कुनबी रिकॉर्ड खोजने के लिए जिलास्तरीय समिति की बैठक हुई
पुणे, नवंबर (जिमाका)
मराठा समुदाय के लोगों को मराठा-कुनबी, कुनबी-मराठा जाति प्रमाणपत्र देने के लिए आवश्यक साक्ष्य खोजने के अनुसरण में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के निर्देशानुसार गठित जिलास्तरीय समिति की बैठक जिलाधिकारी डॉ. राजेश देशमुख की उपस्थिति में आयोजित की गई थी। जिले में कुनबी अभिलेखों की खोज युद्धस्तर पर करायी जाए, यह निर्देश इस दौरान जिलाधिकारी ने दिए।
जिलाधिकारी कार्यालय में आयोजित इस बैठक में जिला पुलिस अधीक्षक अंकीत गोयल, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रमेश चव्हाण, निवासी उपजिलाधिकारी ज्योति कदम साथ ही महानगरपालिका, सहकार विभाग, पुरातत्व विभाग आदि विविध विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
डॉ. देशमुख ने कहा कि कुनबी अभिलेखों की खोज के लिए औरंगाबाद जिले ने अपनाई गई प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ें और उसी तरीके से विभिन्न रूपों में रिपोर्ट प्रस्तुत की जानी चाहिए। 1948 से पहले और 1948 से 1967 इस अवधि के दौरान के रिकॉर्ड की जानकारी उपलब्ध करायी जानी चाहिए। रिकॉर्ड लेने के लिए तालुकास्तर पर समितियां भी गठित की गई हैं । इस संबंध में कार्यवाही की प्रतिदिन समीक्षा की जानी चाहिए। कार्यवाही की रिपोर्ट हर सप्ताह न्यायमूर्ति शिंदे कमेटी को भेजी जाएगी।
अधिकांश अभिलेख मोडी लिपि में हैं, इसलिए उनकी जांच के लिए अभिलेखागार निदेशालय से प्रशिक्षित व्यक्तियों की सहायता ली जानी चाहिए, प्रमाण पत्र जारी करते समय ऐसे व्यक्ति के प्रमाण पत्र को ध्यान में रखा जाता है। यह निरीक्षण 13 प्रकार के विभिन्न दस्तावेजों के आधार पर किया जाना है। जांचे गए रिकार्ड की जानकारी वेबसाइट पर डालकर न्यायमूर्ति शिंदे समिति को भी भेजी जाए, इसलिए संबंधित विभाग इस कार्य के लिए पूर्णकालिक अधिकारी नियुक्त करें। उन्होंने यह भी कहा कि पिछड़ा वर्ग आयोग से सूचना मांगे जाने पर तत्काल उपलब्ध करायी जाए। जिला नियंत्रण कक्ष में संबंधित विभागों को तालुका के साथ समन्वय के लिए अपने एक अधिकारी को नियुक्त करना चाहिए।
मराठा समुदाय के लोगों को मराठा-कुनबी, कुनबी-मराठा जाति प्रमाणपत्र देने के लिए आवश्यक साक्ष्य खोजने के अनुसरण में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के निर्देशानुसार गठित जिलास्तरीय समिति की बैठक जिलाधिकारी डॉ. राजेश देशमुख की उपस्थिति में आयोजित की गई थी। जिले में कुनबी अभिलेखों की खोज युद्धस्तर पर करायी जाए, यह निर्देश इस दौरान जिलाधिकारी ने दिए।
जिलाधिकारी कार्यालय में आयोजित इस बैठक में जिला पुलिस अधीक्षक अंकीत गोयल, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रमेश चव्हाण, निवासी उपजिलाधिकारी ज्योति कदम साथ ही महानगरपालिका, सहकार विभाग, पुरातत्व विभाग आदि विविध विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
डॉ. देशमुख ने कहा कि कुनबी अभिलेखों की खोज के लिए औरंगाबाद जिले ने अपनाई गई प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ें और उसी तरीके से विभिन्न रूपों में रिपोर्ट प्रस्तुत की जानी चाहिए। 1948 से पहले और 1948 से 1967 इस अवधि के दौरान के रिकॉर्ड की जानकारी उपलब्ध करायी जानी चाहिए। रिकॉर्ड लेने के लिए तालुकास्तर पर समितियां भी गठित की गई हैं । इस संबंध में कार्यवाही की प्रतिदिन समीक्षा की जानी चाहिए। कार्यवाही की रिपोर्ट हर सप्ताह न्यायमूर्ति शिंदे कमेटी को भेजी जाएगी।
