शिक्षकों पर गैर शैक्षणिक कार्यों की जिम्मेदारी कम करने के संबंध में सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा : मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे
मुंबई, सितंबर (महासंवाद)
शिक्षक छात्रों के जीवन को आकार देने, युवा पीढ़ी और राष्ट्र के निर्माण के लिए काम कर रहे हैं। उनकी समस्याओं के समाधान की सरकार की नीति है और शिक्षकों पर गैर शैक्षणिक कार्यों की जिम्मेदारी कम करने के लिए एक समिति नियुक्त की गयी है। इस समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद इस संबंध में निर्णय लिया जाएगा। यह जानकारी मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने दी है।
सरकार ने वर्ष 2022-23 के क्रांतिज्योति सावित्रीमाई फुले राज्य शिक्षक गुणगौरव पुरस्कार के लिए स्कूल शिक्षा स्तर पर श्रेणीवार 108 शिक्षकों का चयन किया है। 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में मुंबई में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री शिंदे ने इन शिक्षकों को सह परिवार सम्मानित किया। इस अवसर पर यहां उपमुख्यमंत्री अजीत पवार, विधानसभा अध्यक्ष एड. राहुल नार्वेकर, स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक केसरकर, शिक्षक विधायक सर्वश्री कपिल पाटिल, विक्रम काले, किरण सरनाईक, स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव रनजीतसिंह देओल, शिक्षण आयुक्त सूरज मांढरे के साथ पुरस्कार विजेता शिक्षक और उनके परिजन उपस्थित थे।
समाज की नि:स्वार्थ भावना से और ईमानदारी के साथ सेवा करनेवाले और शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों की योग्यता को प्रोत्साहित करने और उनके गुणों का उचित रूप से सम्मानित करने के उद्देश्य से ही राज्य आदर्श शिक्षक पुरस्कार की घोषणा की जाती है।
वर्ष 2021-22 से राज्य आदर्श शिक्षक पुरस्कार के मापदण्डों में संशोधन कर उक्त पुरस्कार क्रांतिज्योति सावित्रीमाई फुले राज्य शिक्षक गुणगौरव पुरस्कार के नाम से दिया जा रहा है। पुरस्कार में एक लाख दस हजार रुपये, एक पदक और एक प्रमाण पत्र शामिल है।
पुरस्कार विजेता शिक्षकों के कार्यों की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री श्री शिंदे ने कहा, राज्य सरकार शिक्षा क्षेत्र का स्तर ऊंचा उठाने के लिए नई-नई योजनाएं और पहल लागू कर रही है। इसमें शिक्षक एक महत्वपूर्ण घटक है।
माता-पिता के बाद गुरुजनों को महत्व दिया जाता है क्योंकि वे ज्ञान देने का कार्य करते हैं। सरकार का उद्देश्य शिक्षा क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन लाना है और शिक्षा के महत्व को बढ़ाने के लिए सरकार के माध्यम से आवश्यक निधि उपलब्ध कराई जा रही है। इस अवसर पर उन्होंने आशा व्यक्त की कि शिक्षक अच्छे विद्यार्थी बनाकर और अधिक योगदान देंगे। केंद्र सरकार का राज्य को समर्थन प्राप्त है और उसके माध्यम से राज्य में आम लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव निर्माण करनेवाली विभिन्न योजनाएं लागू की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं को आम लोगों तक पहुंचाने में शिक्षा विभाग और शिक्षकों का भी काफी योगदान रहा।
शिक्षक छात्रों के जीवन को आकार देने, युवा पीढ़ी और राष्ट्र के निर्माण के लिए काम कर रहे हैं। उनकी समस्याओं के समाधान की सरकार की नीति है और शिक्षकों पर गैर शैक्षणिक कार्यों की जिम्मेदारी कम करने के लिए एक समिति नियुक्त की गयी है। इस समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद इस संबंध में निर्णय लिया जाएगा। यह जानकारी मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने दी है।
