भारत और संयुक्त अरब अमीरात ने शिक्षा के क्षेत्र में परस्पर सहयोग बढ़ाने के उद्देश्य से एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और संयुक्त अरब अमीरात के शिक्षा मंत्री डॉ. अहमद अल फलासी के बीच आज अबु धाबी में हुई बैठक में इस समझौते पर हस्ताक्षर किये गये। इसका उददेश्य छात्रों और शिक्षकों के आदान-प्रदान, संयुक्त अनुसंधान पहल, पाठ्यक्रम की रूप रेखा तैयार करने और शैक्षिक कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी जैसे सहयोग के विभिन्न रूपों को बढ़ावा देना है। इस अवसर पर श्री प्रधान ने कहा कि वैश्विक प्रतिभा के केन्द्र भारत और बडे आर्थिक केन्द्र के रूप में पहचाने जाने वाले संयुक्त अरब अमीरात का एक साथ आना दोनों के लिए लाभकारी होगा। उन्होंने जी 20 फ्रेमवर्क के तहत शिक्षा कार्यसमूह की चौथी बैठक के दौरान दोंनो देशों के बीच शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में परस्पर सहयोग के प्रयासों में हुई प्रगति का भी जायजा लिया। नए करार के तहत भारत और संयुक्त अरब अमीरात की सामान्य और उच्च शिक्षा प्रणालियों के दायरे में नियमों, कानूनी संरचनाओं और सर्वोत्तम प्रथाओं के बारे में ज्ञान साझा करना शामिल है। इसके जरिए दोनों देश अपने उच्च शिक्षा संस्थानों के बीच अकादमिक साझेदारी की सुविधा प्रदान करेंगे, जिसके परिणामस्वरूप संयुक्त डिग्री और दोहरी डिग्री कार्यक्रम शुरु किए जा सकेगें। समझौता ज्ञापन के दायरे का विस्तार उच्च शिक्षा क्षेत्र से आगे तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा के क्षेत्र में क्षमता विकास तक भी होगा। इस समझौता ज्ञापन के सफल कार्यान्वयन की निगरानी के लिए, एक संयुक्त कार्य समूह की स्थापना की जाएगी, जिसकी अध्यक्षता बारी-बारी से भारत और संयुक्त अरब अमीरात के शिक्षा मंत्रालयों के प्रतिनिधि करेंगे। श्री प्रधान अबू धाबी में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-दिल्ली का पहला अतंरराष्ट्रीय परिसर भी देखने गये। इस परिसर में कंप्यूटर सांइस आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस और स्वास्थ्य सेवा से जुडे विभिन्न पाठ्यक्रमों के अलावा कई तरह की अनुसंधान गतिविधियों चलाई जाऐंगी।

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