अधिकांश अभिलेख मोडी लिपि में हैं, इसलिए उनकी जांच के लिए अभिलेखागार निदेशालय से प्रशिक्षित व्यक्तियों की सहायता ली जानी चाहिए, प्रमाण पत्र जारी करते समय ऐसे व्यक्ति के प्रमाण पत्र को ध्यान में रखा जाता है। यह निरीक्षण 13 प्रकार के विभिन्न दस्तावेजों के आधार पर किया जाना है। जांचे गए रिकार्ड की जानकारी वेबसाइट पर डालकर न्यायमूर्ति शिंदे समिति को भी भेजी जाए, इसलिए संबंधित विभाग इस कार्य के लिए पूर्णकालिक अधिकारी नियुक्त करें। उन्होंने यह भी कहा कि पिछड़ा वर्ग आयोग से सूचना मांगे जाने पर तत्काल उपलब्ध करायी जाए। जिला नियंत्रण कक्ष में संबंधित विभागों को तालुका के साथ समन्वय के लिए अपने एक अधिकारी को नियुक्त करना चाहिए।
अब तक 12 हजार 294 प्रमाण पत्रों का वितरण
पिछले 10 माह में कुनबी रिकार्डवाले 12 हजार 294 व्यक्तियों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए हैं। यह जानकारी जिलाधिकारी डॉ. देशमुख ने दी है। कुल प्राप्त 12 हजार 911 आवेदनों में से 460 आवेदन लंबित हैं तथा 157 आवेदन अस्वीकृत कर दिए गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इस कार्य के लिए 1967 से पहले के राजस्व साक्ष्यों पर विचार किया जा रहा है। तालुका स्तर पर इस संबंध में कार्यवाही जारी है।
तेरह प्रकार के दस्तावेजों की होगी जांच
मराठा-कुनबी, कुनबी-मराठा जाति का प्रमाणपत्र जारी करने के लिए 13 विभिन्न प्रकार के दस्तावेजों की जांच की जानेवाली है। ऐसा जिलाधिकारी ने इस दौरान कहा। खसरा शीट, निरीक्षण शीट, सी-शीट, वंश रजिस्टर, राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर वर्ष 1951, नमूना संख्या 01 दावा प्रविष्टि पत्रक, नमूना क्रमांक 02 राजस्व अभिलेखों की पात्रता पत्रक एवं सत्रहवीं प्रतिलिपि की जाँच की जायेगी। खसरा पत्रक, निरीक्षण पत्रक , सी- पत्रक, वंश रजिस्टर, नागरिकों का राष्ट्रीय रजिस्टर वर्ष 1951, नमूना संख्या 01 दावा प्रविष्टि पत्रक, नमूना क्रमांक 02 राजस्व अभिलेखों की पात्रता पत्रक एवं सत्रह परिच्छेद (सातबारा उतारा) इन राजस्व अभिलेखों की जांच की जाएगी। जन्म-मृत्यु अभिलेख रजिस्टर (ग्राम नमूना 14), शैक्षिक अभिलेखों का प्रवेश-निकास रजिस्टर/सामान्य रजिस्टर, रेलवे पुलिस विभाग से अपराध रिकॉर्ड, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी से पूर्व सैनिक सेवानिवृत्ति के बाद पंजीकरण के लिए प्रस्तुत किए गए दस्तावेज़, जिला वक्फ अधिकारी से मुंतखब, 1967 से पहले के अधिकारी- कर्मचारियों की सेवा पुस्तिका, महानगरपालिका एवं नगर पालिका खेतीवार तालिका संग्रहण एवं आमदनी रजिस्टर और सेना भर्ती कार्यालय से सेना भर्ती के समय लिए गए अभिलेखों की जांच की जाएगी। अधीक्षक राज्य उत्पाद शुल्क से लाइसेंस रजिस्टर, फसल रजिस्टर, ताड़ी रजिस्टर व स्थापना दस्तावेज तो जेल अधीक्षक से कच्चा व सजायाफ्ता बंदियों का रजिस्टर, पुलिस विभाग से ग्रामवार, गोपनीय रजिस्टर, अपराध रजिस्टर, गिरफ्तारी पंचनामा, एफआईआर रजिस्टर की जांच की जाएगी। सहायक जिला निबंधक तथा मुद्रांक जिलाधिकारी इन से खरीद का रजिस्टर, डे-बुक, अनुबंध पत्र, जमा पत्र, इसारा रसीद, किराया चिट्ठी, दस्तक पत्र, बटाई पत्र, गोद लेने का विवरण, मृत्यु प्रमाण पत्र, वसीयत, समझौता पत्र और अन्य दस्तावेजों की जांच जाएगी।