सरकार ने वर्ष 2022-23 के क्रांतिज्योति सावित्रीमाई फुले राज्य शिक्षक गुणगौरव पुरस्कार के लिए स्कूल शिक्षा स्तर पर श्रेणीवार 108 शिक्षकों का चयन किया है। 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में मुंबई में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री शिंदे ने इन शिक्षकों को सह परिवार सम्मानित किया। इस अवसर पर यहां उपमुख्यमंत्री अजीत पवार, विधानसभा अध्यक्ष एड. राहुल नार्वेकर, स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक केसरकर, शिक्षक विधायक सर्वश्री कपिल पाटिल, विक्रम काले, किरण सरनाईक, स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव रनजीतसिंह देओल, शिक्षण आयुक्त सूरज मांढरे के साथ पुरस्कार विजेता शिक्षक और उनके परिजन उपस्थित थे।
समाज की नि:स्वार्थ भावना से और ईमानदारी के साथ सेवा करनेवाले और शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों की योग्यता को प्रोत्साहित करने और उनके गुणों का उचित रूप से सम्मानित करने के उद्देश्य से ही राज्य आदर्श शिक्षक पुरस्कार की घोषणा की जाती है।
वर्ष 2021-22 से राज्य आदर्श शिक्षक पुरस्कार के मापदण्डों में संशोधन कर उक्त पुरस्कार क्रांतिज्योति सावित्रीमाई फुले राज्य शिक्षक गुणगौरव पुरस्कार के नाम से दिया जा रहा है। पुरस्कार में एक लाख दस हजार रुपये, एक पदक और एक प्रमाण पत्र शामिल है।
पुरस्कार विजेता शिक्षकों के कार्यों की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री श्री शिंदे ने कहा, राज्य सरकार शिक्षा क्षेत्र का स्तर ऊंचा उठाने के लिए नई-नई योजनाएं और पहल लागू कर रही है। इसमें शिक्षक एक महत्वपूर्ण घटक है।
माता-पिता के बाद गुरुजनों को महत्व दिया जाता है क्योंकि वे ज्ञान देने का कार्य करते हैं। सरकार का उद्देश्य शिक्षा क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन लाना है और शिक्षा के महत्व को बढ़ाने के लिए सरकार के माध्यम से आवश्यक निधि उपलब्ध कराई जा रही है। इस अवसर पर उन्होंने आशा व्यक्त की कि शिक्षक अच्छे विद्यार्थी बनाकर और अधिक योगदान देंगे। केंद्र सरकार का राज्य को समर्थन प्राप्त है और उसके माध्यम से राज्य में आम लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव निर्माण करनेवाली विभिन्न योजनाएं लागू की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं को आम लोगों तक पहुंचाने में शिक्षा विभाग और शिक्षकों का भी काफी योगदान रहा।
पुरस्कृत शिक्षक राज्य सरकार के ब्रांड एम्बेसडर बनें : उपमुख्यमंत्री अजीत पवार
उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने कहा कि सुसंस्कृत समाज के निर्माण का उपाय शिक्षा है, इसलिए शिक्षा को भविष्य के लिए निवेश के रूप में देखना आवश्यक है।
पुरस्कार विजेता शिक्षकों का कार्य एक मजबूत राष्ट्र के निर्माण में सहायक होना चाहिए। साथ ही यह अन्य शिक्षकों के लिए भी प्रेरणा होनी चाहिए। यह कहते हुए उन्होंने आशा व्यक्त की कि पुरस्कृत शिक्षक राज्य सरकार के ब्रांड एंबेसडर बनें। उन्होंने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षकों को भविष्य में भी स्वयं को अपडेट एवं अपग्रेड करते रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को दिये जानेवाले पुरस्कार अच्छे कार्यों को प्रोत्साहित करते हैं।
श्री.पवार ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा क्षेत्र पर सबसे ज्यादा खर्च कर रही है। इस लागत को पहचाना जाना चाहिए। स्कूलों को आधारभूत संरचना, साफ-सफाई, सुखद वातावरण की जरूरत है, इसलिए उद्यमियों के सामाजिक उत्तरदायित्व कोष के माध्यम से भी काम करने पर सरकार विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, इसका श्रेय महिला शिक्षा की प्रणेता सावित्रीबाई फुले को जाता है और उनके नाम पर दिए गए पुरस्कार ने शिक्षकों की जिम्मेदारी बढ़ा दी है। पुणे के भिडेवाडा में सावित्रीबाई का स्मारक बनाया जाएगा।
