महाविद्यालयीन छात्राओं की उच्च शिक्षा में मात्रा बढ़ाने के लिए उपायों पर सरकार का जोर : चंद्रकांतदादा पाटिल
महिला सशक्तिकरण हेतु आठ सूत्रीय कार्यक्रम की आवश्यकता : डॉ. नीलम गोर्हे
पुणे, अक्टूबर (जिमाका)
उच्च व तकनीकी शिक्षा और सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय द्वारा संयुक्त रूप से ‘संयुक्त राष्ट्र शाश्वत विकास लक्ष्य, महिला सशक्तिकरण एवं उच्च शिक्षा’ विषय पर आयोजित महिला सशक्तिकरण राज्यस्तरीय सम्मेलन का उद्घाटन विधान परिषद की उपसभापति डॉ. नीलम गोर्हे और राज्य के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांतदादा पाटिल के शुभ हाथों किया गया।
विश्वविद्यालय के खाशाबा जाधव क्रीड़ा संकुल में आयोजित इस कार्यक्रम में विधान परिषद की उपसभापति डॉ.नीलम गोर्हे, विश्वविद्यालय के कुलगुरू डॉ. सुरेश गोसावी, श्रीमती नाथीबाई दामोदर ठाकरसी महिला विश्वविद्यालय की कुलगुरू डॉ. उज्ज्वला चक्रदेव, शिक्षण संचालक शैलेंद्र देवलाणकर, प्र. कुलगुरू डॉ. पराग कालकर, कुलसचिव डॉ .प्रफुल्ल पवार आदि उपस्थित थे।
मंत्री श्री पाटिल ने कहा कि महिलाओं को सशक्त बनाने, बराबरी का दर्जा दिलाने की प्रक्रिया देश में आगे बढ़ रही है। जहां दुनिया के कई देशों में महिलाओं को वोट देने का अधिकार पाने के लिए संघर्ष करना पड़ा, वहीं देश को आजादी के पहले दिन से ही वोट देने का अधिकार मिल गया। महिलाओं के लिए मातृत्व अवकाश, कार्यस्थल पर नर्सरी जैसी सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। महिलाओं को शिक्षा के मामले में भी संघर्ष करना पड़ा। सम्मेलन के माध्यम से महाविद्यालयीन छात्राओं की महाविद्यालय में उपस्थिति बढ़ाने, उनकी शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए आवश्यक सुविधाओं के बारे में चर्चा होनी चाहिए।
नई शिक्षा नीति कौशल विकास पर जोर देती है। घरेलू जिम्मेदारियों का ख्याल रखते हुए उसे आय के साधन उत्पन्न करना, वित्तीय रूप से सशक्त कौशल प्रदान करने के लिए एक प्रणाली बनानी होगी। साथ ही महिला सुरक्षा के लिहाज से ‘दामिनी टीम’ को अधिक सशक्त बनाया जाए, कॉलेज में छात्राओं के लिए अपनी बात कहने की व्यवस्था बनाई जाए। शाश्वत विकास की दृष्टि से 2021 में विश्व में मानव जाति के कल्याण के लिए 17 उद्देश्य निर्धारित किए गए हैं। इस सम्मेलन में महिला सशक्तिकरण एवं उच्च शिक्षा के संदर्भ में संवाद होना चाहिए।
मंत्री श्री पाटिल ने कहा कि महिलाओं को सशक्त बनाने, बराबरी का दर्जा दिलाने की प्रक्रिया देश में आगे बढ़ रही है। जहां दुनिया के कई देशों में महिलाओं को वोट देने का अधिकार पाने के लिए संघर्ष करना पड़ा, वहीं देश को आजादी के पहले दिन से ही वोट देने का अधिकार मिल गया। महिलाओं के लिए मातृत्व अवकाश, कार्यस्थल पर नर्सरी जैसी सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। महिलाओं को शिक्षा के मामले में भी संघर्ष करना पड़ा। सम्मेलन के माध्यम से महाविद्यालयीन छात्राओं की महाविद्यालय में उपस्थिति बढ़ाने, उनकी शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए आवश्यक सुविधाओं के बारे में चर्चा होनी चाहिए।
नई शिक्षा नीति कौशल विकास पर जोर देती है। घरेलू जिम्मेदारियों का ख्याल रखते हुए उसे आय के साधन उत्पन्न करना, वित्तीय रूप से सशक्त कौशल प्रदान करने के लिए एक प्रणाली बनानी होगी। साथ ही महिला सुरक्षा के लिहाज से ‘दामिनी टीम’ को अधिक सशक्त बनाया जाए, कॉलेज में छात्राओं के लिए अपनी बात कहने की व्यवस्था बनाई जाए। शाश्वत विकास की दृष्टि से 2021 में विश्व में मानव जाति के कल्याण के लिए 17 उद्देश्य निर्धारित किए गए हैं। इस सम्मेलन में महिला सशक्तिकरण एवं उच्च शिक्षा के संदर्भ में संवाद होना चाहिए।
