मुंबई, अगस्त (महासंवाद)
मिल श्रमिकों के आवास हेतु प्राप्त आवेदनों की जांच तीन माह के अन्दर पूर्ण की जाये। मुंबई में आवास उपलब्ध कराने के लिए हाउसिंग स्टॉक बढ़ाने की जरूरत है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने आज यहां आश्वासन दिया कि हम कई वर्षों से लंबित मिल श्रमिकों के घरों के मुद्दे को हल कर रहे हैं, साथ ही निर्देश दिया कि रांजगोली, कोन-पनवेल में घरों की तुरंत मरम्मत की जाए और पांच हजार घरों की लॉटरी प्रक्रिया पूरी की जाए।
मिल मजदूरों के मुद्दे पर सह्याद्री राज्य अतिथि गृह में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री श्री शिंदे बोल रहे थे। इस अवसर पर मुंबई शहर पालकमंत्री दीपक केसरकर, मुंबई उपनगर के पालकमंत्री मंगलप्रभात लोढा, सांसद धैर्यशील माने, राहुल शेवाले, विधायक सर्वश्री कालिदास कोलंबकर, सदा सरवणकर, प्रकाश सुर्वे, अतुल भातखलकर, सुनील राणे, प्रकाश आबिटकर, मंगेश कुडालकर, प्रकाश आवाडे, पूर्व विधायक नरसय्या आडम, मुख्य सचिव मनोज सौनिक, राजस्व विभाग के अपर मुख्य सचिव राजगोपाल देवरा, गृहनिर्माण विभाग की अपर मुख्य सचिव वल्सा नायर, नगरविकास विभाग के प्रधान सचिव असीमकुमार गुप्ता, के. एच. गोविंदराज, एमएमआरडीए के मुख्य नियोजनकार मोहन सोनार सहित मिल श्रमिकों के विभिन्न संघटनों के पदाधिकारी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री श्री शिंदे ने इस मौके पर कहा कि सरकार का ईमानदार रुख है कि मिल मजदूरों को उनके वारिसों को उनका वाजिब घर मिलना चाहिए। इसके लिए प्रक्रिया तेज कर दी गई है और पिछले कुछ महीनों में दो चरणों में मिल श्रमिकों को फ्लैटों की चाबियां बांट दी गई हैं। मिल श्रमिकों और उनके उत्तराधिकारियों द्वारा अब तक लगभग 1 लाख 74 हजार आवेदन म्हाडा को सौंपे जा चुके हैं। इसकी जांच प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया गया है और इस जांच प्रक्रिया को तीन महीने में पूरा करने का निर्देश दिया गया है, जिससे पात्र एवं अपात्रों की संख्या निर्धारित की जा सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोन-पनवेल में घरों की मरम्मत तुरंत पूरी की जानी चाहिए और ठाणे रांजगोली में फ्लैटों की मरम्मत एमएमआरडीए द्वारा तुरंत की जानी चाहिए ताकि वहां पांच हजार घरों की लॉटरी निकाली जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोन-पनवेल में मकान आवंटन की प्रक्रिया पूरी हो जायेगी तो दशहरा तक श्रमिकों को फ्लैट की चाबी देने की प्रक्रिया भी पूरी कर ली जायेगी।
इस समय मुंबई नगर निगम के अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि मुंबई में टेक्सटाइल मिल म्यूजियम का काम तुरंत शुरू किया जाए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि यहां के मिल श्रमिकों के बेटे-बेटियों को काम देने का प्रयास करें।
जिला कलेक्टर ने बताया है कि मुंबई महानगरीय क्षेत्र में मिल श्रमिकों को घर उपलब्ध कराने के लिए कल्याण तालुका में लगभग 21 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध है और मुख्यमंत्री ने प्रस्ताव को तुरंत कैबिनेट में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से मिल श्रमिकों को आवास उपलब्ध कराने के विकल्प के संबंध में एक प्रस्तुतीकरण दिया गया। साथ ही सोलापुर, नागपुर, कोल्हापुर, सातारा के मूल निवासी मिल मजदूरों को उनकी इच्छा के मुताबिक मुंबई से बाहर घर देने को लेकर भी चर्चा हुई।
उपस्थित जन प्रतिनिधियों एवं मिल श्रमिक संघों के प्रतिनिधियों ने पिछले कुछ महीनों में मिल श्रमिकों को आवास उपलब्ध कराने की दिशा में जिस गति से कार्यवाही की जा रही है, उस पर संतोष व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री को बधाई दी।
