पुणे, नवंबर (हड़पसर एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क)
प्रधान नियंत्रक रक्षा लेखा (सेना), पुणे कार्यालय में 31 अक्टूबर 2023 को देश के प्रथम उप प्रधानमंत्री व गृहमंत्री भारतरत्न सरदार वल्लभ भाई पटेल जी की पावन जयंती के उपलक्ष्य में एकता दिवस मनाया गया तथा पूर्व प्रधानमंत्री प्रियदर्शनी इंदिरा गांधी जी की पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आतंकवाद विरोधी दिवस का भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया।
सर्वप्रथम, श्रीमती सुनालिनी बोईड, भा.र.ले.से, रक्षा लेखा उप नियंत्रक ने कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. राजीव चव्हाण, भा.र.ले.से. रा.र.अ. प्रधान नियंत्रक रक्षा लेखा का पुष्पगुच्छ प्रदान कर हार्दिक स्वागत किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के कर कमलों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित करकार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।साथ ही मुख्य अतिथि द्वारा सरदार पटेल जी तथा स्वर्गीय इंदिरा गांधी जी की प्रतिमाओं को माल्यार्पण किया गया व अन्य भारतीय रक्षा लेखा सेवा के अधिकारियों द्वारा भी दोनों महान विभूतियों को पुष्प अर्पित किए गए।
इस अवसर परश्री विक्रम राजापुरे, रक्षा लेखा उप नियंत्रक, श्रीमती सुनालिनी बोईड, भा.र.ले.से, रक्षा लेखा उप नियंत्रक, श्री स्वप्निल हनमाने, भा.र.ले.से, रक्षा लेखा सहायक नियंत्रक, श्री आर. के. बिंदरू, भा.र.ले.से, रक्षा लेखा सहायक नियंत्रक,श्री एम राव, भा.र.ले.से, रक्षा लेखा सहायक नियंत्रक, श्रीमती वैशाली डीसूजा, भा.र.ले.से, रक्षा लेखा सहायक नियंत्रक के साथ मुख्य कार्यालय के सभी वरिष्ठ अधिकारियों तथा कर्मचारीगणउपस्थित थे।
कार्यक्रम की शुरुआत, सरदार वल्लभ भाई पटेल की पावन जयंती पर राष्ट्रीय एकता दिवस शपथ तथा इंदिरा गांधी के स्मृति दिवस पर आतंकवाद विरोधी शपथ निष्ठापूर्वक ली गयी। राष्ट्रीय एकता दिवस तथा आतंकवाद विरोधी दिवस के हिंदी तथा अंग्रेजी शपथ का वाचन क्रमशः श्रीमती मधु गांधी, वरिष्ठ लेखा अधिकारी तथा श्रीमती सुहाना आरिफ, सहायक लेखा अधिकारी द्वारा किया गया।
प्रधान नियंत्रक रक्षा लेखा (सेना), पुणे कार्यालय में 31 अक्टूबर 2023 को देश के प्रथम उप प्रधानमंत्री व गृहमंत्री भारतरत्न सरदार वल्लभ भाई पटेल जी की पावन जयंती के उपलक्ष्य में एकता दिवस मनाया गया तथा पूर्व प्रधानमंत्री प्रियदर्शनी इंदिरा गांधी जी की पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आतंकवाद विरोधी दिवस का भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया।
सर्वप्रथम, श्रीमती सुनालिनी बोईड, भा.र.ले.से, रक्षा लेखा उप नियंत्रक ने कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. राजीव चव्हाण, भा.र.ले.से. रा.र.अ. प्रधान नियंत्रक रक्षा लेखा का पुष्पगुच्छ प्रदान कर हार्दिक स्वागत किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के कर कमलों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित करकार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।साथ ही मुख्य अतिथि द्वारा सरदार पटेल जी तथा स्वर्गीय इंदिरा गांधी जी की प्रतिमाओं को माल्यार्पण किया गया व अन्य भारतीय रक्षा लेखा सेवा के अधिकारियों द्वारा भी दोनों महान विभूतियों को पुष्प अर्पित किए गए।
इस अवसर परश्री विक्रम राजापुरे, रक्षा लेखा उप नियंत्रक, श्रीमती सुनालिनी बोईड, भा.र.ले.से, रक्षा लेखा उप नियंत्रक, श्री स्वप्निल हनमाने, भा.र.ले.से, रक्षा लेखा सहायक नियंत्रक, श्री आर. के. बिंदरू, भा.र.ले.से, रक्षा लेखा सहायक नियंत्रक,श्री एम राव, भा.र.ले.से, रक्षा लेखा सहायक नियंत्रक, श्रीमती वैशाली डीसूजा, भा.र.ले.से, रक्षा लेखा सहायक नियंत्रक के साथ मुख्य कार्यालय के सभी वरिष्ठ अधिकारियों तथा कर्मचारीगणउपस्थित थे।
