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अंगूर बीज के तेल पर प्रौद्योगिकी

मांजरी, जुलाई (हड़पसर एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क)
    भाकृअनुप-राष्ट्रीय अंगूर अनुसंधान केंद्र द्वारा एक अद्वितीय अंगूर किस्म मांजरी मेडिका का विकास जूस के उद्देश्य हेतु किया गया है। इस अंगूर किस्म की मणियों के बीजों से उत्पन्न होने वाले उच्च न्यूट्रास्युटिकल गुणों से भरपूर तेल को प्राप्त करने हेतु एक प्रौद्योगिकी पर काम किया गया एवं इस प्रौद्योगिकी के विकास के दौरान बहुत ही आशाजनक परिणाम प्राप्त हुए। मांजरी मेडिका बीज के तेल पर विकसित प्रौद्योगिकी के महत्व को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय अंगूर अनुसंधान केंद्र ने वर्ष 2020 के दौरान भारतीय पेटेंट कार्यालय में एक पेटेंट आवेदन जमा किया। हाल ही में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के बागवानी प्रभाग ने इस तकनीक को पांच सर्वश्रेष्ठ प्रविष्टियों में से एक के रूप में चुना। 16 जुलाई, 2023 को नई दिल्ली के  एनएएससी सभागार में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद स्थापना और प्रौद्योगिकी दिवस समारोह के अवसर पर भारत सरकार के केन्द्रीय मंत्री श्री परषोत्तम रूपाला और श्री कैलाश चौधरी के द्वारा इस प्रौद्योगिकी के प्रमुख डवलपर तथा संस्थान के निदेशक डॉ. कौशिक बनर्जी को यह सम्मान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक की उपस्थिति में दिया गया। 
मांजरी मेडिका बीज के तेल विटामिन ई (लगभग 1500 मिलीग्राम/किग्रा) और लाभकारी वसीय अम्लों से भरपूर है। इसमें गामा-टोकोट्राइनोल (लगभग1100 मिलीग्राम /किग्रा) भी प्रचुर मात्रा में है, जो मानव शरीर पर वायुमंडलीय विकिरण के संपर्क से होने वाली हानि से बचाता है। यह तेल पशुओं के शरीर में यकृत सूजन संबंधी विकारों के उपचार के लिए भी फायदेमंद साबित हुआ है। पॉलीफिनोलिक घटक मौखिक सेवन या त्वचीय पूरकता पर एंटीऑक्सीडेंट गुण प्रदान करते हैं। तेल निकालने के बाद बचे हुए ठोस पदार्थ जैसे कि अंगूर के बीज की खली पशु आहार के रूप में भी उपयोगी होती है, जिसमें उच्च मात्रा में पॉलीफिनोलिक एंटीऑक्सिडेंट और आहारीय रेशे होते हैं। इस प्रकार यह नई प्रौद्योगिकी ‘शून्य अपशिष्ट’ की अवधारणा के अनुकूल है। इस प्रौद्योगिकी के परिणामों को डॉ. बनर्जी और उनकी टीम द्वारा संसार की प्रमुख वैज्ञानिक पत्रिकाओं, जैसे सस्टेनेबल केमिस्ट्री एंड फार्मेसी, यूरोपियन जर्नल ऑफ लिपिड साइंस एंड टेक्नोलॉजी तथा और जर्नल ऑफ इन्फ्लेमेशन रिसर्च में प्रकाशित किया जा चुका है।
डॉ. बनर्जी ने उल्लेख किया कि मांजरी मेडिका किस्म के बीज से प्राप्त तेल में उच्च मूल्य वाले कार्यात्मक पदार्थों की वजह से खाद्य और न्यूट्रास्युटिकल से संबंधित उद्योगों में इसके उपयोग की बहुत अधिक संभावनायें हैं। सौंदर्य प्रसाधनों और विविध व्यक्तिगत देखभाल उत्पादों में एक घटक के रूप में इसका उपयोग करना भी संभव है। उन्होंने खाद्य, चारा और स्वास्थ्य देखभाल उद्योगों से जुड़ी विभिन्न कंपनियों से अनुरोध किया कि वे इस अद्वितीय अंगूर के तेल का उपयोग व्यावसायीकरण करने पर विचार करें तथा साथ ही साथ अपने मौजूदा उत्पादों के मूल्यवर्धन में भी इस उत्पाद का प्रयोग किया जाना चाहिए।

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