पुणे, अगस्त (जिमाका)
पुणे शहर में ई-रिक्शा लेनेवाली 10 महिलाओं को ई-रिक्शा की सब्सिडी छोड़कर जनभागीदारी से ई-रिक्शा उपलब्ध करायी जाएगी। यह जानकारी उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री तथा जिले के पालकमंत्री चंद्रकांतदादा पाटिल ने दी है।
पुणे महानगरपालिका के छत्रपति शिवाजी महाराज सभागृह में पालकमंत्री श्री पाटिल के शुभ हाथों नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के अंतर्गत ‘मिस्ट बेस्ड फाउंटन सिस्टिम’ का उद्घाटन और इलेक्ट्रिक पैसेंजर रिक्शा के लिए अनुदान वितरित किया गया। इस अवसर पर यहां मनपा अतिरिक्त आयुक्त रवींद्र बिनवडे, विकास ढाकणे, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल केे नितिन शिंदे, ‘एआरएआय’ के जितेंद्र पुरोहित, पालकमंत्री के विशेष कार्य अधिकारी राजेंद्र मुठे, पर्यावरण विभाग के उपायुक्त माधव जगताप आदि उपस्थित थे।
मंत्री श्री पाटिल ने आगे कहा कि देश स्तर पर इलेक्ट्रिक रिक्शा के लिए सब्सिडी दी जा रही है। ई-रिक्शा के लिए केंद्र सरकार और महानगरपालिका की ओर से 1 लाख की संयुक्त सब्सिडी मिलती है, इसलिए औसत एक रिक्शा के लिए ड्राइवर को 3 लाख रुपये खर्च करने होंगे, लेकिन ईंधन की बचत होने से परिवार के लिए अधिक आय प्राप्त की जा सकती है। रिक्शा चालकों को इलेक्ट्रिक रिक्शा की ओर अग्रसर करना चाहिए क्योंकि इससे शहर में प्रदूषण कम होने के साथ-साथ आय भी बढ़ेगी। महानगरपालिका को रिक्शा स्टैंड के पास इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना बनानी चाहिए। यह अपील भी उन्होंने की। शहर में मेट्रो का दूसरा चरण पूरा होने के बाद 2 लाख नागरिक अन्य वाहनों की जगह मेट्रो का विकल्प इस्तेमाल करेंगे। तीसरे चरण के बाद यह संख्या 4 लाख तक पहुंच जाएगी, जिससे प्रदूषण और कम हो जाएगा। यात्रियों को घर से मेट्रो स्टेशन तक पहुंचने के लिए ई-रिक्शा का उपयोग होगा। रिक्शा के साथ-साथ अन्य वाहनों के लिए भी सीएनजी और इलेक्ट्रिक का इस्तेमाल जरूरी है। यह मत पालकमंत्री चंद्रकांतदादा पाटिल ने व्यक्त किया।
शहर के चौराहों पर स्थापित मिस्ट बेस्ड फाउंटन के कारण हवा में धूल के कणों को कम करके वायु प्रदूषण को कम करने में मदद होगी। यह विश्वास भी श्री पाटिल ने व्यक्त किया।
श्री विकास ढाकणे ने कहा कि पुणे शहर की आबादी 70 लाख तक पहुंच गई है और 55 लाख वाहन पंजीकृत हैं। बाहरी वाहन भी बड़ी संख्या में आने के कारण प्रदूषण बढ़ रहा है। प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए महानगरपालिका कई स्तरों पर प्रयास कर रही है। ई-रिक्शा को सब्सिडी, ई बसों का उपयोग, मिस्ट बेस्ड फाउंटन ऐसे अनेक उपाय किए गए हैं।
प्रास्ताविक करते हुए पर्यावरण विभाग के उपायुक्त माधव जगताप ने कहा कि केंद्र सरकार के माध्यम से राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम साथ ही 15वें वित्त आयोग के तहत महानगरपालिका को 350 करोड़ की निधि उपलब्ध करायी गयी है। महानगरपालिका के द्वारा प्रत्येक इलेक्ट्रिक यात्री ऑटो रिक्शा मालिक को प्रति रिक्शा 25 हजार रुपये की सब्सिडी दी गई है। शहर के प्रमुख चौराहों पर प्रदूषण कम किया जा सके इसलिए 10 स्थानों पर मिस्ट बेस्ड फाउंटन बनाए जा रहे हैं, कुल 40 स्थानों पर ऐसे फव्वारे लगाए जाएंगे।
इस अवसर पर ई-रिक्शा पंचायत के प्रतिनिधि नितिन पवार ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि ई-रिक्शा के लिए सब्सिडी देने वाला पुणे देश की पहली महानगरपालिका है।
कार्यक्रम में इलेक्ट्रिक ऑटो रिक्शा मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के प्रतिनिधि, रिक्शा एसोसिएशन के प्रतिनिधि और रिक्शा मालिक उपस्थित थे।
