हड़पसर, जुलाई (ह.ए. प्रतिनिधि)
जी हां, यह समय की जरूरत है कि हड़पसर को अलग महानगरपालिका बनाना चाहिए। यह मांग बहुत ही स्वाभाविक है लेकिन उससे पहले क्या अलग महानगरपालिका संभालने के लिए प्रशासनिक तंत्र तैयार है, यह बहुत बड़ा सवाल है ? इस ओर भी गंभीर रूप से देखना चाहिए। यह विचार फॉष हड़पसर के अध्यक्ष एवं समाजसेवक वैभव माने ने व्यक्त किये।
उन्होंने आगे कहा कि पुणे महानगरपालिका के खजाने में हजारों करोड़ रुपए हैं। उसके ब्याज और नागरिकों के टैक्स वर पुणे नगरी व हड़पसर के नागरिक बड़े आनंद के साथ रहते हैं। कल अगर हड़पसर महानगरपालिका अलग हुई तो दो-तीन हजार करोड़ या लगनेवाला बजट कहां से मिलेगा?
अंत में समाजसेवक वैभव माने ने कहा कि नवी मुंबई जैसे खड़ी हुई है वैसा ही नियोजन करना होगा और उसके लिए उस स्तर के अध्ययनशील लोगों की टीम तैयार करनी होगी। उस हेतु अथक परिश्रम व मेहनत करनी होगी, नहीं तो नियोजन शून्य महानगरपालिका के रूप का लेबल लगने के लिए वक़्त नहीं लगेगा।
जी हां, यह समय की जरूरत है कि हड़पसर को अलग महानगरपालिका बनाना चाहिए। यह मांग बहुत ही स्वाभाविक है लेकिन उससे पहले क्या अलग महानगरपालिका संभालने के लिए प्रशासनिक तंत्र तैयार है, यह बहुत बड़ा सवाल है ? इस ओर भी गंभीर रूप से देखना चाहिए। यह विचार फॉष हड़पसर के अध्यक्ष एवं समाजसेवक वैभव माने ने व्यक्त किये।
उन्होंने आगे कहा कि पुणे महानगरपालिका के खजाने में हजारों करोड़ रुपए हैं। उसके ब्याज और नागरिकों के टैक्स वर पुणे नगरी व हड़पसर के नागरिक बड़े आनंद के साथ रहते हैं। कल अगर हड़पसर महानगरपालिका अलग हुई तो दो-तीन हजार करोड़ या लगनेवाला बजट कहां से मिलेगा?
अंत में समाजसेवक वैभव माने ने कहा कि नवी मुंबई जैसे खड़ी हुई है वैसा ही नियोजन करना होगा और उसके लिए उस स्तर के अध्ययनशील लोगों की टीम तैयार करनी होगी। उस हेतु अथक परिश्रम व मेहनत करनी होगी, नहीं तो नियोजन शून्य महानगरपालिका के रूप का लेबल लगने के लिए वक़्त नहीं लगेगा।

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