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शिक्षकों और अभिभावकों को चरित्र-संपन्न पीढ़ी के निर्माण में योगदान देना चाहिए : उपमुख्यमंत्री अजीत पवार

पुणे, सितंबर (जिमाका)
सरकार छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कराने के लिए आवश्यक बुनियादी ढाँचा प्रदान कर रही है; शिक्षा के माध्यम से चरित्रवान पीढ़ी का निर्माण समय की मांग है और शिक्षकों तथा अभिभावकों को इसमें योगदान देना चाहिए। साथ ही राज्य के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने अपील की कि छात्रों को नए युग की चुनौतियों को पहचानना चाहिए और पारंपरिक सोच से हटकर नए और दिलचस्प क्षेत्रों का चयन करना चाहिए।
वे अल्पबचत भवन में आयोजित जिला शिक्षक पुरस्कार एवं अध्यक्ष कप पुरस्कार वितरण कार्यक्रम में बोल रहे थे। कार्यक्रम में राज्य के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री तथा जिले के पालक मंत्री चंद्रकांतदादा पाटिल, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रमेश चव्हाण, शिक्षा अधिकारी संध्या गायकवाड, सुनंदा वाखारे, कमलाकांत म्हेत्रे, रंजीत शिवतारे आदि उपस्थित थे।
उपमुख्यमंत्री श्री पवार ने कहा कि सरकार शिक्षकों की समस्याओं के समाधान के लिए सदैव प्रयासरत है। शिक्षकों को विद्यार्थियों को अच्छा प्रदर्शन कराने के लिए काम करना चाहिए। गरीब परिवारों तक अच्छी एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना शिक्षकों की जिम्मेदारी है और शिक्षकों को इसके लिए विशेष प्रयास करना चाहिए। छात्रों को अंग्रेजी भाषा अच्छे से सिखाने के लिए अंग्रेजी भाषा सीखनी चाहिए और अच्छी गतिविधियां चलानी चाहिए। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे विद्यार्थियों को कौशल एवं नैतिकता की शिक्षा देकर संस्कारवान, ज्ञानवान एवं चरित्रवान बनाने का प्रयास करें।
श्री पवार ने कहा कि विद्यार्थियों को अच्छी शिक्षा प्राप्त कर देश का मान बढ़ाना चाहिए। सफलता की ऊंचाइयों पर पहुंचते समय स्कूल या शिक्षकों को न भूलें। नई चीजें सीखने की कोशिश करते समय अच्छे दोस्त चुनें। नैतिकता न भूलें और नियमित व्यायाम करें। नशे से दूर रहें और अपने पसंदीदा शौक पालें। उपमुख्यमंत्री पवार ने विद्यार्थियों को अपना अच्छा प्रदर्शन बरकरार रखते हुए स्कूल और देश का मान बढ़ाने का संदेश दिया।
राज्य में 30 हजार शिक्षकों की भर्ती का निर्णय लिया गया है। जिला परिषद स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा देने पर जोर दिया जा रहा है। मातृभाषा महत्वपूर्ण है और वैश्विक संचार की भाषा के रूप में अंग्रेजी को भी महत्व दिया जाना चाहिए। श्री पवार ने यह भी कहा कि शिक्षकों को इसके लिए भी विशेष प्रयास करना चाहिए। उन्होंने छात्रवृत्ति परीक्षा में सफल विद्यार्थियों की सराहना करते हुए यह आशा भी व्यक्त की कि जिले के सभी तालुकाओं के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति परीक्षा में सफल बनाने के लिए और अधिक प्रयासों की आवश्यकता है।
पालक मंत्री श्री चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि नई शिक्षा नीति अगले साल से 100 फीसदी लागू होगी। पारंपरिक शिक्षा प्रणाली में छात्र की रोजगार योग्यता और शोध प्रवृत्ति की गुंजाइश कम थी। नई शिक्षा नीति में इन पहलुओं पर जोर दिया गया है। शिक्षा नीति को लागू करते समय अगले वर्ष से पहले के तीन वर्ष महत्वपूर्ण माने जायेंगे। इन तीन वर्षों में मातृभाषा के माध्यम से शिक्षा देने पर जोर दिया गया है।
यह शिक्षा के माध्यम से परंपरा पर गौरव जगाने का प्रयास है। संस्कृति पर जोर, स्कूल स्तर से व्यावसायिक शिक्षा और मातृभाषा के माध्यम से शिक्षा पर भी ध्यान दिया जाएगा। शिक्षकों और छात्रों को नई शैक्षिक प्रवृत्तियों पर विचार करने की आवश्यकता है। दुनिया को कुशल जनशक्ति की आवश्यकता है जो जानकार, निपुण और अपने काम के प्रति प्रतिबद्ध हों।
प्रास्ताविक में श्री चव्हाण ने कहा कि जिले में 3 हजार 668 स्कूल हैं और प्रत्येक स्कूल से 2 शिक्षकों को पुरस्कार के लिए चुना गया है। उन्होंने बताया कि जिले के सभी तालुकाओं के छात्रों को छात्रवृत्ति परीक्षा में सफलता सुनिश्चित करने के लिए एक जिलाव्यापी अभियान चलाया जाएगा।
उपमुख्यमंत्री श्री पवार एवं पालकमंत्री श्री पाटिल द्वारा जिला शिक्षक पुरस्कार एवं अध्यक्ष कप पुरस्कार, छात्रवृत्ति परीक्षा गाइड शिक्षक पुरस्कार वितरित किये गये। साथ ही इस अवसर पर छात्रवृत्ति परीक्षा राज्य प्रावीण्य सूची में स्थान पाने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार भी दिये गये।

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