पुणे शहर में ई-रिक्शा लेनेवाली 10 महिलाओं को ई-रिक्शा की सब्सिडी छोड़कर जनभागीदारी से ई-रिक्शा उपलब्ध करायी जाएगी। यह जानकारी उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री तथा जिले के पालकमंत्री चंद्रकांतदादा पाटिल ने दी है।
पुणे महानगरपालिका के छत्रपति शिवाजी महाराज सभागृह में पालकमंत्री श्री पाटिल के शुभ हाथों नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के अंतर्गत ‘मिस्ट बेस्ड फाउंटन सिस्टिम’ का उद्घाटन और इलेक्ट्रिक पैसेंजर रिक्शा के लिए अनुदान वितरित किया गया। इस अवसर पर यहां मनपा अतिरिक्त आयुक्त रवींद्र बिनवडे, विकास ढाकणे, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल केे नितिन शिंदे, ‘एआरएआय’ के जितेंद्र पुरोहित, पालकमंत्री के विशेष कार्य अधिकारी राजेंद्र मुठे, पर्यावरण विभाग के उपायुक्त माधव जगताप आदि उपस्थित थे।
मंत्री श्री पाटिल ने आगे कहा कि देश स्तर पर इलेक्ट्रिक रिक्शा के लिए सब्सिडी दी जा रही है। ई-रिक्शा के लिए केंद्र सरकार और महानगरपालिका की ओर से 1 लाख की संयुक्त सब्सिडी मिलती है, इसलिए औसत एक रिक्शा के लिए ड्राइवर को 3 लाख रुपये खर्च करने होंगे, लेकिन ईंधन की बचत होने से परिवार के लिए अधिक आय प्राप्त की जा सकती है। रिक्शा चालकों को इलेक्ट्रिक रिक्शा की ओर अग्रसर करना चाहिए क्योंकि इससे शहर में प्रदूषण कम होने के साथ-साथ आय भी बढ़ेगी। महानगरपालिका को रिक्शा स्टैंड के पास इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना बनानी चाहिए। यह अपील भी उन्होंने की। शहर में मेट्रो का दूसरा चरण पूरा होने के बाद 2 लाख नागरिक अन्य वाहनों की जगह मेट्रो का विकल्प इस्तेमाल करेंगे। तीसरे चरण के बाद यह संख्या 4 लाख तक पहुंच जाएगी, जिससे प्रदूषण और कम हो जाएगा। यात्रियों को घर से मेट्रो स्टेशन तक पहुंचने के लिए ई-रिक्शा का उपयोग होगा। रिक्शा के साथ-साथ अन्य वाहनों के लिए भी सीएनजी और इलेक्ट्रिक का इस्तेमाल जरूरी है। यह मत पालकमंत्री चंद्रकांतदादा पाटिल ने व्यक्त किया।
शहर के चौराहों पर स्थापित मिस्ट बेस्ड फाउंटन के कारण हवा में धूल के कणों को कम करके वायु प्रदूषण को कम करने में मदद होगी। यह विश्वास भी श्री पाटिल ने व्यक्त किया।
श्री विकास ढाकणे ने कहा कि पुणे शहर की आबादी 70 लाख तक पहुंच गई है और 55 लाख वाहन पंजीकृत हैं। बाहरी वाहन भी बड़ी संख्या में आने के कारण प्रदूषण बढ़ रहा है। प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए महानगरपालिका कई स्तरों पर प्रयास कर रही है। ई-रिक्शा को सब्सिडी, ई बसों का उपयोग, मिस्ट बेस्ड फाउंटन ऐसे अनेक उपाय किए गए हैं।
प्रास्ताविक करते हुए पर्यावरण विभाग के उपायुक्त माधव जगताप ने कहा कि केंद्र सरकार के माध्यम से राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम साथ ही 15वें वित्त आयोग के तहत महानगरपालिका को 350 करोड़ की निधि उपलब्ध करायी गयी है। महानगरपालिका के द्वारा प्रत्येक इलेक्ट्रिक यात्री ऑटो रिक्शा मालिक को प्रति रिक्शा 25 हजार रुपये की सब्सिडी दी गई है। शहर के प्रमुख चौराहों पर प्रदूषण कम किया जा सके इसलिए 10 स्थानों पर मिस्ट बेस्ड फाउंटन बनाए जा रहे हैं, कुल 40 स्थानों पर ऐसे फव्वारे लगाए जाएंगे।
इस अवसर पर ई-रिक्शा पंचायत के प्रतिनिधि नितिन पवार ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि ई-रिक्शा के लिए सब्सिडी देने वाला पुणे देश की पहली महानगरपालिका है।
कार्यक्रम में इलेक्ट्रिक ऑटो रिक्शा मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के प्रतिनिधि, रिक्शा एसोसिएशन के प्रतिनिधि और रिक्शा मालिक उपस्थित थे।

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