मिल श्रमिकों के आवास हेतु प्राप्त आवेदनों की जांच तीन माह के अन्दर पूर्ण की जाये। मुंबई में आवास उपलब्ध कराने के लिए हाउसिंग स्टॉक बढ़ाने की जरूरत है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने आज यहां आश्वासन दिया कि हम कई वर्षों से लंबित मिल श्रमिकों के घरों के मुद्दे को हल कर रहे हैं, साथ ही निर्देश दिया कि रांजगोली, कोन-पनवेल में घरों की तुरंत मरम्मत की जाए और पांच हजार घरों की लॉटरी प्रक्रिया पूरी की जाए।
मिल मजदूरों के मुद्दे पर सह्याद्री राज्य अतिथि गृह में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री श्री शिंदे बोल रहे थे। इस अवसर पर मुंबई शहर पालकमंत्री दीपक केसरकर, मुंबई उपनगर के पालकमंत्री मंगलप्रभात लोढा, सांसद धैर्यशील माने, राहुल शेवाले, विधायक सर्वश्री कालिदास कोलंबकर, सदा सरवणकर, प्रकाश सुर्वे, अतुल भातखलकर, सुनील राणे, प्रकाश आबिटकर, मंगेश कुडालकर, प्रकाश आवाडे, पूर्व विधायक नरसय्या आडम, मुख्य सचिव मनोज सौनिक, राजस्व विभाग के अपर मुख्य सचिव राजगोपाल देवरा, गृहनिर्माण विभाग की अपर मुख्य सचिव वल्सा नायर, नगरविकास विभाग के प्रधान सचिव असीमकुमार गुप्ता, के. एच. गोविंदराज, एमएमआरडीए के मुख्य नियोजनकार मोहन सोनार सहित मिल श्रमिकों के विभिन्न संघटनों के पदाधिकारी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री श्री शिंदे ने इस मौके पर कहा कि सरकार का ईमानदार रुख है कि मिल मजदूरों को उनके वारिसों को उनका वाजिब घर मिलना चाहिए। इसके लिए प्रक्रिया तेज कर दी गई है और पिछले कुछ महीनों में दो चरणों में मिल श्रमिकों को फ्लैटों की चाबियां बांट दी गई हैं। मिल श्रमिकों और उनके उत्तराधिकारियों द्वारा अब तक लगभग 1 लाख 74 हजार आवेदन म्हाडा को सौंपे जा चुके हैं। इसकी जांच प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया गया है और इस जांच प्रक्रिया को तीन महीने में पूरा करने का निर्देश दिया गया है, जिससे पात्र एवं अपात्रों की संख्या निर्धारित की जा सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोन-पनवेल में घरों की मरम्मत तुरंत पूरी की जानी चाहिए और ठाणे रांजगोली में फ्लैटों की मरम्मत एमएमआरडीए द्वारा तुरंत की जानी चाहिए ताकि वहां पांच हजार घरों की लॉटरी निकाली जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोन-पनवेल में मकान आवंटन की प्रक्रिया पूरी हो जायेगी तो दशहरा तक श्रमिकों को फ्लैट की चाबी देने की प्रक्रिया भी पूरी कर ली जायेगी।
इस समय मुंबई नगर निगम के अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि मुंबई में टेक्सटाइल मिल म्यूजियम का काम तुरंत शुरू किया जाए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि यहां के मिल श्रमिकों के बेटे-बेटियों को काम देने का प्रयास करें।
जिला कलेक्टर ने बताया है कि मुंबई महानगरीय क्षेत्र में मिल श्रमिकों को घर उपलब्ध कराने के लिए कल्याण तालुका में लगभग 21 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध है और मुख्यमंत्री ने प्रस्ताव को तुरंत कैबिनेट में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से मिल श्रमिकों को आवास उपलब्ध कराने के विकल्प के संबंध में एक प्रस्तुतीकरण दिया गया। साथ ही सोलापुर, नागपुर, कोल्हापुर, सातारा के मूल निवासी मिल मजदूरों को उनकी इच्छा के मुताबिक मुंबई से बाहर घर देने को लेकर भी चर्चा हुई।
उपस्थित जन प्रतिनिधियों एवं मिल श्रमिक संघों के प्रतिनिधियों ने पिछले कुछ महीनों में मिल श्रमिकों को आवास उपलब्ध कराने की दिशा में जिस गति से कार्यवाही की जा रही है, उस पर संतोष व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री को बधाई दी।
.jpg)
0 टिप्पणियाँ