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विकलांगों की मदद के लिए विशेष आर्थिक पैकेज घोषित करे सरकार

धर्मेंद्र सातव द्वारा मांग : दिव्यांग कल्याण महाराष्ट्र राज्य आयुक्तालय पुणे के सामने किया गया ‘भीख मांगो आंदोलन’
वाघोली, मई (ह.ए. प्रतिनिधि)

कोरोना संक्रमण के कठिन समय में विकलांगों को नजरअंदाज क्यों किया जा रहा है? उनकी जितनी मदद हो सके उतनी मदद सरकार को करनी चाहिए। विकलांगों की मदद करना सरकार की नैतिक जिम्मेदारी भी है। इसके लिए जागरूक सरकार के रूप में विकलांगों को मदद का हाथ देने के लिए अहम भूमिका सरकार को निभानी चाहिए। यह अनुरोध महाराष्ट्र राज्य सरकार से धर्मेंद्र कृ. सातव ने की है।
दिव्यांग कल्याण महाराष्ट्र राज्य आयुक्तालय पुणे के आयुक्त से धर्मेंद्र सातव ने निवेदन देकर सरकार से मांग की है कि कोरोना की पृष्ठभूमि पर विकलांगों की मदद के लिए सरकार को विशेष आर्थिक पैकेज घोषित करना चाहिए, इसलिए सरकार ने मुश्किल में फंसे महाराष्ट्र के लाखों विकलांग व्यक्तियों को मदद का विशेष आर्थिक पैकेज घोषित करके उन्हें राहत दे, इस मांग की ओर सरकार का ध्यान जाए इस हेतु गत् गुरुवार को दिव्यांग कल्याण महाराष्ट्र राज्य आयुक्तालय पुणे के सामने धर्मेंद्र सातव की ओर से सरकार का विकलांगों की समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए ‘भीख मांगो आंदोलन’ किया गया।
आगे बोलते हुए धर्मेंद्र सातव ने कहा कि पिछले साल से कोरोना महामारी के कारण महाराष्ट्र के विकलांगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। विकलांग बड़ी आर्थिक संकट में फंस गए हैं। लॉकडाऊन की वजह से सब बंद रहने के कारण घर में ही बैठना पड़ रहा है। रोजगार गया, उद्योगधंधा डूब गया, जिसके चलते विकलांगों का उदरनिर्वाह के गंभीर प्रश्न के साथ उन्हें अन्य मूलभूत सुविधा प्राप्त करना बहुत मुश्किल हो गया है। सरकार ने लॉकडाऊन के समय कामगार, मजदूर, ऑटोरिक्शा चालक, पथारीवालों के साथ अन्य वर्ग के लिए विशेष मदद घोषित की है परंतु जिन्हें दो हाथ, दो पैर, दो आँखें नहीं, मतिमंद, अतितीव्र ऐसे विकलांगों के लिए सरकार ने किसी भी प्रकार की मदद नहीं की है। सरकार इन्हें नजरअंदाज क्यों कर रही है? विकलांग व्यक्तियों की समस्याओं पर ध्यान क्यों नहीं दे रहा है? ऐसा इसलिए है क्योंकि सरकार ने विकलांग अधिकार अधिनियम के तहत कोरोना काल में विकलांगों के लिए विशेष उपाय नहीं किए हैं। केवल परिपत्र जारी कर विकलांगता टीकाकरण और उपचार को प्रधानता दी, परंतु कार्यान्वयन कौन लागू करेगा? विकलांगों की सुरक्षा केवल कागजों पर ही की जाती है? इसीलिए विकलांग व्यक्तियों के पास भीख मांगने के अलावा कोई चारा नहीं है, इसलिए इस आंदोलन द्वारा सरकार की भूमिका का हम विरोध करते हैं। 

अंत में धर्मेंद्र सातव ने कहा कि विकलांगों के अभिभावक के रूप में हम इस मांग को राज्य और केंद्र सरकार को उचित समन्वय के लिए भेजते हैं कि विकलांग व्यक्तियों को मदद का विशेष आर्थिक पैकेज घोषित करके उन्हें राहत दें। इंसानियत के नाते सरकार ने विकलांग व्यक्तियों की ओर देखना चाहिए। आज उन पर बहुत कठिन समय चल रहा है। उनकी ओर मदद का हाथ सरकार को आगे बढ़ाना होगा। विकलांगों को इस परिस्थिति से निजात दिलाने के लिए सरकार को उनके साथ खड़ा रहना चाहिए।

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