इस समय बताया गया कि भू-अभिलेख विभाग से पक्का बुक, खेतवार पत्रक, लंबित वसूली, उल्ला प्रतिबुक, संशोधन प्रतिबुक, क्लासर रजिस्टर, अधिकार पंजीकरण पत्रक, नमूना-33, नमूना-34 और टिपन बुक की जांच निबंधक तथा मुद्रांक जिलाधिकारी द्वारा की जाएगी।
पिछले 10 माह में कुनबी रिकार्डवाले 12 हजार 294 व्यक्तियों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए हैं। यह जानकारी जिलाधिकारी डॉ. देशमुख ने दी है। कुल प्राप्त 12 हजार 911 आवेदनों में से 460 आवेदन लंबित हैं तथा 157 आवेदन अस्वीकृत कर दिए गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इस कार्य के लिए 1967 से पहले के राजस्व साक्ष्यों पर विचार किया जा रहा है। तालुका स्तर पर इस संबंध में कार्यवाही जारी है।
तेरह प्रकार के दस्तावेजों की होगी जांच
मराठा-कुनबी, कुनबी-मराठा जाति का प्रमाणपत्र जारी करने के लिए 13 विभिन्न प्रकार के दस्तावेजों की जांच की जानेवाली है। ऐसा जिलाधिकारी ने इस दौरान कहा। खसरा शीट, निरीक्षण शीट, सी-शीट, वंश रजिस्टर, राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर वर्ष 1951, नमूना संख्या 01 दावा प्रविष्टि पत्रक, नमूना क्रमांक 02 राजस्व अभिलेखों की पात्रता पत्रक एवं सत्रहवीं प्रतिलिपि की जाँच की जायेगी। खसरा पत्रक, निरीक्षण पत्रक , सी- पत्रक, वंश रजिस्टर, नागरिकों का राष्ट्रीय रजिस्टर वर्ष 1951, नमूना संख्या 01 दावा प्रविष्टि पत्रक, नमूना क्रमांक 02 राजस्व अभिलेखों की पात्रता पत्रक एवं सत्रह परिच्छेद (सातबारा उतारा) इन राजस्व अभिलेखों की जांच की जाएगी। जन्म-मृत्यु अभिलेख रजिस्टर (ग्राम नमूना 14), शैक्षिक अभिलेखों का प्रवेश-निकास रजिस्टर/सामान्य रजिस्टर, रेलवे पुलिस विभाग से अपराध रिकॉर्ड, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी से पूर्व सैनिक सेवानिवृत्ति के बाद पंजीकरण के लिए प्रस्तुत किए गए दस्तावेज़, जिला वक्फ अधिकारी से मुंतखब, 1967 से पहले के अधिकारी- कर्मचारियों की सेवा पुस्तिका, महानगरपालिका एवं नगर पालिका खेतीवार तालिका संग्रहण एवं आमदनी रजिस्टर और सेना भर्ती कार्यालय से सेना भर्ती के समय लिए गए अभिलेखों की जांच की जाएगी। अधीक्षक राज्य उत्पाद शुल्क से लाइसेंस रजिस्टर, फसल रजिस्टर, ताड़ी रजिस्टर व स्थापना दस्तावेज तो जेल अधीक्षक से कच्चा व सजायाफ्ता बंदियों का रजिस्टर, पुलिस विभाग से ग्रामवार, गोपनीय रजिस्टर, अपराध रजिस्टर, गिरफ्तारी पंचनामा, एफआईआर रजिस्टर की जांच की जाएगी। सहायक जिला निबंधक तथा मुद्रांक जिलाधिकारी इन से खरीद का रजिस्टर, डे-बुक, अनुबंध पत्र, जमा पत्र, इसारा रसीद, किराया चिट्ठी, दस्तक पत्र, बटाई पत्र, गोद लेने का विवरण, मृत्यु प्रमाण पत्र, वसीयत, समझौता पत्र और अन्य दस्तावेजों की जांच जाएगी।
इस समय बताया गया कि भू-अभिलेख विभाग से पक्का बुक, खेतवार पत्रक, लंबित वसूली, उल्ला प्रतिबुक, संशोधन प्रतिबुक, क्लासर रजिस्टर, अधिकार पंजीकरण पत्रक, नमूना-33, नमूना-34 और टिपन बुक की जांच निबंधक तथा मुद्रांक जिलाधिकारी द्वारा की जाएगी।


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