विधानसभा अध्यक्ष एडवोकेट नार्वेकर ने शिक्षकों के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि नए प्रगतिशील भारत के निर्माण में शिक्षकों की अहम भूमिका है। उन्होंने शिक्षकों के कार्य का महिमामंडन इन शब्दों में किया कि जो शिक्षक पढ़ना सिखाता है वह समाज का निर्माण और उद्धार करता है। समाज में शिक्षकों को विशेष दर्जा प्राप्त है और विधान परिषद में शिक्षक प्रतिनिधियों के लिए सीटें आरक्षित हैं।
शिक्षकों के लंबित प्रश्नों का यथाशीघ्र समाधान किया जाएगा : दीपक केसरकर
शिक्षक अगली पीढ़ी के निर्माण का पवित्र कार्य कर रहे हैं। स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक केसरकर ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि यह पुरस्कार उनके काम को सम्मानित करने के लिए दिया जा रहा है। स्कूल शिक्षा विभाग विद्यार्थी केन्द्रित होकर कार्य कर रहा है। इसमें शिक्षकों की भूमिका को अहम बताते हुए श्री केसरकर ने कहा कि शिक्षकों की लंबित समस्याओं का यथाशीघ्र समाधान करना सरकार की नीति है। उन्होंने कहा कि विभाग की अनुमति के बिना जनगणना और चुनाव कार्य के अलावा अन्य गैर शैक्षणिक कार्य विभाग की अनुमति के बिना नहीं थोपे जाएं। इसके लिए प्रधान सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी नियुक्त की गयी है और उसकी रिपोर्ट आने के बाद सरकार कोई निर्णय लेगी। वहीं, उन्होंने बताया कि शिक्षकों का मुख्यालय कितनी दूरी पर हो, यह भी जल्द ही तय किया जायेगा।
स्कूलों में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए उद्योगों के सामाजिक उत्तरदायित्व निधि का उपयोग क्या किया जा सकता है, इस बारे में विभाग के माध्यम से एक प्रस्ताव बनाया गया है। सरकार से मंजूरी मिलने के बाद पांच से दस वर्षों के लिए स्कूलों में सुविधाएं विकसित करने की जिम्मेदारी उद्योगों को दी जा सकती है।
शिक्षा विभाग द्वारा छात्रों एवं शिक्षकों के हित में अनेक निर्णय लिये गये हैं। इसमें मुख्य रूप से 61 हजार शिक्षकों की सब्सिडी की समस्या का समाधान किया गया, पहले चरण में 30 हजार शिक्षकों की पद भर्ती की प्रक्रिया शुरू की गई, शिक्षकों के लगातार हो रहे तबादलों पर रोक लगा दी गई, शिक्षणसेवक, ग्रंथपाल, प्रयोगशाला सहायकों आदि के मानधन और छात्रों की छात्रवृत्ति में भी पर्याप्त वृद्धि की गई। छात्रों की पीठ पर पड़ा किताबों का बोझ हल्का कर दिया। उन्होंने बताया कि आठवीं तक के विद्यार्थियों को सरकार के माध्यम से पोशाक, जूते, मोजे उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति में मातृभाषा के माध्यम से शिक्षा पर जोर दिया गया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपने के अनुसार एक मजबूत भारत के निर्माण और नई पीढ़ी को सशक्त बनाने में महाराष्ट्र अग्रणी होगा। उन्होंने यह विश्वास व्यक्त किया।
शिक्षा आयुक्त सूरज मांढरे ने प्रास्ताविक द्वारा शिक्षा प्रणाली में रहनेवाले शिक्षकों का महत्व रेखांकित करते हुए शिक्षक पुरस्कार हेतु चयन प्रक्रिया के महत्व की जानकारी दी।
उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने कहा कि सुसंस्कृत समाज के निर्माण का उपाय शिक्षा है, इसलिए शिक्षा को भविष्य के लिए निवेश के रूप में देखना आवश्यक है।
पुरस्कार विजेता शिक्षकों का कार्य एक मजबूत राष्ट्र के निर्माण में सहायक होना चाहिए। साथ ही यह अन्य शिक्षकों के लिए भी प्रेरणा होनी चाहिए। यह कहते हुए उन्होंने आशा व्यक्त की कि पुरस्कृत शिक्षक राज्य सरकार के ब्रांड एंबेसडर बनें। उन्होंने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षकों को भविष्य में भी स्वयं को अपडेट एवं अपग्रेड करते रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को दिये जानेवाले पुरस्कार अच्छे कार्यों को प्रोत्साहित करते हैं।
