उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने आगे कहा कि राज्य के कई हिस्सों में नदियों, नालों और नहरों पर अतिक्रमण हुआ है। नदियों और नालों के प्राकृतिक प्रवाह में रुकावट के कारण बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होती है। ऐसे स्थानों पर नदी एवं नहर पर हुए अतिक्रमण हटाने का कार्य जिलाधिकारी प्राथमिकता एवं सख्त रुख के साथ करें। नदियों एवं नहरों से गाद निकासी के लिए ठेकेदारों के उपकरण एवं प्रशासन की ओर से डीजल की व्यवस्था करायी जाये। यह अभियान 15 सितंबर तक पूरा हो जाना चाहिए। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखा जाए कि गाद निकालने के बाद वह वापस नदी या नाले में न जाए।
भूस्खलन संभावित क्षेत्रों के खतरनाक गांवों का सर्वेक्षण करके पुनर्वास की ठोस योजना प्रस्तुत की जाए
भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में इरशालवाड़ी, तलिया जैसी घटनाएं नहीं होनी चाहिए। इस उद्देश्य से पहाड़ी और दूरदराज के क्षेत्रों में भूस्खलन आदिवासी टांडे, पाडे का दूसरी तरफ पुनर्वास करने के लिए जिला कलेक्टर ने खतरनाक गांवों का सर्वेक्षण के माध्यम से जानकारी एकत्र करनी चाहिए। पुनर्वास हेतु वैकल्पिक स्थान की व्यवस्था, ग्रामीणों की आजीविका के सभी पहलुओं पर विचार करते हुए एक योजना तैयार करने का भी सुझाव उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने दिया।
जिलाधिकारियों को अतिवृष्टि एवं बाढ़ पीड़ितों को राहत एवं पुनर्वास के लिए युद्धस्तर पर कार्य करने के दिये गये निर्देश
बाढ़ की स्थिति के दौरान खतरनाक स्थिति वाले क्षेत्रों के निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाना चाहिए। बाढ़ की स्थिति से मृत्यु होनेवालों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की राहत तत्काल दी जाए। कृषि फसलों के नुकसान का पंचनामा तत्काल शुरू किया जाए। जिन स्थानों पर कृषि भूमि को खुर्द-बुर्द किया गया है, वहां का पंचनामा भी तुरंत शुरू किया जाए। बंजर भूमि को पुनः कृषि योग्य बनाने में आने वाली लागत की एक योजना तैयार की जानी चाहिए।
साथ ही अगर दोबारा बुआई की जरूरत हो तो इसकी योजना बना लेनी चाहिए। प्रभावित व्यक्तियों को सस्ते अनाज की दुकानों से अनाज का वितरण उसी दिन होगा, इसलिए प्रशासन सस्ते अनाज की दुकानों पर पर्याप्त अनाज की आपूर्ति कराये। जिन लोगों के घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है, उन्हें राहत अनुदान देने की कार्यवाही अविलंब शुरू की जाये। बीमारी को फैलने से रोकने के लिए सफाई करें, दवाई छिड़काव जैसे निवारक उपाय तुरंत किए जाने चाहिए। जिन स्थानों पर जल प्रदूषित है, वहां स्वच्छ जल की आपूर्ति के लिए आवश्यकतानुसार कुओं का अधिग्रहण किया जाना चाहिए। जहां भी आवश्यकता हो, वहां टैंकरों के माध्यम से पेयजल की आपूर्ति की जाए। भारी बारिश के कारण सड़कें क्षतिग्रस्त होने से गांवों का संपर्क टूट गया है, निर्माण विभाग ऐसी सड़कों की शीघ्र मरम्मत कराए। शिक्षा विभाग उन स्कूली छात्रों को शैक्षणिक सामग्री प्रदान करे जिनकी शैक्षणिक सामग्री बाढ़ के कारण क्षतिग्रस्त हो गई है। यह निर्देश उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने सभी कलेक्टरों और विभागीय आयुक्तों को दिए हैं।
इस अवसर पर सभी विभागीय आयुक्त, कलेक्टर, मुख्य कार्यपालन अधिकारी दूरसंचार प्रणाली के माध्यम से उपस्थित थे।
भारी बारिश, बाढ़, भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं में नागरिकों की जान बचाना और उनका पुनर्वास करना सरकार का पहला कर्तव्य है। बिना नियम बनाये, समय पड़ने पर ‘आऊट ऑफ द वे’ जाकर काम करना पड़ेगा, तब उसका निर्णय जिलाधिकारी को लेना होगा। जनहित के हर कार्य में सरकार आपके साथ है। आपदा राहत, बाढ़ राहत की धनराशि में कमी नहीं आने दी जाएगी। यह आश्वासन उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने राज्यस्तरीय विभागीय आयुक्तों और जिलाधिकारी की बैठक में दिया। साथ ही उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने यह भी निर्देश दिया कि राज्य के सभी जिला कलेक्टर बाढ़ की स्थिति को लेकर सतर्क रहकर काम करें।
उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने वीडियो संचार प्रणाली के माध्यम से विभागीय आयुक्तों और जिला कलेक्टरों से राज्य में भारी बारिश, बाढ़ और सूखे की स्थिति की समीक्षा की। इस अवसर पर यहां आपदा प्रबंधन, राहत एवं पुनर्वास मंत्री अनिल पाटिल, मुख्य सचिव मनोज सौनिक, वित्त विभाग के अपर मुख्य मुख्य सचिव नितिन करीर, राहत एवं पुनर्वास विभाग के प्रधान सचिव असीम गुप्ता, आपदा नियंत्रण कक्ष के संचालक आप्पासो धुलाज, आपदा नियंत्रण कक्ष के उपसचिव डॉ. श्रीनिवास कोतवाल, विधायक संजय कुटे आदि उपस्थित थे।
आपदा राहत के लिए धनराशि की कमी नहीं होने दी जाएगी
यदि बाढ़ के कारण गाँव के घरों और सड़कों पर गाद हो तो उसे साफ करने के लिए ‘राज्य आपदा प्रतिक्रिया सहायता कोष’ और जिला परिषद की निधि का उपयोग किया जाना चाहिए। प्रत्येक जिले को दी गई 30 लाख रुपये की अग्रिम धनराशि का उपयोग किया जाए। उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने निधि की कमी होने पर तुरंत निधि की मांग करने का सुझाव दिया।
नदियों एवं नालों के प्राकृतिक प्रवाह को जारी रखने के लिए नदियों एवं नालों से अतिक्रमण हटाया जाए
उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने आगे कहा कि राज्य के कई हिस्सों में नदियों, नालों और नहरों पर अतिक्रमण हुआ है। नदियों और नालों के प्राकृतिक प्रवाह में रुकावट के कारण बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होती है। ऐसे स्थानों पर नदी एवं नहर पर हुए अतिक्रमण हटाने का कार्य जिलाधिकारी प्राथमिकता एवं सख्त रुख के साथ करें। नदियों एवं नहरों से गाद निकासी के लिए ठेकेदारों के उपकरण एवं प्रशासन की ओर से डीजल की व्यवस्था करायी जाये। यह अभियान 15 सितंबर तक पूरा हो जाना चाहिए। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखा जाए कि गाद निकालने के बाद वह वापस नदी या नाले में न जाए।
भूस्खलन संभावित क्षेत्रों के खतरनाक गांवों का सर्वेक्षण करके पुनर्वास की ठोस योजना प्रस्तुत की जाए
भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में इरशालवाड़ी, तलिया जैसी घटनाएं नहीं होनी चाहिए। इस उद्देश्य से पहाड़ी और दूरदराज के क्षेत्रों में भूस्खलन आदिवासी टांडे, पाडे का दूसरी तरफ पुनर्वास करने के लिए जिला कलेक्टर ने खतरनाक गांवों का सर्वेक्षण के माध्यम से जानकारी एकत्र करनी चाहिए। पुनर्वास हेतु वैकल्पिक स्थान की व्यवस्था, ग्रामीणों की आजीविका के सभी पहलुओं पर विचार करते हुए एक योजना तैयार करने का भी सुझाव उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने दिया।
जिलाधिकारियों को अतिवृष्टि एवं बाढ़ पीड़ितों को राहत एवं पुनर्वास के लिए युद्धस्तर पर कार्य करने के दिये गये निर्देश
बाढ़ की स्थिति के दौरान खतरनाक स्थिति वाले क्षेत्रों के निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाना चाहिए। बाढ़ की स्थिति से मृत्यु होनेवालों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की राहत तत्काल दी जाए। कृषि फसलों के नुकसान का पंचनामा तत्काल शुरू किया जाए। जिन स्थानों पर कृषि भूमि को खुर्द-बुर्द किया गया है, वहां का पंचनामा भी तुरंत शुरू किया जाए। बंजर भूमि को पुनः कृषि योग्य बनाने में आने वाली लागत की एक योजना तैयार की जानी चाहिए।
साथ ही अगर दोबारा बुआई की जरूरत हो तो इसकी योजना बना लेनी चाहिए। प्रभावित व्यक्तियों को सस्ते अनाज की दुकानों से अनाज का वितरण उसी दिन होगा, इसलिए प्रशासन सस्ते अनाज की दुकानों पर पर्याप्त अनाज की आपूर्ति कराये। जिन लोगों के घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है, उन्हें राहत अनुदान देने की कार्यवाही अविलंब शुरू की जाये। बीमारी को फैलने से रोकने के लिए सफाई करें, दवाई छिड़काव जैसे निवारक उपाय तुरंत किए जाने चाहिए। जिन स्थानों पर जल प्रदूषित है, वहां स्वच्छ जल की आपूर्ति के लिए आवश्यकतानुसार कुओं का अधिग्रहण किया जाना चाहिए। जहां भी आवश्यकता हो, वहां टैंकरों के माध्यम से पेयजल की आपूर्ति की जाए। भारी बारिश के कारण सड़कें क्षतिग्रस्त होने से गांवों का संपर्क टूट गया है, निर्माण विभाग ऐसी सड़कों की शीघ्र मरम्मत कराए। शिक्षा विभाग उन स्कूली छात्रों को शैक्षणिक सामग्री प्रदान करे जिनकी शैक्षणिक सामग्री बाढ़ के कारण क्षतिग्रस्त हो गई है। यह निर्देश उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने सभी कलेक्टरों और विभागीय आयुक्तों को दिए हैं।
इस अवसर पर सभी विभागीय आयुक्त, कलेक्टर, मुख्य कार्यपालन अधिकारी दूरसंचार प्रणाली के माध्यम से उपस्थित थे।

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