कार्यक्रम की शुरुआत, सरदार वल्लभ भाई पटेल की पावन जयंती पर राष्ट्रीय एकता दिवस शपथ तथा इंदिरा गांधी के स्मृति दिवस पर आतंकवाद विरोधी शपथ निष्ठापूर्वक ली गयी। राष्ट्रीय एकता दिवस तथा आतंकवाद विरोधी दिवस के हिंदी तथा अंग्रेजी शपथ का वाचन क्रमशः श्रीमती मधु गांधी, वरिष्ठ लेखा अधिकारी तथा श्रीमती सुहाना आरिफ, सहायक लेखा अधिकारी द्वारा किया गया।
मुख्य अतिथि महोदय ने अपने उद्बोधन में प्रथमतः ‘भारत के लौह पुरुष’ सरदार वल्लभ भाई पटेल के व्यापक-विस्तृत महत्वपूर्ण कार्यों को याद दिलाते हुए बताया कि आज का जो विशाल भारत है उसे यह विशालतम आकार देने में उनका श्रेय अमूल्य है। उन्होंने यह भी बताया कि महात्मा गांधी जी के प्रभाव में उन्होंने गुजरात के ग्रामीणों को संघटित किया और अंग्रेजों के अत्याचार के विरुद्ध सत्याग्रह किया। स्वाधीनता के बाद, अखंड भारत बनाने की दिशा में उन्होंने 564 से अधिक रियासतों को एकसाथ जोड़ कर देश को एकसूत्र में पिरोने का पावन कार्य किया। आज का जो आधुनिक भारत हम देखते हैं यह उनके विशेष प्रयासों का ही प्रतिफल है।
जिस प्रकार अनेक नदियाँ समुद्र में समाहित होकर एक हो जाती हैं, उसी प्रकार हमारे देश में अनेक जाति, समुदाय, संप्रदाय, धर्मों के लोग एकता के साथ रहते हैं। अनेकता में एकता ही हमारे देश को एक बनाए रखने का मूल मंत्र है। भारत की एकता व अखंडता के लिए उनके द्वारा किए गए बहुमूल्य योगदान के कारण ही आज का दिन हम उनकी याद मेंराष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाते हैं। उन्हीं की याद में स्टैचू ऑफ यूनिटी के नाम से प्रसिद्ध उनकी मूर्ति जो विश्व में सबसे ऊंची मूर्ति के नाम से विख्यात है।
आजादी के बाद ब्यूरोक्रेसी के तहत विशेषतः आईएएस, आईपीएस, आईएफएस जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों को बनाए रखने में उनका बहुमूल्य योगदान रहा है। इसी प्रकार के उनके अनेक दृढ़ निर्णय व निश्चय के कारण उन्हें लौह पुरुष की उपमा से नवाज़ा गया है।
साथ ही, सभी महिलाओं की प्रेरणा रही परम आदरणीय स्वर्गीय प्रियदर्शिनी इंदिरा गांधी जी को याद करते हुए उन्होंने बताया कि इसी महान महिला के कारण ही हमारी पूर्वी सीमाएं सुरक्षित हैं क्योंकि इनके अदम्य साहस और ठोस निर्णय के कारण ही सन् 1971 में मुजीबर रहमान की अध्यक्षता में बांग्लादेश के रूप में एक नए राष्ट्र का निर्माण हुआ। साथ ही, पोखरण में अणु बम का परीक्षण कर पूरे विश्व में हमारे देश की जो अलग पहचान देने के उनके साहसी निर्णय का जिक्र भी उन्होंने अपने उद्बोधन में किया।
संपूर्ण विश्व जब अमरीका और रूस के दो खेमों में बंटा हुआ था, उस समय प्रियदर्शिनी जी ने गुटनिरपेक्ष मुहिम के तहत अनेक सम विचारी राष्ट्रों को एक कर विश्व को शांति की नई राह दिखायी। इंदिरा गांधी जी अपने पिता के समान ही सभी नीति नियमों में पंचशील के तत्वों पर विश्वास रखती थी और उन्हीं का आचरण करती थी। पंचशील की धरोहर के कारण ही वे समूचे विश्व में सौहार्द और भाईचारे का वातावरण बनाने में सफल हुई थी।
आपातकाल के संघर्ष पूर्ण समय के बाद देश में उनकी प्रधानमंत्री के रूप में पुनः धमाकेदार वापसी हुई। उन्होंने उड़ीसा के बोलंगीर आयुध निर्माणी के अपने अंतिम सार्वजनिक कार्यक्रम में कहा था कि ‘मेरे खून की एक-एक बूंद मेरे जीवन के अंत तक राष्ट्र के काम आएगी।’ इसी के बाद राष्ट्र हित में उनके द्वारा चलाए गए ऑपरेशन ब्लूस्टार के विरोध में 31 अक्टूबर, 1984 को उनके ही स्वयंरक्षकों द्वारा उनका विश्वासघात किया गया तथा उनके उक्त शब्द शब्दशः साकार हुए, इसीलिए उनकी याद में 31 अक्टूबर को आतंकवाद विरोधी दिवस मनाया जाता है।
