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महाराष्ट्र के पांच शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्रदान

राष्ट्रपति द्वारा 75 शिक्षकों को विशेष योगदान हेतु राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्रदान
नई दिल्ली, सितंबर (महासंवाद)
स्कूली, उच्च और कौशल शिक्षा को अधिक सुलभ और गुणात्मक बनाने के लिए सूचना और प्रौद्योगिकी का प्रभावी ढंग से उपयोग करनेवाले महाराष्ट्र के पांच शिक्षकों को राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू द्वारा ‘राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया।
शैक्षिक मोबाइल ऐप, उच्च गुणवत्तावाली ई-सामग्री निर्माण, दृश्य और श्रव्य सामग्री का उत्पादन, कंप्यूटर, टेलीविजन, यूट्यूब, आकाशवाणी, सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर आदि का उपयोग करके स्कूली शिक्षा को सुविधाजनक, गुणात्मक एवं शोधपरक शिक्षकों को सम्मानित किया गया।
‘राष्ट्रीय शिक्षक दिवस’ के अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा नई दिल्ली के विज्ञान भवन में ‘राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार’ वितरण समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय स्कूल शिक्षा राज्यमंत्री अन्नपुर्णा देवी, डॉ. सुभाष सरकार, डॉ. राजकुमार रंजन सिंह के साथ अन्य वरिष्ठ अधिकारी व्यासपीठ पर उपस्थित थे। 
इस अवसर पर महाराष्ट्र के पांच शिक्षकों को शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए वर्ष 2023 के ‘राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। इस स्कूल अनुभाग में आंबेगांव, पुणे की जिला परिषद स्कूल की मृणाल नंदकिशोर गांजाले, उच्च शिक्षा विभाग में वीजेटीआई मुंबई के केशव काशिनाथ सांगले, धुले जिले के शिरपुर तालुका में स्थित आरसी पटेल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजूकेशन और अनुसंधान संस्था के डॉ. चंद्रगौडा रावसाहब पाटिल, आईआईटी मुंबई के डॉ. राघवन बी. सुनोज साथ ही कौशल विकास और उद्यमिता विभाग में मुंबई के लोअर परेल के गवर्नमेंट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की शिल्प निदेशक श्रीमती स्वाति देशमुख शिक्षक शामिल हैं।
श्रीमती मृणाल गांजाले
पुणे के आंबेगांव तालुका जिला परिषद आदर्श प्राथमिक विद्यालय, पिंपलगांव महालुंगे की उद्यमी अध्यापिका मृणाल गांजाले-शिंदे को वर्ष 2023 के लिए स्कूल विभाग में ‘राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2023’ से सम्मानित किया गया।
इस पुरस्कार के लिए भारत से 50 शिक्षकों का और महाराष्ट्र से एक शिक्षक को चुना गया है। उन्हें इससे पहले वर्ष 2019 का राष्ट्रीय आय.सी.टी. पुरस्कार व वर्ष 2022 का राज्य आदर्श शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
डॉ. राघवन बी सुनोज
प्रो. राघवन बी. सुनोज तिरुवनंतपुरम् के मूल निवासी हैं और आईआईटी बॉम्बे में रसायन विज्ञान के प्रोफेसर हैं और उन्हें अध्यापन और अनुसंधान के लिए उच्च शिक्षा विभाग द्वारा वर्ष 2023 के राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वह रसायन विज्ञान में स्वर्ण पदक विजेता हैं और उन्हें 2001 में भारतीय विज्ञान संस्थान बैंगलोर से सर्वश्रेष्ठ प्रबंध का पुरस्कार प्राप्त हुआ है। वे वर्ष 2012 से रसायन विज्ञान के प्रोफेसर हैं। वर्ष 2019 के शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार सहित कई पुरस्कार प्राप्त हुए हैं।
प्रो. केशव सांगले 
