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एमआईटी एडीटी विश्वविद्यालय में ग्रेजुएशन फैशन शो भव्य रूप से संपन्न

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फैशन केवल डिज़ाइन नहीं, आपकी पहचान है: टीना रांका 

लोनी कालभोर, मई (हड़पसर एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क)
फैशन केवल डिज़ाइन नहीं, बल्कि आपकी पहचान है। हर डिज़ाइन के माध्यम से हम दुनिया को अपनी संस्कृति और परंपरा की एक कहानी बताते हैं। इसलिए अपने विचारों के प्रति हमेशा ईमानदार रहें, निरंतर नवाचार करते रहें और दुनिया को और सुंदर बनाएं। यह विचार मशहूर फैशन डिज़ाइनर टीना रांका ने व्यक्त किए।

इंस्टीट्यूट ऑफ डिज़ाइन, एमआयटी एडीटी विश्वविद्यालय के फैशन विभाग द्वारा आयोजित 11वें वार्षिक ग्रेजुएशन फैशन शो (जीएफएस) 2026 के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में वे बोल रही थीं। इस अवसर पर यहां पेपरमिंट क्लोदिंग प्रा. लि. के प्रबंध निदेशक संतोष कटारिया, ‘ग्लैड यू केम एंड ग्लैड वी मेट’ के संस्थापक मैडी अमृतकर, विश्वविद्यालय के कार्याध्यक्ष एवं प्रो-वाइस चांसलर प्रो. डॉ. मंगेश कराड, कुलगुरु प्रो. डॉ. राजेश एस., प्रोवोस्ट डॉ. सायली गणकर, प्रो-वाइस चांसलर डॉ. नचिकेत ठाकुर, प्रो. डॉ. दांडेश्वर बिसोई तथा फैशन विभाग प्रमुख डॉ. अर्शिया कपूर आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे।

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इस फैशन शो में वर्ष 2022–2026 बैच के बी.डिज़. फैशन कम्युनिकेशन, बी.डिज़. फैशन डिज़ाइन और एम.डिज़. फैशन मैनेजमेंट एवं मार्केटिंग के छात्रों ने अपने डिज़ाइन कलेक्शन, फैशन फिल्में, प्रकाशन और ब्रांडिंग प्रोजेक्ट्स प्रस्तुत किए। प्रत्येक प्रस्तुति में छात्रों की व्यक्तिगत डिज़ाइन पहचान और पेशेवर तैयारी स्पष्ट रूप से दिखाई दी।

इस अवसर पर संतोष कटारिया ने बाज़ार की समझ और उपभोक्ताओं की जरूरतों को जानने के महत्व पर जोर दिया तथा रचनात्मकता के साथ व्यावसायिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता बताई। वहीं मैडी अमृतकर ने छात्रों को मजबूत नेटवर्क बनाने, सहयोग को प्राथमिकता देने और डिजिटल पहचान विकसित करने की सलाह दी।

कार्यक्रम में छात्रों की प्रस्तुतियों को अभिभावकों और डिज़ाइन क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों का उत्साहपूर्ण प्रतिसाद मिला। एमआईटी एडीटी का यह ग्रेजुएशन फैशन शो उभरते डिज़ाइनरों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हो रहा है और उनके पेशेवर सफर की मजबूत शुरुआत माना जा रहा है।
 


वस्त्र पहचान की प्रभावशाली भाषा – डॉ. मंगेश कराड
वस्त्र केवल बदलते ट्रेंड्स या फैशन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह व्यक्तित्व की एक प्रभावशाली अभिव्यक्ति हैं। हम क्या पहनते हैं, उससे हमारी संस्कृति, मूल्य, व्यक्तित्व और भावनाएँ झलकती हैं। सौंदर्य से परे जाकर वस्त्र अर्थ और स्मृतियों को संजोते हैं, जिससे यह निर्धारित होता है कि व्यक्ति स्वयं को कैसे देखते हैं और अन्य उन्हें कैसे देखते हैं। इस प्रकार, वस्त्र पहचान की एक मौन लेकिन प्रभावशाली भाषा बन जाते हैं, जो व्यक्तिगत होने के साथ-साथ सभी के लिए समझने योग्य है, ऐसा मत प्रो. डॉ. मंगेश कराड ने व्यक्त किया।

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