अंत में, मुख्य अतिथि महोदय ने सरदार वल्लभ भाई पटेल तथा इंदिरा गांधी से प्रेरणा लेते हुए सभासदों को यह परामर्श दिया कि हमें देश में घृणा, द्वेष नहीं फैलाना चाहिए। जाति, धर्म, वर्ण, रंग के नाम पर भेदभाव नहीं करना चाहिए। हम सभी को एकसाथ भाईचारे के साथ सौहार्दपूर्ण वातावरण में सभी के साथ मिल-जुलकर रहना चाहिए।
कार्यक्रम का सूत्र संचालन श्रीमती सुहाना आरिफ, सहायक लेखा अधिकारी ने सुचारू रूप से किया।
यह जानकारी पुणे रक्षा विभाग के जनसंपर्क अधिकारी श्री महेश अय्यंगार द्वारा दी गई है।
जिस प्रकार अनेक नदियाँ समुद्र में समाहित होकर एक हो जाती हैं, उसी प्रकार हमारे देश में अनेक जाति, समुदाय, संप्रदाय, धर्मों के लोग एकता के साथ रहते हैं। अनेकता में एकता ही हमारे देश को एक बनाए रखने का मूल मंत्र है। भारत की एकता व अखंडता के लिए उनके द्वारा किए गए बहुमूल्य योगदान के कारण ही आज का दिन हम उनकी याद मेंराष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाते हैं। उन्हीं की याद में स्टैचू ऑफ यूनिटी के नाम से प्रसिद्ध उनकी मूर्ति जो विश्व में सबसे ऊंची मूर्ति के नाम से विख्यात है।
आजादी के बाद ब्यूरोक्रेसी के तहत विशेषतः आईएएस, आईपीएस, आईएफएस जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों को बनाए रखने में उनका बहुमूल्य योगदान रहा है। इसी प्रकार के उनके अनेक दृढ़ निर्णय व निश्चय के कारण उन्हें लौह पुरुष की उपमा से नवाज़ा गया है।
साथ ही, सभी महिलाओं की प्रेरणा रही परम आदरणीय स्वर्गीय प्रियदर्शिनी इंदिरा गांधी जी को याद करते हुए उन्होंने बताया कि इसी महान महिला के कारण ही हमारी पूर्वी सीमाएं सुरक्षित हैं क्योंकि इनके अदम्य साहस और ठोस निर्णय के कारण ही सन् 1971 में मुजीबर रहमान की अध्यक्षता में बांग्लादेश के रूप में एक नए राष्ट्र का निर्माण हुआ। साथ ही, पोखरण में अणु बम का परीक्षण कर पूरे विश्व में हमारे देश की जो अलग पहचान देने के उनके साहसी निर्णय का जिक्र भी उन्होंने अपने उद्बोधन में किया।
संपूर्ण विश्व जब अमरीका और रूस के दो खेमों में बंटा हुआ था, उस समय प्रियदर्शिनी जी ने गुटनिरपेक्ष मुहिम के तहत अनेक सम विचारी राष्ट्रों को एक कर विश्व को शांति की नई राह दिखायी। इंदिरा गांधी जी अपने पिता के समान ही सभी नीति नियमों में पंचशील के तत्वों पर विश्वास रखती थी और उन्हीं का आचरण करती थी। पंचशील की धरोहर के कारण ही वे समूचे विश्व में सौहार्द और भाईचारे का वातावरण बनाने में सफल हुई थी।
आपातकाल के संघर्ष पूर्ण समय के बाद देश में उनकी प्रधानमंत्री के रूप में पुनः धमाकेदार वापसी हुई। उन्होंने उड़ीसा के बोलंगीर आयुध निर्माणी के अपने अंतिम सार्वजनिक कार्यक्रम में कहा था कि ‘मेरे खून की एक-एक बूंद मेरे जीवन के अंत तक राष्ट्र के काम आएगी।’ इसी के बाद राष्ट्र हित में उनके द्वारा चलाए गए ऑपरेशन ब्लूस्टार के विरोध में 31 अक्टूबर, 1984 को उनके ही स्वयंरक्षकों द्वारा उनका विश्वासघात किया गया तथा उनके उक्त शब्द शब्दशः साकार हुए, इसीलिए उनकी याद में 31 अक्टूबर को आतंकवाद विरोधी दिवस मनाया जाता है।
अंत में, मुख्य अतिथि महोदय ने सरदार वल्लभ भाई पटेल तथा इंदिरा गांधी से प्रेरणा लेते हुए सभासदों को यह परामर्श दिया कि हमें देश में घृणा, द्वेष नहीं फैलाना चाहिए। जाति, धर्म, वर्ण, रंग के नाम पर भेदभाव नहीं करना चाहिए। हम सभी को एकसाथ भाईचारे के साथ सौहार्दपूर्ण वातावरण में सभी के साथ मिल-जुलकर रहना चाहिए।
कार्यक्रम का सूत्र संचालन श्रीमती सुहाना आरिफ, सहायक लेखा अधिकारी ने सुचारू रूप से किया।
यह जानकारी पुणे रक्षा विभाग के जनसंपर्क अधिकारी श्री महेश अय्यंगार द्वारा दी गई है।
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