मुख्य समाचार

6/recent/ticker-posts

अब बात मन की....

-गफ्फार खान, 
संस्थापक अध्यक्ष : मानवतावादी समाजसेवा संघटना

मणिपुर, हरियाणा, दिल्ली के दंगाई भूल गए हैं कि उन्हें भी एक दिन इस दुनिया से जाना है। दंगे भड़काना, दंगों में भाग लेना, गरीबों को पीटना, महिलाओं को अपमानित करना, निर्दोष घरों को अंधाधुंध जलाना, यह सब कुछ करके आपको किस तरह की मानसिक शांति मिल रही है? आप अपने बच्चों और परिवार के समक्ष क्या आदर्श स्थापित करना चाहते हैं ? नफरत की केमिस्ट्री में जन्मे, भगवान न करे, आप भी इन दंगों की आग में जलकर नष्ट हो जाएं, तो आपकी पत्नियों और बच्चों का क्या होगा? यह संभव है कि जिस महात्मा अवतार ने आपको दंगाई बनने के लिए प्रेरित किया, वह आपकी मृत्यु के बाद आपके परिवार को धन-दौलत का आशीर्वाद दे, लेकिन याद रखें वे आपके परिवार को आपके अस्तित्व का पर्याय बनाने की क्षमता कभी नहीं रख सकते। मेरे भाइयों, नेताओं के भड़काऊ भाषणों से अपना और अपने देश का व अपने परिवार का भविष्य अंधकारमय करने का पाप मत करो। भारत माता सदियों से अपने देशवासियों से प्रार्थना करती रही है कि उसे मजबूत बनानेवाले शेर चाहिए ना कि देश को तोड़नेवाले कायर। देश पर गर्व करनेवाले हम सभी लोगों के लिए अपनी मातृभूमि की आवाज सुनने में देरी करना एक प्रकार से देश के साथ विश्वासघात है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