श्री.पवार ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा क्षेत्र पर सबसे ज्यादा खर्च कर रही है। इस लागत को पहचाना जाना चाहिए। स्कूलों को आधारभूत संरचना, साफ-सफाई, सुखद वातावरण की जरूरत है, इसलिए उद्यमियों के सामाजिक उत्तरदायित्व कोष के माध्यम से भी काम करने पर सरकार विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, इसका श्रेय महिला शिक्षा की प्रणेता सावित्रीबाई फुले को जाता है और उनके नाम पर दिए गए पुरस्कार ने शिक्षकों की जिम्मेदारी बढ़ा दी है। पुणे के भिडेवाडा में सावित्रीबाई का स्मारक बनाया जाएगा।
विधानसभा अध्यक्ष एडवोकेट नार्वेकर ने शिक्षकों के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि नए प्रगतिशील भारत के निर्माण में शिक्षकों की अहम भूमिका है। उन्होंने शिक्षकों के कार्य का महिमामंडन इन शब्दों में किया कि जो शिक्षक पढ़ना सिखाता है वह समाज का निर्माण और उद्धार करता है। समाज में शिक्षकों को विशेष दर्जा प्राप्त है और विधान परिषद में शिक्षक प्रतिनिधियों के लिए सीटें आरक्षित हैं।
शिक्षकों के लंबित प्रश्नों का यथाशीघ्र समाधान किया जाएगा : दीपक केसरकर
शिक्षक अगली पीढ़ी के निर्माण का पवित्र कार्य कर रहे हैं। स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक केसरकर ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि यह पुरस्कार उनके काम को सम्मानित करने के लिए दिया जा रहा है। स्कूल शिक्षा विभाग विद्यार्थी केन्द्रित होकर कार्य कर रहा है। इसमें शिक्षकों की भूमिका को अहम बताते हुए श्री केसरकर ने कहा कि शिक्षकों की लंबित समस्याओं का यथाशीघ्र समाधान करना सरकार की नीति है। उन्होंने कहा कि विभाग की अनुमति के बिना जनगणना और चुनाव कार्य के अलावा अन्य गैर शैक्षणिक कार्य विभाग की अनुमति के बिना नहीं थोपे जाएं। इसके लिए प्रधान सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी नियुक्त की गयी है और उसकी रिपोर्ट आने के बाद सरकार कोई निर्णय लेगी। वहीं, उन्होंने बताया कि शिक्षकों का मुख्यालय कितनी दूरी पर हो, यह भी जल्द ही तय किया जायेगा।
स्कूलों में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए उद्योगों के सामाजिक उत्तरदायित्व निधि का उपयोग क्या किया जा सकता है, इस बारे में विभाग के माध्यम से एक प्रस्ताव बनाया गया है। सरकार से मंजूरी मिलने के बाद पांच से दस वर्षों के लिए स्कूलों में सुविधाएं विकसित करने की जिम्मेदारी उद्योगों को दी जा सकती है।
शिक्षा विभाग द्वारा छात्रों एवं शिक्षकों के हित में अनेक निर्णय लिये गये हैं। इसमें मुख्य रूप से 61 हजार शिक्षकों की सब्सिडी की समस्या का समाधान किया गया, पहले चरण में 30 हजार शिक्षकों की पद भर्ती की प्रक्रिया शुरू की गई, शिक्षकों के लगातार हो रहे तबादलों पर रोक लगा दी गई, शिक्षणसेवक, ग्रंथपाल, प्रयोगशाला सहायकों आदि के मानधन और छात्रों की छात्रवृत्ति में भी पर्याप्त वृद्धि की गई। छात्रों की पीठ पर पड़ा किताबों का बोझ हल्का कर दिया। उन्होंने बताया कि आठवीं तक के विद्यार्थियों को सरकार के माध्यम से पोशाक, जूते, मोजे उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति में मातृभाषा के माध्यम से शिक्षा पर जोर दिया गया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपने के अनुसार एक मजबूत भारत के निर्माण और नई पीढ़ी को सशक्त बनाने में महाराष्ट्र अग्रणी होगा। उन्होंने यह विश्वास व्यक्त किया।
शिक्षा आयुक्त सूरज मांढरे ने प्रास्ताविक द्वारा शिक्षा प्रणाली में रहनेवाले शिक्षकों का महत्व रेखांकित करते हुए शिक्षक पुरस्कार हेतु चयन प्रक्रिया के महत्व की जानकारी दी।

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