वास्तु खरीदने से पहले या वास्तु खरीदने के बाद या फिर पुरानी वास्तु हो तो वास्तु विजिट बहुत से लोग करते हैं। निःसंदेह ऐसा किया जाना चाहिए। मैं यह वास्तु बेचने जा रहा हूं या यह किराए का घर है या मैं घर बदलने जा रहा हूं। यह कारण काम नहीं करता।
आजकल वास्तु विजिट केवल दिशाओं पर आधारित नहीं होता बल्कि स्कैनिंग मशीन द्वारा वास्तु विजिट की जाती है और प्राप्त हुई इसकी रिपोर्ट में सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा और उसके प्रतिशत को भी समझा जाता है। ऐसा करने पर भी वास्तु दर्शन समाप्त नहीं होता, इस वास्तु पर किस ग्रह का क्या प्रभाव है, यह भी स्कैनिंग में समझ में आ जाता है। कौन सा रंग प्रयोग करें, कौन सा रत्न प्रयोग करना चाहिए। क्या वास्तु के लिए उस वास्तु में ईएमएफ रेडिएशन है? यह सभी समझ में आ जाता है।
अगर व्यापार (बिजनेस) के बारे में वास्तु दर्शन हो तो पता चलता है कि बिजनेस कैसे चलेगा या फिर अगर आप बिजनेस बदलना चाहते हैं तो किस तरह का बिजनेस करना चाहिए, ये भी समझ में आता है। जब कारोबार ठीक नहीं चल रहा हो तो जगह बदलना गलत है तो वास्तु स्कैनिंग करके देखा जा सकता है कि वहां किस तरह की नकारात्मक ऊर्जा है ये देखा जा सकता है। उस ऊर्जा को निष्क्रिय किया जा सकता है। स्टैंडर्ड न्यूबलाइज़ आरएस का उपयोग करके एक और बात यह है कि यदि उसी स्थान पर कोई अन्य व्यक्ति समान व्यवसाय करता है तो तेजी से कारोबार चलता है तो कुछ लोग पूछते हैं कि वास्तु शास्त्र को क्यों देखा जाए? उसके लिए जो बिजनेस कर रहा है उनका बॉडी ऑरा स्कैनिंग टेस्ट करना जरूरी है उससे यह पता चल जाता है कि उस व्यक्ति में क्या समस्या है। उस परेशानी की वजह से उनका बिजनेस नहीं चल रहा है। कई बार ऐसा होता है कि हमारा आलस्य या काम के प्रति जिम्मेदारी नहीं लेना या कड़ी मेहनत से परहेज ये सब भी स्कैनिंग में भी झलकता है। ऐसा करने से सभी को बचना चाहिए।
मान लीजिए किसी वास्तु में कोई समस्या है तो समाधान के तौर पर स्टैंडर्ड न्यूबलाइज का प्रयोग करना चाहिए। यह किसी विशेषज्ञ वास्तु शास्त्री से पूछकर ही करना चाहिए। मन से कुछ मत करो। इन्हें वास्तु विजिट के रूप में इसे करना जरुरी है। आजकल बहुत से लोग स्कैनिंग की वास्तु विजिट करके लेते हैं। वे आपकी समस्याओं को समझते हैं और उनका समाधान करते हैं।
आजकल वास्तु विजिट केवल दिशाओं पर आधारित नहीं होता बल्कि स्कैनिंग मशीन द्वारा वास्तु विजिट की जाती है और प्राप्त हुई इसकी रिपोर्ट में सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा और उसके प्रतिशत को भी समझा जाता है। ऐसा करने पर भी वास्तु दर्शन समाप्त नहीं होता, इस वास्तु पर किस ग्रह का क्या प्रभाव है, यह भी स्कैनिंग में समझ में आ जाता है। कौन सा रंग प्रयोग करें, कौन सा रत्न प्रयोग करना चाहिए। क्या वास्तु के लिए उस वास्तु में ईएमएफ रेडिएशन है? यह सभी समझ में आ जाता है।
अगर व्यापार (बिजनेस) के बारे में वास्तु दर्शन हो तो पता चलता है कि बिजनेस कैसे चलेगा या फिर अगर आप बिजनेस बदलना चाहते हैं तो किस तरह का बिजनेस करना चाहिए, ये भी समझ में आता है। जब कारोबार ठीक नहीं चल रहा हो तो जगह बदलना गलत है तो वास्तु स्कैनिंग करके देखा जा सकता है कि वहां किस तरह की नकारात्मक ऊर्जा है ये देखा जा सकता है। उस ऊर्जा को निष्क्रिय किया जा सकता है। स्टैंडर्ड न्यूबलाइज़ आरएस का उपयोग करके एक और बात यह है कि यदि उसी स्थान पर कोई अन्य व्यक्ति समान व्यवसाय करता है तो तेजी से कारोबार चलता है तो कुछ लोग पूछते हैं कि वास्तु शास्त्र को क्यों देखा जाए? उसके लिए जो बिजनेस कर रहा है उनका बॉडी ऑरा स्कैनिंग टेस्ट करना जरूरी है उससे यह पता चल जाता है कि उस व्यक्ति में क्या समस्या है। उस परेशानी की वजह से उनका बिजनेस नहीं चल रहा है। कई बार ऐसा होता है कि हमारा आलस्य या काम के प्रति जिम्मेदारी नहीं लेना या कड़ी मेहनत से परहेज ये सब भी स्कैनिंग में भी झलकता है। ऐसा करने से सभी को बचना चाहिए।
मान लीजिए किसी वास्तु में कोई समस्या है तो समाधान के तौर पर स्टैंडर्ड न्यूबलाइज का प्रयोग करना चाहिए। यह किसी विशेषज्ञ वास्तु शास्त्री से पूछकर ही करना चाहिए। मन से कुछ मत करो। इन्हें वास्तु विजिट के रूप में इसे करना जरुरी है। आजकल बहुत से लोग स्कैनिंग की वास्तु विजिट करके लेते हैं। वे आपकी समस्याओं को समझते हैं और उनका समाधान करते हैं।
॥ शुभम् भवतु॥
डॉ. प्रसाद गजेंद्रगडकर
(ज्योतिष व वास्तुशास्त्र विशेषज्ञ)
संपर्क क्रमांक- 9226106027 / 9822325930

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