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मराठा समुदाय को कुनबी प्रमाणपत्र देने की प्रक्रिया में तेजी लाने के मुख्यमंत्री के निर्देश

अपर मुख्य सचिव समिति को एक माह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा
मुंबई, सितंबर (महासंवाद)
मराठवाड़ा में मराठा समुदाय को कुनबी प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया के लिए नियुक्त अपर मुख्य सचिव की समिति को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए और एक महीने के भीतर अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करनी चाहिए, इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यह निर्देश मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने दिए हैं।
मराठा आरक्षण और समुदाय को सुविधा देने के लिए पर नियुक्त किए गए राज्य मंत्रिमंडल उप-समिति की बैठक सह्याद्री अतिथगृह में हुई। उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री अजीत पवार, उपसमिति के अध्यक्ष उच्च शिक्षा मंत्री चंद्रकांतदादा पाटिल, समिति के अन्य सदस्य राजस्व मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल, उद्योग मंत्री उदय सामंत, राज्य उत्पाद शुल्क मंत्री शंभूराज देसाई, अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री अतुल सावे, सार्वजनिक बांधकाम मंत्री दादा भुसे, ग्रामविकास मंत्री गिरीश महाजन, सांसद उदयनराजे भोसले, विधायक आशीष शेलार, महाधिवक्ता बिरेंद्र सराफ, विशेष सलाहकार समिति के सदस्य नरेंद्र पाटिल, योगेश कदम, प्रवीण दरेकर, मुख्य सचिव मनोज सौनिक, मंत्रालयीन सचिव और वरिष्ठ अधिकारी इस अवसर पर उपस्थित थे। 
मुख्यमंत्री ने मराठवाड़ा के राजस्व और शैक्षणिक रिकॉर्ड की जांच का काम भी तुरंत पूरा करने का निर्देश दिया। इस समिति द्वारा मराठवाड़ा के पांच जिलों से कुनबी समुदाय के बारे में जानकारी एकत्र की गई है। इसके अलावा हैदराबाद से भी निज़ाम के पुराने रिकॉर्ड की तत्काल जांच की जा रही है। यह जानकारी राजस्व विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजगोपाल देवरा ने बैठक में दी। कुनबी पंजीकरणवालों की वंशावली की जांच करायी जायेगी। 
आरंभ में सामाजिक न्याय सचिव सुमंत भांगे ने प्रास्ताविक में मराठा आरक्षण को लेकर सरकार द्वारा की गयी कार्रवाई की विस्तृत जानकारी दी। 
मराठा समुदाय के लिए विभिन्न फैसले
हम मराठा समुदाय को आरक्षण दिलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और गठबंधन सरकार के सत्ता में आने के बाद, हमने युवाओं को नौकरियों, शिक्षा, छात्रवृत्ति और उद्योग धंधों के लिए ऋण और वित्तीय सहायता के माध्यम से मदद की है। जबकि मराठा समुदाय की समस्याओं को हल करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, किसी को भी राजनीतिक स्वार्थ के लिए समुदाय को भड़काना नहीं चाहिए। बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ने मराठा समुदाय के लिए किए गए फैसलों की जानकारी दी। 
मराठा समुदाय के छात्रों को ओबीसी की तरह शैक्षणिक रियायतें और सुविधाएं दिए जाने की बात कहते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सारथी संस्था के माध्यम से उच्च शिक्षा के लिए फेलोशिप, छात्रवृत्ति, एमपीएससी और यूपीएससी और अन्य प्रतियोगी परीक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम लागू किए जा रहे हैं। अब तक करीब 12 हजार छात्रों को 44 58 करोड़ रुपये खर्च करके प्रतियोगी परीक्षा प्रशिक्षण दिया गया है। 
सारथी को मजबूत किया
