‘कृतार्थ गौरव ग्रंथ’ का किया गया विमोचन
पुणे, सितंबर (हड़पसर एक्सप्रेस न्यूज़ नेटवर्क)
अपनी दूरदर्शिता से 100 करोड़ के मुनाफे का लक्ष्य हरि मुस्तिकर ने रखा, वो हमने हाल ही में पुरा किया। इसके पीछे के योगदान को हम कभी भी नहीं भूलेंगे। यह विचार किर्लोस्कर न्यूमैटिक के चेयरमैन राहुल किर्लोस्कर ने व्यक्त किए।
किर्लोस्कर न्यूमैटिक के पूर्व व्यवस्थापकीय संचालक हरि मुस्तीकर के 78वें जन्मदिन के अवसर पर आयोजित ‘कृतार्थ गौरव ग्रंथ’ के विमोचन समारोह में राहुल किर्लोस्कर बोल रहे थे। इस अवसर पर हरि मुस्तीकर के नाम का डाक टिकट का प्रकाशन राहुल किर्लोस्कर द्वारा किया गया। इस अवसर पर यहां डॉ. बाबा महाराज तराणेकर, पूर्व विधायक उल्हास पवार, मुस्तीकर दंपत्ति, विलास बाबर आदि व्यासपीठ पर उपस्थित थे।
हमने फ़रीदाबाद स्थित केजी खोसला कंपनी का अधिग्रहण किया। इसे चलाना महाराष्ट्रीयन कंपनियों के लिए संभव नहीं है, इस बात का एहसास होने के बाद हरि मुस्तिकर ने उसी दिन आठ सौ लोगों को गोल्डन हैंडशेक देकर कंपनी को पुणे में स्थानांतरित कर दिया। यह बहुत साहसिक और महत्वपूर्ण कदम था। इसका जिक्र राहुल किर्लोस्कर ने अपने भाषण में किया।
हरि मुस्तीकर ने औद्योगिक क्षेत्र में काम करते हुए उनमें आध्यात्मिकता भी आ गई, जिससे उन्हें लोगों को जोड़ने की कला अच्छे से आ गई। यह विचार डॉ. बाबा महाराज तराणेकर ने व्यक्त किये।
पूर्व विधायक उल्हास पवार ने कहा कि हरि मुस्तीकर और मैं त्रिपदी परिवार में नियमित रूप से मिलते थे, इसलिए मुझे विभिन्न क्षेत्रों में उनकी विशेषज्ञता देखने को मिली।
मैं इस भावनात्मक कार्यक्रम से अभिभूत हुआ हूं। किर्लोस्कर न्यूमैटिक की सफलता में राहुल किर्लोस्कर की समय-समय पर मदद और समर्थन मेरे लिए अमूल्य था। उन्होंने समय-समय पर मेरे साथ आकर मेरा हौसला बढ़ाया, जिससे हमें कठिन समय में सफलता मिली। साथ ही मैं यह भी नहीं भूल सकता कि आप सभी ने समय पर मेरा साथ दिया इसलिए मैं सफल हुआ। यह भावना हरि मुस्तीकर ने इस अवसर पर व्यक्त की।
प्रास्ताविक ‘कृतार्थ गौरव ग्रंथ’ के कार्यकारी संपादक विलास बाबर ने किया। मानपत्र का वाचन विजय घमंडे ने किया। सूत्र-संचालन स्वानंद बर्वे और आभार प्रदर्शन मिलिंद मुस्तीकर ने किया।

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