प्रो. केशव सांगले को उच्च शिक्षा विभाग में वास्तुकला (सिविल) इंजीनियरिंग शैक्षणिक योगदान, अनुसंधान, आविष्कार, छात्र मार्गदर्शन, शैक्षिक प्रशासन, बुनियादी ढांचे के निर्माण करने के लिए संस्था, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर की गई मदद, राज्य व देश में अधिक से अधिक विद्यार्थियों को अकादमिक रूप से सक्षम करने हेतु वर्ष 2023 का उच्च शिक्षा विभाग में राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। 

डॉ. चंद्रगौडा रावसाहेब पाटिल
डॉ. चंद्रगौड़ा रावसाहब पाटिल को उच्च शिक्षा में प्रौद्योगिकी के उपयोग, सामाजिक रूप से उपयोगी अनुसंधान और अभिनव व छात्र-उन्मुख शिक्षण विधियों के उपयोग के लिए उच्च शिक्षा विभाग द्वारा वर्ष 2023 के लिए राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
श्रीमती स्वाति योगेश देशमुख
स्वाति योगेश देशमुख हस्तशिल्प (क्राफ्ट्स कौशल) प्रशिक्षक अत्यधिक समर्पित और कुशल कंप्यूटर कौशल प्रशिक्षण में उनके उल्लेखनीय कैरियर को मद्देनजर रखते हुए श्रीमती स्वाति योगेश देशमुख को राष्ट्रपति द्वारा वर्ष 2023 के लिए राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 22 वर्षों के प्रशिक्षण और परामर्श अनुभव के साथ, उन्हें कंप्यूटर से संबंधित विषयों में छात्रों को उत्कृष्टता प्राप्त करने में मदद करने में उनकी विशेषज्ञता के लिए पहचाना गया। उन्होंने अब तक 500 से अधिक प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण और सहायता देकर समावेशिता और समर्पण दिखाया है।
कठोर और पारदर्शी चयन प्रक्रिया के माध्यम से चुने गए देश के सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्रदान करने के लिए शिक्षा मंत्रालय का स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग की ओर से डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन पर हर वर्ष शिक्षक दिवस के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर यह कार्यक्रम पूरे भारत में आयोजित किया जाता है। राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार का उद्देश्य देश में शिक्षकों के उत्कृष्ट योगदान को पहचानना और उन शिक्षकों को सम्मानित करना है जिन्होंने न केवल शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार किया है बल्कि अपनी निष्ठा और समर्पण से अपने छात्रों के जीवन को समृद्ध बनाया है। इस वर्ष से, राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार का दायरा बढ़ाकर इसमें उच्च शिक्षा विभाग और कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के शिक्षकों को शामिल किया गया है।
इस वर्ष 50 स्कूली शिक्षकों, उच्च शिक्षा विभाग के 13 शिक्षकों और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के 12 शिक्षकों को इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। पुरस्कार में योग्यता प्रमाण पत्र, 50,000 रुपये और एक पदक पुरस्कार का स्वरुप है।
पुरस्कार विजेताओं के बारे में जानकारी-
श्रीमती मृणाल गांजाले
श्रीमती मृणाल गांजाले-शिंदे ने अध्ययन-अध्यापन प्रक्रिया में सूचना प्रौद्योगिकी का अभिनव उपयोग, दुनिया भर के विद्यार्थियों को वर्चुअल तरीके से शिक्षा का आदान-प्रदान, गेमी फिकेशन इन एजूकेशन परियोजना, ऐसे विभिन्न प्रौद्योगिकियों पर आधारित प्रयोग किए। ऑनलाइन शिक्षा, दूसरे देशों के स्कूलों से विद्यार्थियों का सीधा संवाद, वेबसाइट मोबाइल एप्लीकेशन का उपयोग, राज्य के अन्य शिक्षकों को प्रशिक्षण, कोरोना के दौरान स्कूली विद्यार्थियों को ऑनलाइन आधुनिक शिक्षा दी। उनका वर्ष 2019-2020 इस वर्ष में कक्षा पांचवीं में 17 विद्यार्थी छात्रवृत्तिधारक और 6 विद्यार्थी नवोदय 2 विद्यालय के लिए चयन पात्र ठहरें। प्रधानमंत्री विद्या वाहिनी पर शिक्षकों के मार्गदर्शन पर सत्र में सीआईईटी-एनसीईआरटी के माध्यम से एक विशेषज्ञ मार्गदर्शक के रूप में काम किया, पिछले साल माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नडेला ने भी दिल्ली में उनके शैक्षिक कार्यों की सराहना करके सम्मान किया। राष्ट्रीय आईसीटी मेले में भी उन्हें पुरस्कार मिल चुका है।
