मांजरी, जुलाई (हड़पसर एक्सप्रेस न्यूज़ नेटवर्क)
जन्मदाता माता-पिता सबसे पहले हमारे गुरु होते हैं। साथ ही, शिक्षक हमारे दूसरे गुरु होते हैं जो हमें स्कूल और कॉलेज जीवन में गहन ज्ञान और कौशल हासिल करना सिखाते हैं। उनका जीवनभर आदर-सम्मान करना उनके द्वारा सिखाया गया संस्कार है। यह विचार अरूणदादा बेल्हेकर युवा राष्ट्र निर्माण संस्था के संस्थापक अध्यक्ष शैलेंद्र बेल्हेकर ने व्यक्त किए।
अरूणदादा बेल्हेकर युवा राष्ट्र निर्माण संस्था की ओर से मांजरी में स्थित के.के.घुले विद्यालय में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गुरुजनों का सम्मान साथ ही जरूरतमंद विद्यार्थियों को नोटबुक एवं पेन वितरित किए गए, तब वे बोल रहे थे। इस अवसर पर यहां पूर्व सरपंच शिवराज घुले, पूर्व उपसरपंच समीर घुले, विट्ठलराव भापकर, पांडूरंग घुले, अनुराधा माने, दिलीप घुले, मोहन घुले, मसा जाधव, गोरख आडेकर, दिपक घुले आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे।
आगे बोलते हुए शैलेंद्र बेल्हेकर ने कहा कि किसी भी क्षेत्र में छात्रों को विशेष कौशल प्राप्त करने के लिए उस क्षेत्र के विशेषज्ञों का तात्पर्य गुरुओं से मार्गदर्शन लेने की जरूरत होती है, तभी वे सफल होंगे।
कार्यक्रम का संयोजन प्राचार्य एस. एस. पाटिल, पर्यवेक्षक सतीश हाके, प्रज्ञा झगडे और प्राजक्ता वाघ द्वारा सफलतापूर्वक किया गया।
जन्मदाता माता-पिता सबसे पहले हमारे गुरु होते हैं। साथ ही, शिक्षक हमारे दूसरे गुरु होते हैं जो हमें स्कूल और कॉलेज जीवन में गहन ज्ञान और कौशल हासिल करना सिखाते हैं। उनका जीवनभर आदर-सम्मान करना उनके द्वारा सिखाया गया संस्कार है। यह विचार अरूणदादा बेल्हेकर युवा राष्ट्र निर्माण संस्था के संस्थापक अध्यक्ष शैलेंद्र बेल्हेकर ने व्यक्त किए।
अरूणदादा बेल्हेकर युवा राष्ट्र निर्माण संस्था की ओर से मांजरी में स्थित के.के.घुले विद्यालय में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गुरुजनों का सम्मान साथ ही जरूरतमंद विद्यार्थियों को नोटबुक एवं पेन वितरित किए गए, तब वे बोल रहे थे। इस अवसर पर यहां पूर्व सरपंच शिवराज घुले, पूर्व उपसरपंच समीर घुले, विट्ठलराव भापकर, पांडूरंग घुले, अनुराधा माने, दिलीप घुले, मोहन घुले, मसा जाधव, गोरख आडेकर, दिपक घुले आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे।
आगे बोलते हुए शैलेंद्र बेल्हेकर ने कहा कि किसी भी क्षेत्र में छात्रों को विशेष कौशल प्राप्त करने के लिए उस क्षेत्र के विशेषज्ञों का तात्पर्य गुरुओं से मार्गदर्शन लेने की जरूरत होती है, तभी वे सफल होंगे।
कार्यक्रम का संयोजन प्राचार्य एस. एस. पाटिल, पर्यवेक्षक सतीश हाके, प्रज्ञा झगडे और प्राजक्ता वाघ द्वारा सफलतापूर्वक किया गया।

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