पुणे, अगस्त (जिमाका)
केंद्र सरकार ने सहकारी समितियों को लेकर कई बड़े फैसले लिए हैं और इसका क्रियान्वयन राज्य में बखूबी किया जा रहा है। विभिन्न कार्यकारी सेवा सहकारी समितियों को आत्मनिर्भर और कुशल बनाने के प्रयास किये जा रहे हैं। यह जानकारी सहकारिता आयुक्त अनिल कावड़े ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से दी है।
महाराष्ट्र में ग्रामीण स्तर पर 20 हजार से अधिक विभिन्न कार्यकारी सेवा सहकारी समितियाँ कार्यरत हैं। इन संस्थाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने और इनके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को विभिन्न सेवाओं और वस्तुओं की आपूर्ति की जाए, इस दृष्टि से इनका कम्प्यूटरीकरण किया जा रहा है। इन संस्थानों के उपनियमों में कुछ बदलाव किये गये हैं और बाह्य उधार की सीमा को अपनी निधि के 10 गुना के बजाय 25 गुना तक बढ़ा दिया गया है। साथ ही यह भी प्रावधान किया गया है कि ये संस्थाएं 152 प्रकार की वस्तुओं और सेवाओं का कारोबार कर सकेंगी। राज्य में विभिन्न कार्यकारी सेवा सहकारी समितियों के स्तर पर इस संबंध में कार्यवाही शुरू कर दी गई है।
विभिन्न कार्यकारी सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से संबंधित संगठनों के सदस्यों को लागत प्रभावी दरों पर गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इन संगठनों को जेनेरिक दवा दुकानों का लाइसेंस देने का निर्णय लिया गया है। प्रत्येक जिले में कम से कम 5 ऐसी दुकानें खोलने की कार्रवाई की गई है और अब तक राज्य में 340 संगठनों ने ऐसी पहल करने की तैयारी दिखाई है। अब तक 320 संस्थानों ने ऑनलाइन पंजीकरण पूरा कर लिया है। निकट भविष्य में इन दुकानों के माध्यम से सस्ती दरों पर दवाओं की आपूर्ति होने से लोगों के दैनिक खर्चों में भारी बचत होगी।
विभिन्न कार्यकारी सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से विभिन्न प्रकार की ई-सेवाएँ प्रदान करने की दृष्टि से इन संस्थाओं के माध्यम से कॉमन सर्विस सेंटर प्रारंभ करने की कार्यवाही प्रारंभ की गई है तथा अब तक प्रदेश में 2 हजार 700 संस्थाएँ कॉमन सर्विस सेंटर के अंतर्गत पंजीकृत हो चुकी हैं। इसके माध्यम से भविष्य में ग्रामीण स्तर पर आवश्यक 300 से अधिक सेवाएं प्रदान की जाएंगी।
राज्य में अनाज उत्पादन को देखते हुए सहकारी समितियों के माध्यम से भंडारण क्षमता बढ़ाने की पहल की घोषणा की गई है। तदनुसार, नेर पिंगलाई, जिला अमरावती में विभिन्न कार्यकारी सेवा सहकारी समिति के माध्यम से एक पायलट परियोजना लागू की जा रही है।
बड़े पैमाने पर वस्तुओं एवं सेवाओं की आपूर्ति हेतु विभिन्न कार्यकारी सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से गतिविधियाँ क्रियान्वित की जा रही हैं। सहकारिता आयुक्त ने उम्मीद जताई है कि ये संस्थाएं भविष्य में आत्मनिर्भर बनेंगी और संबंधित गांवों के लिए वास्तविक विकास केंद्र के रूप में काम करेंगी। उन्होंने यह भी विश्वास व्यक्त किया है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था एवं कृषि से संबंधित सभी गतिविधियाँ विभिन्न कार्यकारी सेवा सहकारी समितियों के लिए सहायक होंगी।
केंद्र सरकार ने सहकारी समितियों को लेकर कई बड़े फैसले लिए हैं और इसका क्रियान्वयन राज्य में बखूबी किया जा रहा है। विभिन्न कार्यकारी सेवा सहकारी समितियों को आत्मनिर्भर और कुशल बनाने के प्रयास किये जा रहे हैं। यह जानकारी सहकारिता आयुक्त अनिल कावड़े ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से दी है।
महाराष्ट्र में ग्रामीण स्तर पर 20 हजार से अधिक विभिन्न कार्यकारी सेवा सहकारी समितियाँ कार्यरत हैं। इन संस्थाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने और इनके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को विभिन्न सेवाओं और वस्तुओं की आपूर्ति की जाए, इस दृष्टि से इनका कम्प्यूटरीकरण किया जा रहा है। इन संस्थानों के उपनियमों में कुछ बदलाव किये गये हैं और बाह्य उधार की सीमा को अपनी निधि के 10 गुना के बजाय 25 गुना तक बढ़ा दिया गया है। साथ ही यह भी प्रावधान किया गया है कि ये संस्थाएं 152 प्रकार की वस्तुओं और सेवाओं का कारोबार कर सकेंगी। राज्य में विभिन्न कार्यकारी सेवा सहकारी समितियों के स्तर पर इस संबंध में कार्यवाही शुरू कर दी गई है।
विभिन्न कार्यकारी सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से संबंधित संगठनों के सदस्यों को लागत प्रभावी दरों पर गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इन संगठनों को जेनेरिक दवा दुकानों का लाइसेंस देने का निर्णय लिया गया है। प्रत्येक जिले में कम से कम 5 ऐसी दुकानें खोलने की कार्रवाई की गई है और अब तक राज्य में 340 संगठनों ने ऐसी पहल करने की तैयारी दिखाई है। अब तक 320 संस्थानों ने ऑनलाइन पंजीकरण पूरा कर लिया है। निकट भविष्य में इन दुकानों के माध्यम से सस्ती दरों पर दवाओं की आपूर्ति होने से लोगों के दैनिक खर्चों में भारी बचत होगी।
विभिन्न कार्यकारी सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से विभिन्न प्रकार की ई-सेवाएँ प्रदान करने की दृष्टि से इन संस्थाओं के माध्यम से कॉमन सर्विस सेंटर प्रारंभ करने की कार्यवाही प्रारंभ की गई है तथा अब तक प्रदेश में 2 हजार 700 संस्थाएँ कॉमन सर्विस सेंटर के अंतर्गत पंजीकृत हो चुकी हैं। इसके माध्यम से भविष्य में ग्रामीण स्तर पर आवश्यक 300 से अधिक सेवाएं प्रदान की जाएंगी।
राज्य में अनाज उत्पादन को देखते हुए सहकारी समितियों के माध्यम से भंडारण क्षमता बढ़ाने की पहल की घोषणा की गई है। तदनुसार, नेर पिंगलाई, जिला अमरावती में विभिन्न कार्यकारी सेवा सहकारी समिति के माध्यम से एक पायलट परियोजना लागू की जा रही है।
बड़े पैमाने पर वस्तुओं एवं सेवाओं की आपूर्ति हेतु विभिन्न कार्यकारी सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से गतिविधियाँ क्रियान्वित की जा रही हैं। सहकारिता आयुक्त ने उम्मीद जताई है कि ये संस्थाएं भविष्य में आत्मनिर्भर बनेंगी और संबंधित गांवों के लिए वास्तविक विकास केंद्र के रूप में काम करेंगी। उन्होंने यह भी विश्वास व्यक्त किया है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था एवं कृषि से संबंधित सभी गतिविधियाँ विभिन्न कार्यकारी सेवा सहकारी समितियों के लिए सहायक होंगी।

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