डॉ. राघवन सुनोज
डॉ. सुनोज ने अपनी प्राथमिक शिक्षा सेंट जोसेफ स्कूल से पूरी की और यूनिवर्सिटी कॉलेज, तिरुवनंतपुरम् से पढ़ाई की। डॉ. सुनोज ने भारतीय विज्ञान संस्थान, बैंगलोर से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी में शोध करने के बाद, वह 29 साल की उम्र में लेक्चरर के रूप में आईआईटी बॉम्बे में शामिल हो गए। डॉ. सुनोज को वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीआईएसआर) द्वारा 2019 में प्रतिष्ठित ‘शांति स्वरूप भटनागर विज्ञान और प्रौद्योगिकी पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया है।
प्रो. केशव सांगले
प्रो. सांगले वर्तमान में वीरमाता जीजाबाई इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मुंबई में स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर व विभाग प्रमुख और संस्था के अकादमिक डीन के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने गवर्नमेंट टेक्निकल कॉलेज, पुणे से सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया, ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, कराड से किया। इसके बाद उन्होंने अपनी पीएचडी पूरी की।
डॉ. चंद्रगौडा पाटिल
पिछले दो दशकों से डॉ.पाटिल छात्रों को अपनी गति से जटिल विषयों का पता लगाने में सक्षम बनाने के लिए नवीन प्रौद्योगिकी-आधारित शिक्षण उपकरण, शैक्षिक सामग्री और शिक्षण विधियों को विकसित करने का प्रयास कर रहे हैं। डॉ. पाटिल द्वारा विकसित एक्स-कोलॉजी और कैलफार्म नामक इंटरएक्टिव सॉफ्टवेयर दवाई निर्माण, चिकित्सा, पैरामेडिकल और पशु चिकित्सा क्षेत्रों में अध्ययन करनेवाले छात्रों के लिए एक वरदान रहा है। इस सॉफ़्टवेयर के उपयोग ने शैक्षिक उद्देश्यों के लिए विच्छेदन को रोककर देश में हजारों जानवरों की जान बचाई है। इससे पहले डॉ.पाटिल को होम्योपैथी के क्षेत्र में अनुसंधान कार्य के बारे में भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा दिया जानेवाला एक लाख रुपयों का युवा वैज्ञानिक पुरस्कार प्राप्त करनेवाले डॉ.पाटिल को कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुए हैं।
श्रीमती स्वाति देशमुख
श्रीमती स्वाति देशमुख ने 4 सितंबर 2010 से मुंबई के सरकारी आईटीआई लोअर परेल में कंप्यूटर ऑपरेटर और प्रोग्रामिंग असिस्टेंट (सीओपीए) ट्रेड के क्षेत्र में एक कौशल प्रशिक्षक के रूप में अपना कैरियर शुरू किया। उन्होंने अपने संगठन की वेबसाइट विकसित करके, शैक्षिक यूट्यूब वीडियो बनाकर और कंप्यूटर-आधारित प्रशिक्षण (सीबीटी) मॉड्यूल डिजाइन करके इसकी तकनीकी उन्नति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसके अतिरिक्त, प्रशिक्षुओं के लिए एक ई-लाइब्रेरी स्थापित की है। डिजिटल शिक्षण संसाधनों को बढ़ावा दिया है।  श्रीमती देशमुख ने संस्था में एक हाई-टेक, इंटरनेट-सक्षम कंप्यूटर लैब की स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और प्रशिक्षुओं को उनकी शिक्षा के लिए अत्याधुनिक तकनीक और संसाधन उपलब्ध कराने के साथ-साथ विविध सक्षम छात्रों को सशक्त बनाने में रोजगार सुरक्षित करने के लिए आवश्यक कौशल हासिल करने के लिए विकलांग छात्रों को प्रशिक्षण प्रदान कर रही है।

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