रोजगार एवं स्व-रोजगार हेतु कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित कर मराठा समाज के 27 हजार 347 विद्यार्थियों को लाभान्वित किया गया। राज्य में सारथी के 8 विभागीय कार्यालयों के लिए कोल्हापुर, पुणे, नासिक, खारघर, छत्रपति संभाजीनगर, लातूर, अमरावती, नागपुर में सरकार ने सारथी को मुफ्त जमीन दी है। सारथी मुख्यालय के लिए पुणे में जमीन उपलब्ध करायी गयी है। 42 करोड़ की सब्सिडी उपलब्ध करायी गयी। मुख्यालय भवन का निर्माण पांचवीं मंजिल तक पूरा हो चुका है। नासिक में विभागीय कार्यालय की जी प्लस 20 मंजिला इमारत प्रस्तावित है। सरकार ने सात विभागीय कार्यालयों के लिए 1015 करोड़ रुपये के कार्यों को मंजूरी दी है। 
पंजाबराव देशमुख छात्रावास निर्वाह भत्ता योजना, विदेशी विश्वविद्यालयों में उच्च अध्ययन के लिए छात्रवृत्ति दी जाती है। छत्रपति शिवाजी महाराज संकुल के अंतर्गत विभागीय कार्यालय, 300 छात्रों के लिए अध्ययन कक्ष, 500 लड़कों और 500 लड़कियों के लिए छात्रावास, किसान समुपदेशन केंद्र और कौशल विकास प्रशिक्षण केंद्र का निर्माण किया जा रहा है।
3500 से अधिक नौकरियाँ
1553 अधिशेष पद सृजित किये गये और अभ्यर्थियों की भर्ती की गयी। साथ ही रुकी हुई भर्ती प्रक्रिया को पूरा करने और 2000 छात्रों को सेवा में शामिल करने का भी निर्णय लिया गया। ऐसे कुल 3553 लोगों को सरकारी सेवा में समाहित किया गया। अब तक कक्षा 1 (74), कक्षा 2 (230) ऐसे कुल 304 मराठा समुदाय के छात्रों का एमपीएससी के माध्यम से चयन किया गया है।
मराठी समुदाय के 12 आईएएस, 18 आईपीएस, 8 आईआरएस, 1 आईएफएस और 12 अन्य सेवाओं के लिए कुल 51 लोगों का चयन यूपीएससी के माध्यम से किया गया है। एमफिल और पीएचडी के लिए 2109 विद्यार्थी लाभान्वित हुए हैं। फेलोशिप के लिए प्रति छात्र पांच साल तक 20 लाख रुपये का अनुदान दिया जाता है।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रोत्साहन, प्रशिक्षण
मुख्यमंत्री ने कहा कि 75 मेधावी छात्रों को विदेशी शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति दी जाती है। एमएस के लिए सालाना 30 लाख के अनुसार दो साल के लिए 60 लाख रुपये, अगर विद्यार्थी पीएचडी कर रहा है तो 1 करोड़ 60 लाख रुपये अनुदान दिया जाता है। सारथी के माध्यम से छत्रपति शिवाजी महाराज स्मृति ग्रंथ की 50 हजार प्रतियां प्रकाशित कर विभिन्न ग्रामपंचायतों, पंचायत समिति, जिला परिषदों, नगर पालिकाओं, महानगर पालिकाओं, माध्यमिक विद्यालयों, सरकारी कार्यालयों में वितरित की गई हैं। हर साल मराठा समुदाय के 500 बच्चों को यूपीएससी की तैयारी के लिए दिल्ली और पुणे में प्रशिक्षित किया जाता है। साथ ही 750 छात्रों को एमपीएससी के लिए प्रशिक्षित दिया जाता है।  मराठा समुदाय के छात्रों को ओबीसी की तरह दी जानेवाली रियायतें, छात्रों के लिए छात्रावास की सुविधा, शिक्षा शुल्क प्रतिपूर्ति, छात्रवृत्ति, प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में आयु में छूट और परीक्षा शुल्क, इस तरह लाभ दिया जाता है।
स्व-रोज़गार और रोज़गार तथा उद्योगों के लिए अधिक वित्तीय सहायता
अण्णासाहेब पाटिल आर्थिक विकास निगम के माध्यम से स्वरोजगार और रोजगार तथा उद्योगों के लिए बैंकों के माध्यम से लिए गए ऋण पर ब्याज की प्रतिपूर्ति की जाती है। कुल 67 हजार 148 बैंक ऋण लाभार्थियों को 4850 करोड़ का ऋण वितरित किया गया है। 55 हजार 517 लाभार्थियों को ब्याज वापसी शुरू हो गई है। अब तक लाभार्थियों को ब्याज के बदले 516 करोड़ की वित्तीय सहायता दी जा चुकी है। अण्णासाहेब पाटिल आर्थिक विकास निगम और सारथियों को 300 करोड़ रुपये का फंड प्रदान किया जाता है। मनुष्यबल और निधियों में कोई कमी नहीं होने दी जाएगी।

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