विधान परिषद की उपसभापति डॉ.गोर्हे ने कहा कि शाश्वत विकास लक्ष्य आपस में जुड़े हुए हैं। लक्ष्यों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और लैंगिक समानता इन विषयों को शामिल किया गया है। शाश्वत विकास लक्ष्यों के मद्देनजर इस विषय पर समाज में चर्चा होने की उम्मीद है। इसके साथ ही प्राकृतिक आपदाओं में महिलाओं के सामने आनेवाली चुनौतियाँ और महिलाओं के पुनर्वास के मुद्दे भी महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में उच्च शिक्षित महिलाओं को अपने मन से सामंती विचारों से छुटकारा पाना चाहिए और समाज में महिलाओं का नेतृत्व करने के लिए आगे आना चाहिए। राज्यस्तरीय महिला सशक्तिकरण परिषद में भाग लेनेवाली महिला शिक्षकों को महिला सशक्तिकरण के लिए आठ सूत्रीय कार्यक्रम को लागू करने पर जोर देना चाहिए।
आगे उन्होंने कहा कि सम्मेलन में भाग लेनेवाले प्रतिनिधियों को समन्वयक या महिला सशक्तिकरण राजदूत के रूप में नियुक्त किया जाना चाहिए। उच्च शिक्षा निदेशालय के अधीन सभी महाविद्यालयों में महिला सशक्तिकरण कक्ष स्थापित किए जाएं। महाविद्यालयीन स्तर पर महिलाओं के लिए रोजगारपरक न्यूनतम कौशल कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए। महिला स्वास्थ्य विषय पर महाविद्यालय में कार्यशालाएं, मार्गदर्शन पर व्याख्यान, समूह चर्चा आदि का आयोजन किया जाना चाहिए। महाविद्यालयों के माध्यम से ग्रामीण आदिवासी, पर्वतीय क्षेत्रों में महिलाओं के लिए डिजिटल साक्षरता, जनजागरूकता कार्यक्रमों के क्रियान्वयन पर जोर दिया जाना चाहिए। महिलाओं का उच्च शिक्षा में प्रवेश दर को बढ़ाने के लिए सभी महाविद्यालयों के माध्यम से जागरूकता अभियान के कार्यान्वयन पर सम्मेलन में चर्चा होनी चाहिए।
आगे उन्होंने कहा कि सम्मेलन में भाग लेनेवाले प्रतिनिधियों को समन्वयक या महिला सशक्तिकरण राजदूत के रूप में नियुक्त किया जाना चाहिए। उच्च शिक्षा निदेशालय के अधीन सभी महाविद्यालयों में महिला सशक्तिकरण कक्ष स्थापित किए जाएं। महाविद्यालयीन स्तर पर महिलाओं के लिए रोजगारपरक न्यूनतम कौशल कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए। महिला स्वास्थ्य विषय पर महाविद्यालय में कार्यशालाएं, मार्गदर्शन पर व्याख्यान, समूह चर्चा आदि का आयोजन किया जाना चाहिए। महाविद्यालयों के माध्यम से ग्रामीण आदिवासी, पर्वतीय क्षेत्रों में महिलाओं के लिए डिजिटल साक्षरता, जनजागरूकता कार्यक्रमों के क्रियान्वयन पर जोर दिया जाना चाहिए। महिलाओं का उच्च शिक्षा में प्रवेश दर को बढ़ाने के लिए सभी महाविद्यालयों के माध्यम से जागरूकता अभियान के कार्यान्वयन पर सम्मेलन में चर्चा होनी चाहिए।
कुलगुरू डॉ. गोसावी ने कहा कि सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र शाश्वत विकास लक्ष्यों पर चर्चा होगी। शाश्वत विकास लक्ष्यों में समावेशी शिक्षा और महिला शिक्षा को बढ़ावा देने का लक्ष्य शामिल है। हमें 2023 तक उन लक्ष्यों तक पहुंचना है। सम्मेलन महिलाओं के लिए यौन स्वास्थ्य, प्राकृतिक संसाधन संपदा के संरक्षण, आर्थिक, शैक्षिक, राजनीतिक, मनोवैज्ञानिक सशक्तिकरण और आर्थिक स्वयं सहायता समूहों पर केंद्रित होगा। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के अनुसार हर पाठ्यक्रम में कौशल विकास शिक्षा की योजना बनाई जा रही है। सम्मेलन में भाग लेनेवाले प्राध्यापक प्रतिनिधि यहाँ के विषयों को राज्यभर में पहुंचाएंगे। उन्होंने यह विश्वास व्यक्त किया।
प्रास्ताविक में डॉ. देवलाणकर ने सम्मेलन की योजना की जानकारी दी। पिछले वर्ष नई शिक्षा नीति के कार्यान्वयन और नॅक प्रमाणन में महाराष्ट्र अग्रणी रहा है।
सम्मेलन में राज्य के उच्च शिक्षा सहसंचालक, राज्य के विभिन्न महाविद्यालयों की महिला प्राध्यापिका उपस्थित थीं।
प्रास्ताविक में डॉ. देवलाणकर ने सम्मेलन की योजना की जानकारी दी। पिछले वर्ष नई शिक्षा नीति के कार्यान्वयन और नॅक प्रमाणन में महाराष्ट्र अग्रणी रहा है।
सम्मेलन में राज्य के उच्च शिक्षा सहसंचालक, राज्य के विभिन्न महाविद्यालयों की महिला प्राध्यापिका उपस्थित थीं।





0 टिप्पणियाँ