चांद की स्टडी के मिशन के साथ ही इसरो ने अब सूर्य को समझने की दिशा में कदम बढ़ाया है। सूर्य का अध्ययन करने वाली पहली अंतरिक्ष-आधारित भारतीय वेधशाला-आदित्य-एल1, अगले महीने प्रक्षेपण के लिए तैयार हो रही है। इसरो ने कहा कि यू आर राव सैटेलाइट केन्द्र बेंगलुरु में विकसित उपग्रह आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में अपने स्पेसपोर्ट पर पहुंच गया है। अंतरिक्ष यान आदित्य एल-1’ सूर्य का अध्ययन करने के लिए भारत का पहला अंतरिक्ष मिशन है। इसे पृथ्वी से 1.5 मिलियन किमी पर कक्षा में स्थापित किया जाएगा।
आदित्य-एल1 सौर वातावरण का अध्ययन करने के लिए एक नियोजित कोरोनाग्राफ अंतरिक्ष यान है, इसे पृथ्वी और सूर्य के बीच L1 बिंदु के चारों ओर एक प्रभामण्डल कक्ष में स्थापित किया जाएगा। यह सौर वातावरण, सौर चुम्बकीय तूफान और पृथ्वी के आसपास के वातावरण का प्रभाव का अध्ययन करेगा।
आदित्य एल1 से सौर गतिविधियों और रियल टाइम में अंतरिक्ष के मौसम पर उनके असर को समझा जा सकेगा। ये अंतरिक्ष यान सात पेलोड लेकर जाएगा जो इलेक्ट्रोमैग्नेट और पार्टिकल और मैग्नेटिक फील्ड डिटेक्टर्स की मदद से फोटोस्फेयर, क्रोमोस्फेयर और सूरज की बाहरी परतों का अध्ययन करेंगा। एल1 पॉइंट से चार पेलोड सीधे सूरज को देखेंगे और तीन पेलोड वहीं पर पार्टिकल्स और फील्ड की स्टडी करेंगे। ये सौर गतिशीलता के प्रसार प्रभाव का महत्वपूर्ण वैज्ञानिक अध्ययन प्रदान करेंगे।
आदित्य-एल1 सौर वातावरण का अध्ययन करने के लिए एक नियोजित कोरोनाग्राफ अंतरिक्ष यान है, इसे पृथ्वी और सूर्य के बीच L1 बिंदु के चारों ओर एक प्रभामण्डल कक्ष में स्थापित किया जाएगा। यह सौर वातावरण, सौर चुम्बकीय तूफान और पृथ्वी के आसपास के वातावरण का प्रभाव का अध्ययन करेगा।
आदित्य एल1 से सौर गतिविधियों और रियल टाइम में अंतरिक्ष के मौसम पर उनके असर को समझा जा सकेगा। ये अंतरिक्ष यान सात पेलोड लेकर जाएगा जो इलेक्ट्रोमैग्नेट और पार्टिकल और मैग्नेटिक फील्ड डिटेक्टर्स की मदद से फोटोस्फेयर, क्रोमोस्फेयर और सूरज की बाहरी परतों का अध्ययन करेंगा। एल1 पॉइंट से चार पेलोड सीधे सूरज को देखेंगे और तीन पेलोड वहीं पर पार्टिकल्स और फील्ड की स्टडी करेंगे। ये सौर गतिशीलता के प्रसार प्रभाव का महत्वपूर्ण वैज्ञानिक अध्ययन प्रदान करेंगे।

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