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‘वसुधैव कुटुंबकम्’ लक्ष्य प्राप्ति में मदद करता है योग : राज्यपाल रमेश बैस

राज्यपाल द्वारा कुवलयानंद योग पुरस्कारों का किया गया वितरण
पुणे, अगस्त (जिमाका)
व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की योग साधना में क्षमता है। व्यापक अर्थों में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एवं शांति स्थापित कर ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में भी योग उपयोगी है। यह विचार राज्यपाल रमेश बैस ने व्यक्त किये।
लोणावला के कैवल्यधाम योग संस्था की ओर से आयोजित ‘स्वामी कुवलयानंद योग पुरस्कार-2013’ वितरण समारोह में बोल रहे थे। इस अवसर पर यहां सीबीआई के पूर्व महासंचालक पद्मश्री डॉ.डी.आर. कार्तिकेयन, कैवल्यधाम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुबोध तिवारी, सहव्यवस्थापक डॉ. आर. एस. भोगल, हृषिकेश के स्वामी राम साधक ग्राम के स्वामी रित्वन भारती, रवि दीक्षित आदि उपस्थित थे। 
राज्यपाल श्री बैस ने आगे कहा कि योग केवल स्वस्थ शरीर के लिए एक व्यायाम नहीं है बल्कि यह शरीर, मन और आत्मा से जुड़ी एक प्रक्रिया है। यह एक स्वस्थ जीवन जीने की शैली है। योग साधना का अंतिम लक्ष्य आंतरिक शांति, सद्भाव और आत्म-नियंत्रण का विकास है, इसलिए जब विभिन्न बीमारियों का प्रचलन बढ़ रहा है और युवा पीढ़ी नशे की ओर बढ़ रही है तो योग का प्रसार और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।
योग साधना से विकसित हुआ आत्मसंयम और सहनशीलता शांतिपूर्ण समाज के निर्माण में उपयुक्त साबित होता है। योग देश के लाखों युवाओं को रोजगार देकर समृद्धि लाने में उत्प्रेरक बन सकता है। भारत के योग को आज दुनिया ने स्वीकार कर लिया है। ‘योग दिवस’ मनाने के साथ-साथ हमें ‘योग सप्ताह’ मनाने पर भी विचार करना चाहिए। उन्होंने आशा व्यक्त की कि प्रत्येक विद्यालय एवं महाविद्यालय में इस सन्दर्भ में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किये जायें तथा प्रशिक्षकों की सहायता से विद्यार्थियों को योगासन के मूल पहलुओं से अवगत कराया जाये।
राज्यपाल ने कहा कि कैवल्यधाम संस्था में योग विद्या का ‘ऑक्सफोर्ड’ बनने की क्षमता है। इस संस्था ने विश्व के लिए योग शिक्षक तैयार करके विश्व के विभिन्न देशों में अपने केन्द्र प्रारम्भ करे। संस्था को योग विद्या के प्रसार के लिए इस क्षेत्र में अनुसंधान के लिए एक समर्पित विश्वविद्यालय बनना चाहिए। 
राज्यपाल श्री बैस ने संस्था के शताब्दी वर्ष के अवसर पर शुभकामनाएं दीं और पुरस्कार विजेताओं को बधाई दी।
राज्यपाल के हाथों से पद्मश्री डॉ.डी.आर. कार्तिकेयन, स्वामी रित्वन भारती को कुवलयानंद पुरस्कार से सम्मानित किया गया। सम्मान का जवाब देते हुए पुरस्कार विजेताओं ने योग के महत्व पर जोर दिया। कार्यक्रम से पहले राज्यपाल ने कैवल्यधाम योग संस्था परिसर का दौरा किया और ग्रंथालय की कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी ली।

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